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Nitish की चुप्पी मोदी को डरा रही होगी, जब-जब ख़ामोश हुए कुछ बड़ा खेल किया !
Bihar की राजनीति में CM नीतीश कुमार फिर एक बार चर्चा के केंद्र में आ गए. जहां लालू यादव ने उनके लिए दरवाजे खोल दिए हैं वहीं नीतीश की चुप्पी से NDA नेता बैचेन हो गए हैं.
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दरअसल, बिहार के सियासी गलियारों में पिछले कुछ दिनों से असामान्य घटनाक्रम हुए. जैसे बिहार के CM नीतीश कुमार का दिल्ली आना, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनके परिवार से मिलना और BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा से तय की गई मुलाकात को रद्द कर चुपचाप वापस लौट आना. नीतीश के इसी दिल्ली दौरे के बाद उनके पलटी मारने की सुगबुगाहट होने लगी थी. इस बीच लालू यादव ने भी फिर एक बार नीतीश के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं. एक इंटरव्यू में लालू ने कहा, नीतीश कुमार के लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं अगर नीतीश महागठबंधन में आते हैं तो उनका स्वागत है. लालू के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई. नीतीश के पाला बदलने की अटकलों पर सिर्फ नीतीश ही विराम लगा सकते थे लेकिन उन्होंने कुछ ना बोलकर इस बात को और हवा दे दी.
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नीतीश-तेजस्वी की एक तस्वीर और मिलने लगे संकेत !
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एक तरफ नीतीश कुमार की चुप्पी नए संकेत दे रही है तो दूसरी ओर एक तस्वीर इस संकेतो को हवा दे रही है. ये तस्वीर है RJD नेता तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार की. इसमें देख सकते हैं तेजस्वी मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर नीतीश कुमार के सामने खड़े हैं. नीतीश के फेस पर भी स्माइल है और वे तेजस्वी के कंधे पर हाथ रखे हुए हैं. चाचा भतीजा की मुलाकात एक सरकारी कार्यक्रम में हुई थी. ऐसे में इसे एक शिष्टाचार भेंट माना जा सकता है लेकिन इस बार तेजस्वी और नीतीश के ये हाव भाव बता रहे हैं कि बात इतनी सी नहीं है. हालांकि जब तेजस्वी से पिता लालू यादव के बयान पर पूछा गया तो उन्होंने ये कहकर टाल दिए कि मीडिया के लिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है.
एक तरफ तेजस्वी यादव कहते हैं कि नीतीश कुमार की विदाई का वक्त आ गया. दूसरी ओर उन्हीं के पिताजी लालू यादव नीतीश के लिए दरवाजे खोल देते हैं और फिर ये तस्वीर…जो कह रही है मकर संक्राति से पहले कुछ तो खिचड़ी पकने लगी है.वहीं, बिहार में महागठबंधन में शामिल कांग्रेस नेता शकील अहमद ने नीतीश के आने पर कहा कि, गांधीवादी विचारधारा में विश्वास रखने वाले लोग गोडसेवादियों से अलग हो जाएंगे तो सब साथ हैं।
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हालांकि इस लालू के बयान पर JDU के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने किनारा कर लिया और कहा छोड़िए ना लालू जी क्या बोलते हैं ये उन्हीं से जाकर पूछिए।भले ही ललन सिंह ने NDA की मजबूती की बात कही है लेकिन ये भी एक सच्चाई है कि कुछ बड़ा करने से पहले नीतीश कुमार या तो चुप्पी साध लेते हैं या किसी ओर को जवाब देने के लिए आगे कर देते हैं।
तो क्या फिर पाला बदल लेंगे नीतीश ?
दरअसल बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होंगे. इससे पहले सियासी बाजार गर्म है. नीतीश कुमार वे हैं जिन्होंने विपक्ष को INDIA का मंत्र दिया था और फिर अचानक NDA में चले गए. नीतीश पर भले ही पलटीमार का टैग लगा हो बावजूद इसके वे NDA के स्वाभिमान और INDIA की जरूरत बने हुए हैं. दबाव की राजनीति को झेलने में माहिर नीतीश कुमार हिचकोले खाती नाव की पतवार अपने हाथ में ले लेते हैं और जता देतें हैं कि वे सभी के लिए कितने जरूरी हैं.
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कब-कब बदले नीतीश ?
नीतीश कुमार के पाला बदलने की कहानी तो कुछ ऐसी है कि वे कहते रहे मर जाएंगे लेकिन BJP के साथ नहीं जाएंगे और अगले ही पल इस खेमे से उस खेमे में पैर रख देते हैं.
- बिहार में BJP और नीतीश कुमार का गठबंधन 17 साल रहा
- साल 2015 में नीतीश कुमार ने BJP छोड़ RJD के साथ गठबंधन किया
- साल 2017 में RJD छोड़ BJP के साथ सरकार बनाई
- साल 2022 में फिर BJP से नाता तोड़कर RJD के साथ सरकार बनाई
- साल 2024 में फिर पाला बदला और RJD छोड़ BJP के साथ आए
पिछले 10 सालों में नीतीश कुमार का मन 5 बार बदल चुका है. जब आखिरी बार वे BJP में आए तो इसके बाद उन्होंने कहीं भी जाने से इंकार कर दिया था. PM मोदी के साथ मंच साझा करते हुए उन्होंने कई बार बोला की इस बार कहीं नहीं जाएंगे. इधर ही रहेंगे.
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हालांकि अब नीतीश कुमार की इन बातों को ज्यादा सीरियसली नहीं लिया जाता इसलिए फिर एक बार बिहार की राजनीति नीतीश को लेकर उबाल पर है NDA बैचेन है और INDIA की निगाहें नीतीश के अगले कदम पर हैं. नीतीश के मन में क्या चल रहा है ये तो वे खुद ही जानते हैं क्योंकि आखिरी समय तक उनके बारे में उनके करीबियों को भी क्लियर नहीं रहता कि उनका अगला कदम क्या होगा ?