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मुसलमानों की बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या पर मोदी का तगड़ा ऐलान?

रिपोर्ट में जो बढती जनसंख्या एक समुदाय की दिखाई गई है वो भविष्य में खतरा पैदा कर सकती है | क्योंकि कहा जाता है जब मुसलमानों की जनस्ख्यां 22 % थी, तब अलग देश बन गया था, जिसका नाम पाकिस्तान है | और आज जो ये रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक देश में मुसलमानों की जनसंख्या 14 % के उपर पहुंच चुकी है लेकिन अब जनस्ंख्या का विस्फोट तो जबरदस्त तरीके से हो रहा है | लेकिन क्यों हो रहा है?

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बीच लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की एक रिपोर्ट ने देश में हड़कंप मचा दिया | प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट Share Of Religious Minorities के नाम से तैयार की गई | इस रिपोर्ट में बताया गया कि बीते 65 सालों में बहुसंख्यक हिंदुओं की हिस्सेदारी 7.82% कम हुई है, जबकि मुसलमान नागरिकों की हिस्सेदारी इन्हीं 65 सालों में 43.15% बढ़ी है | वहीं, ईसाई नागरिक 5.38 फीसदी बढ़े हैं और सिख नागरिक 6.58% तक बढ़े हैं | ये रिपोर्ट देखने में आम लग सकती है लेकिन इसके पीछे के काऱण भयानक हो सकते है और इस रिपोर्ट में जो बढती जनसंख्या एक समुदाय की दिखाई गई है वो भविष्य में खतरा पैदा कर सकती है | क्योंकि कहा जाता है जब मुसलमानों की जनस्ख्यां 22 % थी, तब अलग देश बन गया था, जिसका नाम पाकिस्तान है | और आज जो ये रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक देश में मुसलमानों की जनसंख्या 14 % के उपर पहुंच चुकी है लेकिन अब जनस्ंख्या का विस्फोट तो जबरदस्त तरीके से हो रहा है | लेकिन क्यों हो रहा है?

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आखिर क्या कारण है? और सोचने वाली बात ये भी है कि क्या मुसलमानों की ये जनसंख्या नेचुरल तरीके से बढ़ी है या फिर धर्मांतरण इसका कारण है, या फिर घुसपैठ भी इसमें शामिल है? जाहिर सी बात है सभी पहलू इस बढती जनसंख्या में शामिल है |

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समस्या बड़ी है कदम भी बड़ा ही उठाना पडे़गा, नहीं तो जिस तरीके से देश की आबादी बढ़ रही है, उस तरीके से देश में, गरीबी और बेरोजगारी भी बेतहाशा बढेगी | हालांकि इस जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए 2021 में यूपी की योगी सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण नीति बनाई थी और 2022 तक इसे लागू करने की बात भी कही थी | लेकिन अब तक लागू नहीं हो पाई है | इस नीति में एक बच्चे वालों को प्रोत्साहन देने की बात कही गई थी, और जिसके दो से ज्यादा बच्चे होंगे उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा | लेकिन ये नीति आजतक लागू नहीं हो सकी है | जबकि उत्तरप्रदेश में राज्यों के हिसाब से सबसे ज्यादा जनसंख्या है | बावजूद इसके भी केंद्र सरकार की नींद नहीं टूटी | राजनेता इस बदलती डेमोग्राफी पर चिंता तो जाहिर कर रहे है लेकिन कोई ठोस कदम अब तक उठाया गया हो, ऐसा नजर नहीं आता |लेकिन केंद्र सरकार को जनसंख्या नियंत्रण का कानून लाना होगा क्योंकि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो फिर हालात बेहद खराब होने वाले है | वैसे भी विपक्षी नेता अब मुसलमानों को आरक्षण देने पर उतारु हो गए है |


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जब खुद मोदी इस बात को मानते है तो फिर जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए मोदी कब ऐलान करने वाले है? क्या तीसरी बार मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद जनसंख्या को काबू करने के लिए उपयुक्त कदम उठाएंगे? क्योंकि जनसंख्या विस्फोट लगातार हो रहा है, देश के 200 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके है | आधा दर्जन राज्यों के हाल खराब है | देश का सीमावर्ती इलाका बिल्कुल बदल चुका है और जब सीमा पर कब्जा होगा तो समस्या दोहरी हो जाती है | अब देखना होगा कि कब तक केंद्र सरकार इस विस्फोट को रोकने के लिए कदम उठाती है?

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