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मोदी सरकार ने रातों-रात भेज दिए 2000 CAPF जवान! मणिपुर हिंसा पर हुआ बड़ा एक्शन
मणिपुर के जिरीबाम इलाके में सोमवार को उग्रवादियों और सीआरपीएफ जवानों के बीच भी मुठभेड़ को देखते हुए। केंद्र की मोदी सरकार ने रातों-रात 2000 जवानों को फौरन तैनात किया है। बता दें कि सोमवार को संदिग्ध उग्रवादियों ने CRPF कैंप पर हमला किया था। इस हमले में CRPF जवानों द्वारा जवाबी कार्रवाई में कुल 11 उग्रवादी मारे गए थे।
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केंद्र की मोदी सरकार ने मणिपुर की ताजा घटना को देखते हुए रातों-रात बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 20 कंपनियों के 2000 से ज्यादा जवानों को फौरन भेजा है। ताज़ा हिंसा की घटनाओं को देखते हुए और कानून व्यवस्था संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिए सरकार ने यह कदम उठाया। इनमें केंद्रीय सशस्त्र बलों (CAPF ) और कई अन्य कंपनियों के जवान शामिल हैं।
केंदीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर में उग्रवादियों और जवानों के बीच हुई मुठभेड़ को देखते हुए। मंगलवार को हवाई मार्ग से करीब 2000 जवानों को भेजा है। इन जवानों को फौरन ड्यूटी पर तैनात होने का आदेश दिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य की कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए (CAPF) की कुल 218, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 115, आरएएफ की 8, बीएसएफ की 84, एसएसबी की 6 और आईटीबीपी की 5 कंपनियां 30 नवंबर तक मणिपुर में तैनात रहेंगी। केंद्र सरकार ने अपने आदेश में मणिपुर सरकार और सीएपीएफ से बातचीत कर इन कंपनियों को विस्तृत रूप से तैनात करने का प्लान बनाया है।
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बीते सोमवार को मणिपुर के जिरीबाम में उग्रवादियों ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला किया था। जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में CRPF जवानों के साथ हुई मुठभेड़ में कुल 11 संदिग्ध उग्रवादी मारे गए थे। बता दें कि वर्दीधारी और अत्याधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों ने जिरीबाम जिले के जाकुराधोर स्थित बोराबेकरा थाने और नजदीकी सीआरपीएफ कैंप पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। मारे गए उग्रवादियों से कई तरह के अत्याधुनिक हथियारों की एक बड़ी खेप भी बरामद की गई। जिन इलाकों में गोलीबारी हुई है। वहां से 3 बच्चों समेत मेइती समुदाय के 6 लोग अब भी लापता हैं।
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बता दें कि मणिपुर में बीते एक साल से मैतै समुदाय और कुकी जनजाति के बीच जातीय हिंसा चल रही है। जहां मैतै समुदाय भारतीय संविधान के तहत अनुसूचित जनजाति के दर्जे की मांग कर रहा है। तो कुकी समुदाय इस बात का विरोध प्रदर्शन कर रहा है कि मैतै समुदाय को यह दर्जा मिल गया। तो स्वदेशी भूमि अधिकारों का हनन होगा। दूसरी तरफ म्यांमार से शरणार्थियों के आने से मैतै समुदाय को असुरक्षा महसूस हो रही हैं। यही वजह है कि 3 मई 2023 से दोनों समुदायों के बीच यह संघर्ष चल रहा है। इस जातीय हिंसा में राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए 198 सुरक्षा कंपनिया पहले से ही तैनात हैं।अब तक 221 लोग मारे जा चुके हैं। वहीं 60,000 लोग विस्थापित हो चुके है।