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झारखंड के गुमला में 15 लाख का इनामी नक्सली मार्टिन एनकाउंटर में ढेर, भारी मात्रा में हथियार बरामद

झारखंड पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है. पीएलएफआई सुप्रीमो और 15 लाख का इनामी नक्सली मार्टिन केरकेट्टा गुमला जिले में मुठभेड़ में मारा गया. वह दो दशक से झारखंड के कई जिलों में 70 से अधिक नक्सली वारदातों में वांटेड था. गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने ऑपरेशन चलाया, जिसमें मार्टिन ढेर हो गया.

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झारखंड पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है. मंगलवार देर रात गुमला जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) का सुप्रीमो और 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली मार्टिन केरकेट्टा मारा गया है. मार्टिन पिछले दो दशकों से झारखंड के कई जिलों में आतंक का पर्याय बना हुआ था. खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, रांची और खासकर गुमला जिले में उसका नाम दहशत का प्रतीक बन चुका था. उस पर 70 से अधिक नक्सली वारदातों में संलिप्त होने का आरोप था.

कैसे मिली पुलिस को जानकारी?

गुमला के पुलिस अधीक्षक हरिश बिन जमा को खुफिया सूचना मिली थी कि मार्टिन केरकेट्टा अपने हथियारबंद दस्ते के साथ कामडारा थाना क्षेत्र के चंगाबाड़ी ऊपरटोली गांव में एक कारोबारी से रंगदारी वसूलने के इरादे से आया हुआ है. सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल विशेष टीम गठित की और पूरे इलाके को घेर लिया. जैसे ही पुलिस दस्ते ने इलाके में घेराबंदी शुरू की, नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और मुठभेड़ के दौरान मार्टिन मौके पर ही ढेर हो गया. पुलिस को मुठभेड़ स्थल से हथियार भी बरामद हुए हैं.

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ऑपरेशन में कौन-कौन शामिल था?

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इस पूरे ऑपरेशन में गुमला की एंटी नक्सल क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और दो थाना क्षेत्रों की पुलिस की भूमिका अहम रही. ऑपरेशन के दौरान जवानों ने पूरे संयम और रणनीति के साथ कार्रवाई की, जिससे आम लोगों को कोई नुकसान नहीं हुआ. पुलिस का कहना है कि इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है. आशंका जताई जा रही है कि मार्टिन के अन्य साथी आसपास के जंगलों में छिपे हो सकते हैं.

कौन था मार्टिन केरकेट्टा?

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मार्टिन केरकेट्टा मूल रूप से गुमला जिले के कामडारा थाना क्षेत्र के रेड़मा गांव का निवासी था. वह पीएलएफआई के पूर्व प्रमुख दिनेश गोप का खास सहयोगी था. दिनेश गोप की नेपाल से गिरफ्तारी के बाद मार्टिन को संगठन की कमान सौंपी गई थी. वह पीएलएफआई की केंद्रीय समिति का सदस्य था और लंबे समय से झारखंड के विभिन्न इलाकों में लेवी वसूली, धमकी और हिंसक घटनाओं को अंजाम दे रहा था. दो-तीन बार वह पहले भी पुलिस मुठभेड़ों में बच निकला था, लेकिन इस बार उसका नेटवर्क और किस्मत दोनों जवाब दे गए.

पुलिस का बयान 

एसपी हरिश बिन जमा ने इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा, “गुमला पुलिस की कार्रवाई में 15 लाख का इनामी पीएलएफआई सुप्रीमो मार्टिन केरकेट्टा मारा गया है. यह क्षेत्र में शांति बहाली और उग्रवाद पर नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है.” पुलिस और सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन के बाद आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान तेज कर दिया है. सरकार और पुलिस अब इन नक्सली संगठनों की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने और ग्रामीण इलाकों में विश्वास बहाली के लिए सक्रिय भूमिका में हैं. इस कार्रवाई से न केवल एक बड़े नक्सली चेहरे का अंत हुआ है, बल्कि यह भी स्पष्ट संदेश गया है कि राज्य सरकार और पुलिस अब उग्रवाद के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं.

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बताते चलें कि झारखंड में नक्सली गतिविधियों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन मार्टिन केरकेट्टा जैसे कुख्यात नक्सली की मौत इस बात का संकेत है कि राज्य में कानून का शिकंजा अब और मजबूत हो रहा है. पुलिस और सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी जीत है, बल्कि आने वाले समय में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का संकेत भी है. अब देखना यह होगा कि पुलिस इस सफलता को अगले स्तर तक कैसे ले जाती है और बाकी बचे नक्सली गुटों के खिलाफ क्या रणनीति अपनाई जाती है.

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