Advertisement

Loading Ad...

एंबुलेंस के लिए नहीं थे पैसे, बीमार पत्नी को रिक्शे में लेकर बुजुर्ग ने तय किया 600 किलोमीटर का सफर, रूला देगी कहानी

बाबू लोहार की 70 साल की पत्नी ज्योति कुछ महीने पहले लकवे का शिकार हो गई थीं. बाबू खुद चलने मेें असमर्थ हैं लेकिन उन्होंने पत्नी के इलाज के लिए 600 किलोमीटर तक ट्रॉली रिक्शा खींचा.

Loading Ad...

ओडिशा (Odisha) के संबलपुर (Sambalpur) से दिल को चीर देने वाला मामला सामने आया है. जो सिस्टम पर ही नहीं इंसानियत पर भी सवाल खड़े करता है. यहां 75 साल के बुजुर्ग ने अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए रिक्शे से 600 किलोमीटर का सफर तय किया. बुजुर्ग ट्रॉली रिक्शे में अपनी पत्नी को बैठाकर संबलपुर से कटक पहुंचे. 

झुकी हुई कमर, चलने में असमर्थ, कड़ाके की ठंड और संबलपुर से कटक तक का सफर रिक्शे से तय करने वाले बुजुर्ग बाबू लोहार की कहानी हर किसी को रुला रही है. बाबू लोहार की 70 साल की पत्नी ज्योति कुछ महीने पहले लकवे का शिकार हो गई थीं. पास के अस्पताल में इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. ऐसे में उन्होंने पत्नी को कटक ले जाने का फैसला किया, लेकिन एंबुलेंस का खर्चा उठाने के पैसे नहीं थे. जो पैसे थे वो इलाज और दवाईयों के लिए बचाकर रखे थे. 

हर दिन 30 किलोमीटर का सफर 

Loading Ad...

बाबू लोहार ने रिक्शे से संबलपुर से कटक तक का सफर 9 दिनों में पूरा किया. इसके बाद वापस कटक से संबलपुर वापस भी रिक्शे से ही गए. बताया जा रहा है हर दिन उन्होंने बीमार पत्नी को लेकर रिक्शे से हर दिन करीब 30 किलोमीटर का सफर तय किया. इस दौरान ठंड और मुश्किल सफर में भी उनका हौसला नहीं टूटा. 

Loading Ad...

बाबू लोहार ने रास्ते मेें पत्नी ज्योति का पूरा ध्यान रखा, जरुरत का हर सामान रिक्शान में रखते

Loading Ad...

हालांकि इस दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस ने बाबू लोहार की मदद की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने रिक्शा छोड़ने से इंकार कर दिया. बाबू लोहार कहते हैं, 'मेरे जीवन में दो ही प्रेम हैं. एक मेरी पत्नी, जिसे मैं घर वापस ले जा रहा हूं और दूसरा मेरा रिक्शा. मैं इनमें से किसी को भी नहीं छोड़ सकता.’ बाबू लोहार और ज्योति के कोई बच्चा नहीं है. कोई परिवार नहीं है, वे दोनों ही एक दूसरे की कमजोरी और ताकत हैं.  बाबू लोहार का रिक्शा जिंदगी के मुश्किल सफर में सच्चे साथी की तरह चला. हालांकि रास्ते में लोगों ने बाबू लोहार की मदद के लिए उन्हें कुछ खाने का सामान और रुपए दिए. 

पत्नी के लिए रिक्शा में रखते थे पूरा सामान 

बाबू लोहार पत्नी ज्योति से बेहद प्यार करते हैं ढलती उम्र और तमाम मुश्किलों के बीच भी बाबू ज्योति का पूरा ख्याल रखते हैं. सफर के दौरान वह अपने साथ कंबल, बिस्तर, चादर और मच्छरदानी लेकर चलते थे. पत्नी को बिस्तर पर लिटाते और चल पड़ते अंतहीन सफर पर, बाबू लोहार दिन में ऊपर वाले का नाम जपते हुए सफर करते और रात में किसी दुकान के पास या सड़क किनारे आराम करते. 

Loading Ad...

यह भी पढ़ें- ‘घर में शादी है मां की डेडबॉडी आई तो अपशगुन होगा’ वृद्धाश्रम में मां की मौत, बेटे का शव लेने से इंकार, झकझोर देगी कहानी

ज्योति को कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती करवाया गया. करीब दो महीने तक उनका इलाज चला. इस दौरान बाबू लोहार कटक में ही रहे. यहां ई रिक्शा चलाया, कबाड़ बीना और इधर-उधर छोटा मोटा काम कर पैसे जुटाए. नवंबर से जनवरी तक ज्योति के इलाज के बाद बाबू लोहार वापस संबलपुर लौटे. पूरा सफर रिक्शे से ही तय किया. ज्योति के लकवे का इलाज तो हो गया लेकिन नई मुसीबत आन पड़ी. 

इलाज के बाद भी नहीं खत्म हुई मुश्किलें

Loading Ad...

संबलपुर लौटते समय बाबू लोहार का रिक्शे को ट्रक ने टक्कर मार दी. टक्कर इतनी तेज थी कि पत्नी ज्योति गिरकर घायल हो गईं. स्थानीय लोगों ने उन्हें ने अस्पताल पहुंचाया और इलाज की व्यवस्था की. यहां इलाज के बाद लोगों ने बाबू लोहार से ज्योति को बस में ले जाने की पेशकश की लेकिन उन्होंने अपना रिक्शा छोड़ने से इंकार कर दिया. बाबू लोहार ने कहा, रोजी-रोटी इसी रिक्शा से चलती है. इस दौरान उनकी मदद करने वाले पुलिस अधिकारी बिकाश सेठी ने बताया कि इस बुजुर्ग दंपत्ति की हेल्थ और उम्र को देखते हुए उनकी मदद की पेशकश की गई थी, लेकिन बाबू लोहार ने विनम्रता के साथ इंकार कर दिया. बिकाश सेठी ने बताया, उम्र के इस पड़ाव पर आकर भी दोनों किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते. दोनों का एक दूसरे के लिए प्यार और लगाव किसी मिसाल से कम नहीं है. 

यह भी पढ़ें

हालांकि ये मामला सिस्टम पर कई सवाल खड़े करता है, आज भी क्यों गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को कई किलोमीटर का सफर क्यों तय करना पड़ता है, विकास के तमाम दावों के बाद भी क्यों स्थानीय स्तर पर उचित इलाज नहीं मिलता, क्यों आज भी गरीब तबके को एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पा रही. क्या सरकारों की नजर में गरीब की जरूरत केवल 10-10 किलो राशन तक सीमित रह गई. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...