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NATO-ट्रंप की धमकियों का नहीं पड़ा असर, रूस के साथ संबंध नहीं तोड़ेगा भारत, रूसी नेवी डे में शामिल होगा भारत का युद्धपोत INS 'तमाल'
यूक्रेन युद्ध के बीच जब अमेरिका और नाटो लगातार भारत पर रूस से संबंध तोड़ने का दबाव बना रहे हैं, तब भारत ने अपने रुख से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आने वाला. नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि किसी अन्य देश की वजह से किसी दूसरे देश से, किसी की धमकी के कारण वह अपने संबंध किसी कीमत पर नहीं तोड़ेगा.
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में तटस्थ रहने की नीति के कारण भारत पर तमाम तरह के अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ रहे हैं. पहले अमेरिका और यूरोप के देश अलग-अलग धमकियां देते थे लेकिन बीते दिनों नाटो के प्रमुख ने जिस तरह नई दिल्ली को धमकाया उस पर काफी हो हल्ला मचा. हालांकि भारत ने अपने रूख से साफ कर दिया है कि रूस से संबंध तोड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता है.
NATO की धमकियों के बीच भारत ने अपने रुख से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आने वाला. हाल ही में भारतीय नौसेना का आधुनिक युद्धपोत INS तमाल रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर पहुंचा है. यह युद्धपोत वहां आयोजित होने वाले रूसी नौसेना दिवस के भव्य समारोह में हिस्सा लेगा और भारत रूस की मजबूत साझेदारी का प्रतीक बनेगा.
रूसी नेवी डे में शामिल होगा INS तमाल
हर साल जुलाई के आखिरी रविवार को रूस में नेवी डे मनाया जाता है और इस बार यह आयोजन 27 जुलाई को हो रहा है. भारतीय युद्धपोत INS तमाल इस मौके पर रूसी युद्धपोतों के साथ मिलकर अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगा. यह भारतीय नौसेना का ऐसा अंतिम युद्धपोत है जिसे रूस में तैयार किया गया है.
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रूसी सरकारी मीडिया ने INS तमाल की उपस्थिति को दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का संकेत बताया है. इस युद्धपोत को बनाने वाले रूस के यांतर शिपयार्ड के सीईओ एंद्रे पूचकोव ने कहा कि यह पोत पूरी तरह ट्रायल में सफल रहा है और इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि यह पोत सतह, पानी के नीचे, जमीन और आसमान से आने वाले खतरों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है.
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सीईओ पूचकोव ने यह भी बताया कि भले ही INS तमाल का निर्माण रूस में हुआ हो, लेकिन प्रोजेक्ट 11356 के तहत भारत में जो दो अन्य युद्धपोत बनाए जा रहे हैं, उनके लिए रूस विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग देता रहेगा. रूसी रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि INS तमाल ऐसा आठवां युद्धपोत है जिसे रूस ने भारत के लिए तैयार किया है.
यह युद्धपोत अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से लैस है. इसमें Shtil-1 एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, तोप, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरण लगे हैं, जो इसे ड्रोन और मानव रहित विस्फोटक नौकाओं से सुरक्षित रखते हैं.
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NATO ने क्या धमकी दी थी?
इस पूरी स्थिति के बीच नाटो के प्रमुख और अमेरिका की ओर से भारत को लगातार चेतावनियां मिल रही हैं. नाटो प्रमुख ने कहा था कि अगर भारत रूस से तेल खरीद जारी रखता है तो उस पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है. वहीं अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के करीबी एक सीनेटर ने भारत पर प्रतिबंध लगाने वाला प्रस्ताव भी रखा है. रूस पर दबाव बनाने के लिए नाटो देश भारत को धमका रहे हैं, लेकिन भारत ने इन सबके बावजूद रूस के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं.
भारत के दौरे पर आएंगे व्लादिमीर पुतिन
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भारत ने हाल ही में रूस को चावल की एक बड़ी खेप भी भेजी है और इसी साल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की भी संभावना है. इस दौरान रक्षा क्षेत्र में कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं जिनमें लड़ाकू विमानों की खरीद भी शामिल है.
भारत की विदेश नीति हमेशा से राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती रही है. INS तमाल की रूस में उपस्थिति न केवल सैन्य साझेदारी का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत अपने निर्णय खुद करता है और किसी के दबाव में नहीं आता. रूस के साथ यह सहयोग भारत की स्वतंत्र रणनीतिक सोच और आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण है.
INS तमाल में क्या है खास?
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यह अत्याधुनिक युद्धपोत न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल, केमिकल रक्षा प्रणाली से लैस है. इसमें हेलिकॉप्टर संचालन की बेहतरीन क्षमता है. इसके अलावा इस युद्धपोत को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल व वर्टिकल लॉन्च सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल से सुसज्जित किया गया है.
युद्धपोत 100 मिमी मुख्य तोप, हैवी टॉरपीडो और रॉकेट्स क्षमता युक्त है. तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो इसमें उन्नत संचार और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमताएं हैं. इस ऐतिहासिक अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. यहां जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और रूसी नौसेना विभाग के महानिदेशक ने डिलीवरी अधिनियम पर हस्ताक्षर किए.
भारत-रूस सामरिक साझेदारी का प्रतीक है INS तमाल
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तमाल का कमीशनिंग भारत-रूस सामरिक साझेदारी का प्रतीक है. पिछले 65 वर्षों में भारत-रूस साझेदारी में यह 51वां युद्धपोत है. इसमें 26 प्रतिशत स्वदेशी प्रणाली, जैसे ब्रह्मोस मिसाइल व हुमसा-एनजी सोनार शामिल हैं. जहाज में लगभग 250 नाविक और 26 अधिकारी हैं. इसका ध्येय वाक्य है- “सर्वत्र सर्वदा विजय.” आईएनएस तमाल अब जल्द ही अपने गृह बंदरगाह कारवार (कर्नाटक) के लिए रवाना होगा और रास्ते में कई बंदरगाहों पर जाकर अपनी युद्ध क्षमता का प्रदर्शन करेगा.
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आईएनएस तमाल न केवल भारत-रूस रक्षा सहयोग की मिसाल है, बल्कि यह भारतीय नौसेना के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण को भी मजबूती से दर्शाता है. यह आधुनिकतम युद्धपोत आने वाले समय में हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति और सामरिक उपस्थिति को और प्रबल बनाएगा.