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MUDA घोटाला मामला: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त जांच का आदेश, कांग्रेस और बीजेपी में तकरार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार के खिलाफ मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) में कथित घोटाले की जांच का आदेश दिया गया है। लोकायुक्त पुलिस ने सिद्धारमैया और उनके परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सिद्धारमैया का बचाव करते हुए भाजपा पर राजनीति से प्रेरित आरोप लगाने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की मांग की है

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार के खिलाफ मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) मामले में कथित घोटाले की जांच का आदेश देकर पीपुल्स कोर्ट ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस मामले में कोर्ट के निर्देश पर कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती, साले मल्लिकार्जुनसामी और एक अन्य आरोपी देवराज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

क्या है MUDA घोटाला मामला?

MUDA घोटाले में आरोप है कि कर्नाटक की पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) में भूमि आवंटन और विकास में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ की गईं। इस घोटाले में कथित तौर पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार के सदस्यों के शामिल होने का आरोप है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि MUDA के जरिए सरकारी जमीनों का गलत तरीके से आवंटन किया गया और इस प्रक्रिया में निजी हित साधे गए।

अदालत ने एफआईआर दर्ज करने के साथ ही मामले की जांच की निगरानी के लिए लोकायुक्त को 24 दिसंबर तक रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। यह मामला राज्य में कांग्रेस सरकार और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष को और बढ़ा सकता है।

सिद्धारमैया के खिलाफ एफआईआर, कांग्रेस का बचाव

जैसे ही लोकायुक्त पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, राज्य की राजनीति गरमा गई। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का जोरदार बचाव किया और भाजपा पर कांग्रेस को बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया। खरगे ने कहा, "कानून अपना काम करेगा। MUDA एक स्वायत्त निकाय है, जो अपनी जिम्मेदारियों के तहत काम कर रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कोई गलत काम नहीं किया है, इसलिए इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं है।"

बीजेपी की मांग: 'मुख्यमंत्री दें इस्तीफा'

दूसरी ओर, भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की मांग की है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि जब मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है, तो वे पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर गंभीर आरोप हैं, और ऐसे में उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। जांच पूरी होने तक उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।"

आपको बता दें कि MUDA घोटाले में लोकायुक्त की जांच को लेकर याचिकाकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि लोकायुक्त पुलिस द्वारा अदालत के आदेश का पालन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। कृष्णा का दावा है कि पुलिस अधीक्षक टी.जे. उदेश से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है और अभी तक जांच में किसी प्रकार की ठोस प्रगति नहीं हुई है। यह सवाल उठता है कि क्या लोकायुक्त इस मामले में निष्पक्ष और प्रभावी जांच कर पाएगा?

क्या है CRPC की धारा 156 (3)?

इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (CrPC) की धारा 156 (3) के तहत दिया है। यह धारा कोर्ट को यह शक्ति देती है कि वह पुलिस को किसी मामले की जांच का आदेश दे सके और एफआईआर दर्ज करने को कह सके। इस प्रकार के मामलों में अक्सर कोर्ट का दखल तब होता है जब शिकायतकर्ता पुलिस की निष्क्रियता की शिकायत करता है।
सिद्धारमैया और उनके परिवार की भूमिका पर सवाल
इस घोटाले में सिद्धारमैया और उनके परिवार के सदस्य मुख्य आरोपियों के तौर पर नामित हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके कार्यकाल के दौरान मैसूर में भूमि आवंटन में घोटाले किए गए, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। हालांकि, सिद्धारमैया और उनके परिवार ने इन आरोपों का खंडन किया है और इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार ने इस मामले में अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए जांच में सहयोग करने की बात कही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि वे कानून का पालन करेंगे और यदि जांच में कोई भी तथ्य सामने आता है, तो वे उसका सामना करने के लिए तैयार हैं।

MUDA घोटाला मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में एक बड़े मोड़ का संकेत भी है। कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी इस तकरार से जनता का ध्यान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्रित हो गया है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या सिद्धारमैया इस संकट से सफलतापूर्वक उभर पाएंगे या फिर भाजपा इस मामले को चुनावी मुद्दा बनाकर कांग्रेस को घेरने में सफल होगी।


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