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Yogi के लिए खुद मैदान में उतरे मोदी, निकाला आखिरी ब्रह्मास्त्र

मोदी सरकार 3.0 का पहला बजट पेश किया गया। इस बजट में यूपी को कोई खास लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। भले ही केंद्रीय घोषणाओं का लाभ यूपी को मिलेगा, लेकिन लोकसभा चुनाव रिजल्ट का असर आम बजट में दिखा है। निर्मला सीतारमण ने अपने बजट में उत्तर प्रदेश का कोई खास जिक्र नहीं किया

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जब लोकसभा चुनाव के नजीते भी नही आए थे तब से कहा जा रहा है कि योगी से यूपी की सत्ता छीन ली जाएगी। और हाल-फिलहाल में दिल्ली और लखनऊ के बीच जो टकराव दिखा। उसने हर किसी से चेहरे से नकाब उतार दिया। शाह केशव प्रसाद के साथ मिलकर योगी को खत्म कर देना चाहते है, ऐसा राजनीतिक पंडितो का कहना है, दुसरी तरफ केशव भी यूपी में योगी के खिलाफ नेताओं की फौज तैयार करने में जूटे है लेकिन कहा गया कि मोदी ने सारा मामला सुलटा लिया है। अब सब कुछ ठीक है।


लेकिन जैसे ही देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैसाखी वाली सरकार का पहला बजट पेश किया तो एक बार फिर से दिल्ली के धागे खुल गए। और इन धागे को उधेडने में अखिलेश यादव कोई कोर कसर छोड़ नही रहे है। बजट पेश होते ही पता चला कि मोदी की कुर्सी में बिहार और आंध्रप्रदेश नाम की जो दो टांगे लगी है। उन्हें तो मजबूत कर दिया गया लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे के हाथ काट दिए गए। मतलब यूपी ने सीटें कम क्या दी। दिल्ली ने मुँह फेर लिया। ऐसे आरोप दिल्ली पर लग रहे है।आरोप तो दिल्ली पर ये भी लग रहे है कि अगर यूपी को प्रयाप्त बजट नहीं मिलेगा तो लोग योगी पर सवाल उठाएंगे। क्योंकि पैसा नहीं मिलेगा तो विकास नहीं होगा, और विकास नहीं होगा तो योगी की छवि को उस वक्त आधात पहुंचाया जा सकता है। 

तो क्या वाकैइ में दिल्ली ने ये अपना आखिरी ब्रह्मास्त्र चल दिया है। और अगर ये ठिकाने पर लगा तो शाह का रास्ता साफ हो जाएगा। तो उसे समझने के लिए पहले देख लिजिए इस बजट में यूपी को क्या मिला है। लेकिन उससे पहले जान लीजिए की बिहार और आंध्रप्रदेश को मोदी सरकार ने 74 हजार करोड़ रुपए दे दिए। मतलब पैसे से मुंह बंद कर दिया गया है। वहीं यूपी को कोई नई योजना नहीं दी गई है। सबसे जरुरी शिक्षा, स्वास्थय, पर्यटन, सड़क के क्षेत्रों में भी कोई नई योजना यूपी को नहीं दी गई है। बल्कि दिल्ली मेरठ आरटीएस का प्रोजेक्ट बजट घटा दिया है। बस अब यूपी को केंद्रीय योजनाओं से कुछ उम्मीद है। जिनमें मुख्य तौर पर प्रधानमंत्री आवास योजना है जिसके तहत तीन करोड़ घर बनने है और यूपी को इनमें से 35 लाख घर दिए जाएंगे। राष्ट्रीय औधोगिक कल्याण कार्यक्रम के तहत देशभर में 12 औधोगिक पार्क बनने है, जिनमें से एक दो यूपी को मिल सकते है।

तो ऐसे में सवाल उठने लगे है कि क्या यूपी को ये सजा दी गई है। या फिर योगी को हटाने के लिए ब्रह्मामस्त्र चलाया गया है। जो भी हो अगर अब ऐसे में विकास नहीं होगा तो जनता के बीच में गलत मैसेज जाएगा। और जैसा की मौजूदा वक्त में विपक्ष बजट के मुद्दे को भूनाने कि कोशिश कर कर रहा है। बाद में उसके पास बजट को लेकर मजबूत पक्ष होगा और शायद उसका जवाब मोदी सरकार दे नहीं पाएगी। वैसे एक बात और भी हो सकती है कि यूपी में 2027 से पहले कोई चुनाव नहीं है। और उसी लिहाज से फिलहाल यूपी को कुछ नहीं दिया गया हो। और चुनाव के नजदीक खजाने को यूपी के लिए खोला जाए। तो संभावना बहुत सारी है। 

लेकिन अगर मोदी सरकार योगी के लिए इस बजट को हथियार बनाने की कोशिश कर रही है तो फिर उसके लिए 2027 में इसकी भारी किमत चुकानी पड़ सकती है। वैसे भी लोकसभा के नतीजों के बाद यूपी का चुनाव दो धारी तलवार पर टिका है। अगर जरा सी भी गलती हुई तो भारी नुकसान हो सकता है। 

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