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'ड्रामा नहीं, डिलीवरी दें, हार की हताशा से निकले विपक्ष...', संसद सत्र शुरू होते ही फ्रंट फुट पर आए PM मोदी, कसा तंज

संसद के शीतकालीन सत्र से पहले PM मोदी फुल फॉर्म में दिखे. उन्होंने सदम में बनी गतिरोध की स्थिति और हंगामे को लेकर विपक्ष पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने आगे कहा कि यह सत्र विकसित भारत के प्रयास में और ऊर्जा भरने का अवसर है. ड्रामा की और भी जगहें हैं, यहां डिलिवरी पर काम करें. उन्होंने ये भी कहा कि विपक्ष हार की हताशा से बाहर नहीं निकल पा रहा है.

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संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मीडिया को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला. बीते कई सत्रों से नहीं चल पा रही संसद की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि संसद परिसर में ड्रामा करने की बहुत जगहें बाहर हैं, लेकिन सदन में हंगामे की कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा कि सदन में ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए. 

सदन में ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए

इस दौरान प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों, खासकर विपक्ष से अपील की कि वे सत्र को सुचारू और गरिमामय तरीके से चलाने में सहयोग दें. प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद देश की आशाओं और अपेक्षाओं का केंद्र है. ऐसे में यहां नारेबाजी नहीं, बल्कि नीतियों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए. नारे नहीं, नीति पर जोर देना चाहिए और इसके लिए नीयत होनी चाहिए.

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'सदन में हो राष्ट्रनीति पर बात'

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उन्होंने कहा कि 'भारत ने यह सिद्ध किया है कि डेमोक्रेसी कैन डिलीवर. इसलिए यह सत्र विकसित भारत के प्रयास में और ऊर्जा भरने का अवसर है. वहीं बिहार जीत के बाद गदगद पीएम मोदी ने सलाह दी कि विपक्ष पराजय की निराशा से बाहर निकलकर आए और मजबूत मुद्दे उठाए. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि यह सत्र पराजय की हताशा या विजय के अहंकार का मैदान नहीं बनना चाहिए. नई पीढ़ी के सदस्यों को अनुभव का लाभ मिलना चाहिए. यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए. राष्ट्रनीति पर बात होनी चाहिए.

विपक्ष पराजय की निराशा से बाहर निकले!

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पीएम मोदी ने कहा कि चुनावी पराजय की निराशा से निकलना चाहिए और रचनात्मक चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए. कुछ राजनीतिक दल अभी भी बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन संसद निराशा का मैदान नहीं बननी चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा, "सत्र किसी पक्ष की निराशा या किसी की विजय के अहंकार का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए. नकारात्मकता से देश निर्माण नहीं होता.

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने युवा सांसदों को अधिक अवसर देने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि नए सदस्यों के अनुभव और उनकी नई सोच से देश को फायदा होना चाहिए. हमारी युवा पीढ़ी जो नई दृष्टि लाती है, उससे सदन भी लाभान्वित होना चाहिए और उसके माध्यम से देश को भी नए विचार मिलने चाहिए.

ड्रामा की जगह नहीं है सदन!

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प्रधानमंत्री ने दोहराया कि सदन ड्रामा की जगह नहीं है. यह काम करने की जगह है. हमें जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करना होगा. पीएम मोदी ने सभी दलों को संदेश देते हुए कहा, "मेरी सभी दलों से अपील है कि शीतकालीन सत्र में पराजय की बौखलाहट मैदान नहीं बननी चाहिए और यह सत्र विजय के अहंकार में भी परिवर्तित नहीं होना चाहिए."

इससे पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोमवार को उम्मीद जताई कि संसद के सभी सदस्य लोकतंत्र की परंपराओं को मजबूत करने और शीतकालीन सत्र को 'प्रोडक्टिव' बनाने के लिए सार्थक योगदान देंगे.

कब तक चलेगा संसद का शीतकालीन सत्र?

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इस सत्र में बी हंगामा होने के आसार हैं. विपक्षी दल SIR, आंतरिक सुरक्षा और लेबर कोड पर चर्चा की मांग कर रहे हैं. दूसरी तरफ, सरकार चाहती है कि वंदे मातरम् पर चर्चा हो. आपको बताएं कि शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा. 19 दिन के सत्र में 15 बैठकें होंगी. इस दौरान एटॉमिक एनर्जी बिल समेत 10 नए बिल पेश हो सकते हैं.

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