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अब थर-थर कांपेंगे भारत के दुश्मन... 60 सेकंड में 6 गोले दागने वाली खतरनाक तोप बनकर तैयार, जल्द होगा ट्रायल

भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (DRDO ) के व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट यानी VRDE का माउंटेड गन सिस्टम पूरी तरीके से बनकर तैयार है. इसे VRDE ने ही डिजाइन और डेवलप किया है. यह एक ऐसी गन है, जो 1 मिनट में 6 राउंड फायर करती है. सिर्फ 85 सेकंड में यह दुश्मनों पर अटैक करने के लिए तैयार हो जाती है. जानिए इस खास गन की खासियत.

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भारतीय सेना एक ऐसी खतरनाक तोप का ट्रायल करने जा रही है, जिसके सामने दुश्मन थर-थर कापेंगे. यह गन सिस्टम डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) में बनकर पूरी तरीके से तैयार है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि जब यह दुश्मनों पर फायरिंग करती है, तो उसकी लोकेशन का भी पता लगा सकती है. इसे किसी भी स्थिति में कहीं भी तैनात किया जा सकता है. इसे ले जाने में भी काफी आसानी होती है. तो चलिए जानते हैं कि इसकी क्या कुछ खासियत है?  कैसे यह दुश्मन को तबाह करने में पूरी तरीके से सक्षम है? 

भारत का माउंटेड गन सिस्टम ट्रायल के लिए तैयार 

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (VRDE) का माउंटेड गन सिस्टम पूरी तरीके से बनकर तैयार है. इसे VRDE ने ही डिजाइन और डेवलप किया है. यह एक ऐसा गन है, जिसे एक आर्म्ड व्हीकल में तैनात किया जा सकता है. यह कहीं भी किसी भी जगह आसानी से लाया जा सकता है और किसी भी परिस्थिति में कहीं भी तैनात किया जा सकता है. 

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दुश्मनों की लोकेशन का पता लगा पाने में सक्षम 

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इस गन की एक सबसे बड़ी खासियत है कि जब यह दुश्मनों पर फायरिंग करती है, तो यह उनका पता भी लगा सकती है. इसके अलावा अगर आप चाहे, तो इस गन की लोकेशन को भी तुरंत बदल सकते हैं. इससे दुश्मन गन पर सटीक फायर नहीं कर पाएगा. चाहे रेगिस्तान वाली जगह हो या फिर समतल इलाका, फिर चाहे पहाड़ या फिर पूर्वी राज्यों का पहाड़ी इलाका, इसे किसी भी जगह पर तैनात किया जा सकता है. इसे रेलवे या फिर C-17 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से भी लाया जा सकता है.

45 किलोमीटर की रेंज, 1 मिनट में 6 राउंड फायर 

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यह गन पूरी तरीके से देसी है. इसे बनाने में जितनी भी चीजें इस्तेमाल हुई है. उनमें 80 फीसदी सामान देश से ही निर्मित है. इस गन की रेंज 45 किलोमीटर है और यह 1 मिनट में 6 राउंड फायर कर सकती है. यह गन दुश्मनों को भेदने में सिर्फ 85 सेकंड का समय लेती है. इसकी एक और खासियत है कि यह जहां पर अपना निशाना बनाती है. उसके आसपास का करीब 50 स्क्वायर मीटर का इलाका पूरी तरीके से तबाह हो जाता है. 

90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार, कुल वजन 30 टन

इस गन का कुल वजन करीब 30 टन है. इनमें 15 टन व्हीकल का वजन और 15 टन तोप का वजन है. यह ऊबड़-खाबड़ एरिया में 60 किलोमीटर प्रति घंटा और समतल एरिया में 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है. इस माउंटेड गन में ATAGS यानी अटैक गन फिट है. यह एक स्वदेशी एडवांस्ड टॉड गन सिस्टम है, जो सेना में शामिल हो चुका है. यह पूरी तरीके से ऑटोमेटिक है. इसे कॉर्डिनेट बेस देने के बाद अगले ही पल आसपास की जगह पूरी तरह से तबाह हो जाती है. इस व्हीकल के आगे का केबिन बुलेट प्रूफ है और इस वजह से यह पूरी तरह से सुरक्षित रहता है. इसे बनाने में कुल 2.5 साल का समय लगा है. इसमें में कुल 7 क्रू है. 

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कितनी है इस गन की कीमत 

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यह सिस्टम पूरी तरीके से भारत में निर्मित हुआ है. इसकी लागत कुल 15 करोड़ रुपए है, लेकिन अगर इसे विदेशी रेंज के हिसाब से खरीदा जाए, तो इसकी कीमत 30 से 35 करोड़ के आसपास होगी. VRDE का कहना है कि अगर उसे ज्यादा आर्डर मिलते हैं, तो उसकी कीमत को और भी कम हो सकती है. भारतीय सेना को अभी फिलहाल 700 से 800 माउंटेन गन की जरूरत है, जबकि अभी सेना के पास ऐसी एक भी गन नहीं है. बता दें की दुनिया में गिनती के कुछ देश ही इस तरह का माउंटेड गन बनाते हैं और अब भारत भी उन चुनिंदा देशों की क्लब में शामिल हो गया है. इस गन का इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध में भी देखने को मिला. यह दुश्मनों के एरिया में फायर कर पूरी तरीके से तबाही मचा सकती है. 

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