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मुंबई-विजयदुर्ग रो-पैक्स फेरी सेवा का उद्घाटन, समुद्री मार्ग से यात्रा अब तेज और आरामदायक
मुंबई के भाऊचा धक्का (फेरी व्हार्फ) से सुबह निकलकर यह विजयदुर्ग पहुंचेगी. शुरुआती चरण में मार्च में 16 दिनों का पायलट फेज चलेगा, जिसमें मुंबई और विजयदुर्ग से 8-8 प्रस्थान होंगे.
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मुंबई से विजयदुर्ग रो-पैक्स फेरी सेवा का उद्घाटन शनिवार को हुआ. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना की तारीफ करते हुए समुद्री मार्ग से यात्रा करने में काफी महत्वपूर्ण बताया.
मुंबई से विजयदुर्ग रो-पैक्स फेरी सेवा का उद्घाटन
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर खुशखबरी साझा करते हुए लिखा, "खुशखबरी! मुंबई से विजयदुर्ग रो-पैक्स फेरी सेवा का उद्घाटन. मुंबई और विजयदुर्ग (जिला सिंधुदुर्ग) के बीच रो-पैक्स फेरी सेवा कल, 1 मार्च 2026 से शुरू हो रही है."
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यात्रा समय और लाभ
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उन्होंने आगे बताया, "इससे कोंकण निवासियों को समुद्री मार्ग से यात्रा का एक तेज, आरामदायक और आनंददायक विकल्प मिलेगा. इस सेवा के माध्यम से मुंबई से विजयदुर्ग की यात्रा मात्र 6 से 7 घंटे में पूरी की जा सकेगी."
यह सेवा महाराष्ट्र सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कोंकण क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी. राज्य के मत्स्यव्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने भी इस परियोजना को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' बताया है. उन्होंने कहा कि यह योजना 2014-2019 के दौरान फडणवीस के बंदरगाह विभाग संभालने के समय से ही चली आ रही है.
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पर्यटन और कनेक्टिविटी में बढ़ावा
रो-पैक्स (रो-पैक्स) फेरी सेवा रोल-ऑन/रोल-ऑफ और पैसेंजर दोनों सुविधाओं वाली है. इसमें यात्री अपने वाहन (दो-पहिया, चार-पहिया) के साथ यात्रा कर सकते हैं. सेवा एम2एम प्रिंसेस जैसी हाई-स्पीड फेरी से संचालित होगी, जो दक्षिण एशिया की सबसे तेज पैसेंजर-कम-व्हीकल फेरी में से एक मानी जाती है.
मुंबई के भाऊचा धक्का (फेरी व्हार्फ) से सुबह निकलकर यह विजयदुर्ग पहुंचेगी. शुरुआती चरण में मार्च में 16 दिनों का पायलट फेज चलेगा, जिसमें मुंबई और विजयदुर्ग से 8-8 प्रस्थान होंगे.
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रोजाना यात्रा का समय सड़क मार्ग से 10-14 घंटे (ट्रैफिक सहित) लगता है, जबकि यह समुद्री मार्ग मात्र 6-7 घंटे में पूरा होगा. इससे समय की बड़ी बचत होगी और यात्रा आरामदायक बनेगी.
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विशेष रूप से शिमगा (होली) और गर्मी की छुट्टियों में कोंकण जाने वाले लाखों लोगों को फायदा होगा. पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि कोंकण के बीच, विजयदुर्ग किला, सिंधुदुर्ग जैसे आकर्षण आसानी से पहुंच सकेंगे.