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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मोहन भागवत का कार्यकर्ताओं को पांच मंत्र और सामाजिक समरसता पर जोर
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि जाति कोई शाश्वत व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्तमान समय में अव्यवस्था का रूप ले चुकी है. पहले यह कार्य-आधारित थी, अब हर व्यक्ति हर कार्य कर सकता है. जाति की दीवारें मिट रही हैं, तरुण वर्ग का व्यवहार बदल रहा है.
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उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मेरठ में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संघ से जुड़े रहने और अन्य लोगों को जोड़ने के लिए पांच मंत्र दिए.
मेरठ में पांच मंत्र
पांचवें मंत्र में संघ प्रमुख ने कहा कि आप कोई ना कोई अच्छा काम करें, प्रमाणिकता के साथ करें, निस्वार्थ करें. उन्होंने कहा कि उसमें टिकट मांगना नहीं, ना कोई सीट मांगना. नेकी करो कुएं में डालो. उन्होंने कहा कि इस प्रकार से आप काम करते हुए देश के लिए उत्कृष्ट करो, एक्सीलेंस करो. यह जो आप कर रहे हो, आपको संघ का नाम भी नहीं पता तब भी हम आपको संघ का सदस्य बनाएंगे.
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लखनऊ में सामाजिक समरसता और जाति उन्मूलन पर जोर
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इससे पहले 18 फरवरी बुधवार को लखनऊ में आरएसएस प्रमुख ने सामाजिक समरसता, जाति उन्मूलन और सांस्कृतिक एकता को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार बताते हुए कहा था कि हम सब भारत माता के पुत्र हैं, सहोदर हैं, और हम हिंदू हैं. यही भाव अस्पृश्यता और जातीय विभाजन को समाप्त करेगा. उन्होंने स्पष्ट किया था कि आधुनिकता का विरोध नहीं, बल्कि अंधानुकरण का विरोध है. समाज यदि जागृत और समरस रहेगा तो राजनीतिक विकृतियां स्वतः समाप्त होंगी.
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि जाति कोई शाश्वत व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्तमान समय में अव्यवस्था का रूप ले चुकी है. पहले यह कार्य-आधारित थी, अब हर व्यक्ति हर कार्य कर सकता है. जाति की दीवारें मिट रही हैं, तरुण वर्ग का व्यवहार बदल रहा है. हमें समाज को समरस बनाए रखने की बड़ी लकीर खींचनी है- हम सब हिंदू हैं.
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यूजीसी रेगुलेशन को लेकर लखनऊ में उन्होंने कहा था कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए पूर्वानुमान आधारित प्रतिक्रिया उचित नहीं. समाज में विभाजन न हो, यह ध्यान रखना आवश्यक है. भागवत ने कहा कि आधुनिकीकरण एक सतत प्रक्रिया है, उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए, परंतु पश्चिमीकरण के अंधानुकरण से बचना जरूरी है. जो नया है, उसे परख कर स्वीकार करें. शाश्वत मूल्यों के अनुरूप परिवर्तन ही उचित है.
आगामी कार्यक्रम और शताब्दी वर्ष
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बता दें कि आरएसएस प्रमुख 22 और 23 फरवरी को दो दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर रहेंगे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे शताब्दी वर्ष के तहत उत्तराखंड में व्यापक स्तर पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है. संघ ने प्रदेशभर में 1,000 हिंदू सम्मेलन आयोजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.