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NHAI Rules 2026: अब एक्सप्रेसवे का पूरा टोल नहीं, सिर्फ इस्तेमाल किए गए हिस्से का करना होगा भुगतान
NHAI Rules 2026: सरकार ने नेशनल एक्सप्रेसवे (नेशनल हाईवे) पर टोल वसूली के नियम बदल दिए हैं. अब सिर्फ चालू और तैयार हिस्से के हिसाब से ही टोल लिया जाएगा, न कि पूरे एक्सप्रेसवे के लिए. इसके अलावा, टोल दर अब सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग की तरह होगी, जो आमतौर पर कम होती है.
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Toll Plaza Rules: भारत में सड़क यात्रा को आसान और किफायती बनाने के लिए सरकार ने नेशनल एक्सप्रेसवे (नेशनल हाईवे) पर टोल वसूली के नियम बदल दिए हैं. अब सिर्फ चालू और तैयार हिस्से के हिसाब से ही टोल लिया जाएगा, न कि पूरे एक्सप्रेसवे के लिए. इसके अलावा, टोल दर अब सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग की तरह होगी, जो आमतौर पर कम होती है. यह बदलाव 15 फरवरी 2026 से लागू हो गया और इसका उद्देश्य यात्रियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर दोनों को राहत देना है.
पुरानी व्यवस्था और यात्री परेशानियां
पहले, जब कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह से तैयार नहीं होता था और केवल कुछ हिस्से ही चालू होते थे, तब भी यात्रियों से पूरे एक्सप्रेसवे का टोल वसूला जाता था. चूंकि एक्सप्रेसवे की टोल दर सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा होती है, इसलिए यह व्यवस्था यात्रियों के लिए अतिरिक्त बोझ बन जाती थी. तेज सफर और कम ट्रैफिक की सुविधा के लिए एक्सप्रेसवे की दरें अधिक होती हैं, लेकिन आंशिक रूप से तैयार मार्ग पर पूरी राशि लेना अक्सर यात्रियों की नाराजगी का कारण बनता था.
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नए नियमों के तहत क्या बदलेगा
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अब नए नियमों के अनुसार, अगर कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार नहीं है, तो केवल चालू हिस्से के लिए ही टोल लिया जाएगा. इसके अलावा, उस हिस्से पर टोल दर सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग के हिसाब से होगी, जो कि एक्सप्रेसवे की दर से कम होती है. इसका मतलब यह है कि अगर कोई एक्सप्रेसवे आधा ही चालू है, तो यात्रियों को उतनी ही राशि का भुगतान करना होगा, जितनी सेवा वह इस्तेमाल कर रहे हैं. यह बदलाव रोजाना या नियमित रूप से एक्सप्रेसवे इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए खास राहत का कारण बनेगा और टोल वसूली में पारदर्शिता भी बढ़ाएगा.
लागू होने की तारीख
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सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव 15 फरवरी 2026 से लागू हो गया हैं. इसके बाद जहां-जहां एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से चालू होंगे, नए नियम वहीं पर लागू होंगे. सरकार का मानना है कि इस कदम से यात्रियों की यात्रा लागत कम होगी और सफर और अधिक सुगम और किफायती बनेगा. साथ ही, ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भी सुधार आएगा और पारदर्शिता बढ़ेगी.