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Omar-Abdullah का यू-टर्न: मोदी से भयभीत होकर अपने गढ़ में वापस लौटे

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित होते ही, उमर अब्दुल्ला ने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया, जबकि उन्होंने पहले चुनाव नहीं लड़ने की कसम खाई थी। जानें क्यों उमर ने अपने फैसले को पलटा और अब गांदरबल सीट से फिर से चुनावी जंग में शामिल हुए हैं। क्या यह कदम मोदी सरकार से डर के कारण है? पूरी कहानी इस खबर में देखें।

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जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव बहुत नज़दीक हैं। 18 सितंबर से 1 अक्टूबर तक जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में चुनाव होने हैं। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के बीच सीट बंटवारे का समझौता हो गया है। दोनों मिलकर 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। दोनों साथ में लड़ने के लिए राजी हो गए हैं। ऐसे में उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) , जिन्होंने चुनाव न लड़ने की कसम खाई थी, अब अचानक से पलटी खा गए हैं। उमर अब्दुल्ला ने कुछ ऐसा किया जिससे वे अब पछता रहे हैं और अपनी गलती स्वीकार कर रहे हैं। वे कह रहे हैं, "मैं चुनाव न लड़कर अवमूल्यन करने की कोशिश कर रहा हूं, जो मेरी गलती थी।"

दरअसल, उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने चुनाव न लड़ने की कसम इसलिए खाई थी क्योंकि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने तक वे चुनाव से दूर रहेंगे। लेकिन अब वे मानते हैं कि यह उनकी बहुत बड़ी गलती थी कि उन्होंने ऐसा किया। यदि वे ऐसा करेंगे, तो उनके पार्टी के लोग कैसे वोट मांगेंगे, कैसे सहयोग करेंगे, और लोग कैसे वोट डालने जाएंगे, यह उमर अब्दुल्ला मानते हैं। नेशनल कांफ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर में 32 उम्मीदवारों की लिस्ट अब जारी कर दी है, जिसमें गांदरबल सीट से उमर अब्दुल्ला का नाम भी शामिल है।

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बता दें, अब्दुल्ला इसी सीट से 2009 से 2014 तक प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अब फिर से इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं। 27 जुलाई 2020 को उन्होंने घोषणा की थी कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन 16 अगस्त को जैसे ही चुनाव की तारीखों का एलान किया गया, उमर थोड़े नरम हो गए।

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NC का गढ़ है गांदरबल 

गांदरबल, जिस सीट से उमर अब्दुल्ला चुनाव लड़ रहे हैं, वह नेशनल कांफ्रेंस का गढ़ रही है। 1977 में पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला की पार्टी का गठन हुआ और पार्टी के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने इस पार्टी की शुरुआत की। हालांकि, विधानसभा चुनाव कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के लिए भी बहुत चुनौतीपूर्ण होंगे।

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