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मुंबई को समुद्री उद्योग में मिलेगी बड़ी उपलब्धि, ₹55,719 करोड़ का निवेश शुरू
मुंबई में आयोजित India Maritime Week 2025 के दौरान राज्य सरकार ने करीब ₹55,719 करोड़ के निवेश समझौतों (MoU) पर साइन किए हैं. इस पहल का नाम Made in Mumbai Ships रखा गया है. इसका उद्देश्य है कि अब महाराष्ट्र में स्वदेशी तकनीक से जहाज बनाए जाएं, शिपिंग सेवाएं शुरू हों और ट्रेनिंग हब तैयार किए जाएं.
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India Maritime Week 2025: महाराष्ट्र सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि राज्य में समुद्री उद्योग को बढ़ाया जाए और मुंबई को एक वैश्विक समुद्री केंद्र बनाया जाए. इसी कड़ी में मुंबई में आयोजित India Maritime Week 2025 के दौरान राज्य सरकार ने करीब ₹55,719 करोड़ के निवेश समझौतों (MoU) पर साइन किए हैं. इस पहल का नाम Made in Mumbai Ships रखा गया है. इसका उद्देश्य है कि अब महाराष्ट्र में स्वदेशी तकनीक से जहाज बनाए जाएं, शिपिंग सेवाएं शुरू हों और ट्रेनिंग हब तैयार किए जाएं.
नए शिपबिल्डिंग यार्ड और ट्रेनिंग सेंटर
इस योजना के तहत मुंबई, अलीबाग और रत्नागिरी जैसे तटीय क्षेत्रों में नए शिपबिल्डिंग यार्ड, शिप डिजाइन सेंटर और मरीन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाए जाएंगे. इसमें IIT बॉम्बे भी शामिल होगा, जो अत्याधुनिक शिप डिजाइन और मारीटाइम ट्रेनिंग हब विकसित करेगा. यह पहल न केवल तकनीक को बढ़ावा देगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी तैयार करेगी और ब्लू इकॉनॉमी के मिशन को गति देगी.
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मुंबई बनेगा समुद्री कारोबार का हब
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इस योजना के जरिए मुंबई सिर्फ एक बंदरगाह शहर नहीं बल्कि समुद्री उद्योग का बड़ा केंद्र बनेगा. नए शिपबिल्डिंग यार्ड, ग्रीन शिपिंग प्रोजेक्ट और ट्रेनिंग सेंटर से युवाओं को स्किल डेवलपमेंट के मौके मिलेंगे. उद्योग मंत्री ने कहा कि इस निवेश से लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा.
अबू धाबी पोर्ट्स ग्रुप के साथ बड़ा करार
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सबसे बड़ा निवेश अबू धाबी पोर्ट्स ग्रुप के साथ हुआ है. इसके तहत लगभग $2 बिलियन (₹16,000 करोड़) का निवेश किया जाएगा. इस निवेश से महाराष्ट्र में नए पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, शिप रिपेयरिंग यार्ड्स और शिप-ब्रेकिंग फैसिलिटी तैयार होंगी. इसके अलावा ग्रीन शिपिंग यानी पर्यावरण-अनुकूल जहाज बनाने पर भी खास ध्यान दिया जाएगा.
ग्रीन शिपिंग इंडिया पहल
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इस योजना के अंतर्गत ऐसे जहाज बनाए जाएंगे जो कम प्रदूषण करें और ऊर्जा की बचत करें. इसमें बैटरी सिस्टम असेंबली यूनिट्स और हाइड्रोजन फ्यूल तकनीक भी शामिल होगी. इस पहल से महाराष्ट्र समुद्री उद्योग और पर्यावरण के लिहाज से भी आगे बढ़ेगा.