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Mukhtar Ansari की मौत जहर या हार्ट अटैक? मजिस्ट्रियल जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
मजिस्ट्रियल जांच में यह साफ हो गया कि मुख्तार अंसारी की मौत स्वाभाविक थी और किसी प्रकार की साजिश या जहर देने का कोई प्रमाण नहीं मिला। उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक था, और इस मामले में जहर देकर हत्या का दावा अब पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।
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Mukhtar Ansari: माफिया मुख्तार अंसारी की मौत ने उत्तर प्रदेश में भारी चर्चा और विवाद का विषय बना दिया था। जेल में बंद इस कुख्यात माफिया की मौत के बाद, परिवारवालों और समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें जहर देकर मारा गया है। इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब यह दावा किया गया कि मुख्तार की मौत स्वाभाविक नहीं थी। परिजनों के इन दावों के बाद सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया, जिसने अब इस मामले में बड़े खुलासे किए हैं।
मुख्तार अंसारी की मौत पर परिवार ने सीधा आरोप लगाया कि उनकी जान जहर देकर ली गई है। परिजनों के इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए बांदा जेल प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश दिए। मजिस्ट्रियल जांच में उनके बयान, जेल अधिकारियों के बयान, और 100 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए। इसके साथ ही, उनके खाने, मेडिकल हिस्ट्री और सीसीटीवी फुटेज की भी गहनता से समीक्षा की गई।
लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में बिसरा रिपोर्ट की जांच हुई, जिसमें यह साफ किया गया कि मुख्तार अंसारी के शरीर में किसी तरह के जहर के निशान नहीं मिले। इस रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकला कि जहर देने की बात सिर्फ एक अफवाह थी और इस आधार पर मौत को जानबूझकर किया गया हत्या का मामला नहीं माना जा सकता।
मजिस्ट्रियल जांच की अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि मुख्तार अंसारी की मौत जहर के कारण नहीं, बल्कि हार्ट अटैक से हुई थी। रिपोर्ट में मायोकॉर्डियल इंफॉर्क्शन (हार्ट अटैक) को उनकी मौत की वजह बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर में किसी प्रकार के विषाक्त पदार्थ का कोई प्रमाण नहीं मिला, और उनकी मौत स्वाभाविक थी।
आपको बता दें कि मुख्तार अंसारी की तबीयत 28 मार्च को बांदा जेल में अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तुरंत बांदा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर्स के मुताबिक, उनकी मृत्यु हार्ट अटैक के कारण हुई थी। बाद में लखनऊ के एसजीपीजीआई में पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया, जिसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई।
मजिस्ट्रियल जांच: क्यों हुई इतनी देरी?
जांच रिपोर्ट तैयार होने में लगभग पांच महीने का समय लग गया। डीएम बांदा दुर्गाशक्ति नागपाल द्वारा दिए गए आदेश पर मजिस्ट्रियल जांच की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें गहनता से हर पहलू की जांच की गई। यह जांच इसलिए भी लंबी चली क्योंकि मौत के दिन से 90 दिन पहले तक के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई और जेल के अधिकारियों, कर्मचारियों, और डॉक्टरों के बयान दर्ज किए गए। हर कदम पर यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं किसी प्रकार का जहर न दिया गया हो, लेकिन जांच के दौरान यह किसी भी तरह का जहर या संदिग्ध मामला साबित नहीं हो पाया।
मुख्तार अंसारी का आपराधिक इतिहास
मुख्तार अंसारी एक कुख्यात माफिया था, जिस पर हत्या, अपहरण, फिरौती और जमीन कब्जाने जैसे कई गंभीर आरोप थे। उसका नाम उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े माफियाओं में शुमार था, और उसके खिलाफ कई अदालतों में मामले दर्ज थे। अंसारी ने कई सालों तक अपने राजनीतिक प्रभाव का भी फायदा उठाया और विधायकी के चुनाव भी जीते।
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