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नितिन नबीन: 45 की पार्टी और 45 साल के नए अध्यक्ष, विरासत में मिली राजनीति में कैसे खुद की बनाई मजबूत पहचान

पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संगठन के सधे हुए कार्यकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रुप में अपनी पहचान बनाई.

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New President of BJP: भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल चुका है. औपचारिक रूप से नितिन नबीन ने सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया है. खास बात यह भी है कि BJP की स्थापना के 45 साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी को भी 45 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है. 

भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में यह संयोग संगठन के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है. युवा ऊर्जा और अनुभव के संतुलन के साथ नितिन नबीन से पार्टी को नई राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद की जा रही है. आईए नितिन नबीन के सियासी सफर पर एक नजर डालते हैं. 

विरासत में मिली राजनीति, खुद की बनाई अलग पहचान 

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नितिन नबीन का जन्म 23 मई 1980 को रांची में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई. इसके बाद आगे की पढ़ाई दिल्ली के सीएसकेएम (CSKAM) पब्लिक स्कूल से हुई. यहां उन्होंने सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी की. 

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नितिन नबीन के पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा की गिनती BJP के कद्दावर नेताओं में होती थी, जो पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे थे. बिहार की राजनीति में नितिन नबीन का नाम नया नहीं है. राजनीति भले ही उन्हें विरासत में मिली, लेकिन पहचान अपने दम पर बनाई. पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संगठन के सधे हुए कार्यकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रुप में अपनी पहचान बनाई. साल 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर नितिन नबीन पहली बार सदन पहुंचे. 

लगातार 5 बार विधायक बने 

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परिसीमन के बाद बांकीपुर सीट से उनकी राजनीतिक जमीन और मजबूत हुई. फिर साल 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर वे पांच बार विधायक बने. बिहार विधानसभा में वे उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी जीत की निरंतरता पार्टी के लिए भरोसे का आधार रही है. 

बिहार की NDA सरकार में नितिन नबीन ने सड़क निर्माण, शहरी विकास, आवास और विधि जैसे अहम विभाग संभाले। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ का यह मेल ही उन्हें पार्टी के भीतर अलग पहचान देता है. हालांकि, 2025 में मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. 

बिहार में BJP को जमीनी स्तर पर किया मजबूत 

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नितिन नबीन की असली ताकत संगठन में दिखी. साल 2016 से 2019 तक बिहार BJP युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया. इसके बाद वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव बने. संगठन में पहचान बनी तो पार्टी ने उन्हें बिहार से बाहर जिम्मेदारियां सौंपीं. सिक्किम में संगठन प्रभारी और फिर छत्तीसगढ़ के सह-इंचार्ज के तौर पर उन्होंने चुनावी प्रबंधन की कमान संभाली. 

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नितिन नबीन के राजनीतिक करियर का निर्णायक मोड़ माना जाता है. जिस समय भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस को मजबूत माना जा रहा था और ज्यादातर सर्वे कांग्रेस की वापसी का दावा कर रहे थे, उस वक्त BJP ने नबीन पर भरोसा जताया. संगठनात्मक पुनर्गठन, बूथ स्तर तक समन्वय और रणनीतिक तैयारी का नतीजा रहा कि BJP ने स्पष्ट बहुमत से सत्ता में वापसी की. 

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संगठन के भीतर उन्हें ऐसा व्यक्ति माना जाता है जो नेतृत्व की सीमाओं को समझता है और सीनियर लीडर्स को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है. करीब दो दशकों का संगठनात्मक और चुनावी अनुभव, 5 बार विधायक रहने का रिकॉर्ड और मंत्री पद के अनुभव ने नितिन नबीन को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में एक मजबूत चेहरा बनाया. 

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