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Waqf Bill में मोदी सरकार ने आधी रात को किये तीन ऐसे बदलाव जिसे जानकर दंग रह जाएंगे !

विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद Modi सरकार ने आधी रात को लोकसभा से बिल पास कराकर ही दम लिया तो वहीं दूसरी तरफ ऐन मौके पर बिल में तीन ऐसे बदलाव कर दिये जिसे सुनकर वक्फ बोर्ड वालों की जमीन हिल जाएगी !

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दो अप्रैल की आधी रात को जब आप सो रहे थे। उस वक्त देश की संसद में वक्फ संशोधन बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त बहस छिड़ी हुई थी। क्योंकि एक तरफ जहां मोदी सरकार वक्फ बिल पास कराने पर अड़ा हुआ था।तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने भी एकजुट होकर मोदी सरकार को बिल पास कराने से रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। लेकिन मोदी भी ठहरे मोदी। वो भला हार कहां मानने वाले थे। उनके सिपाही अमित शाह ने सदन में मोर्चा संभाला और आधी रात को लोकसभा से बिल पास कराकर ही दम लिया। तो वहीं दूसरी तरफ ऐन मौके पर बिल में तीन ऐसे बदलाव कर दिये जिसे सुनकर वक्फ बोर्ड वालों की जमीन हिल जाएगी।

दरअसल लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पास होने से महज एक दिन पहले ही मोदी सरकार ने इसमें तीन ऐसे संशोधन कर दिये। जिसका असर भविष्य में सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है। क्योंकि इस संशोधन के बाद वक्फ बोर्ड संरक्षित इमारतों पर दावा ठोकने से पहले सौ बार सोचेगा।


"बिल में हुए इस बड़े बदलाव के तहत संरक्षित स्मारकों को वक्फ की संपत्ति नहीं माना जाएगा और जिन संरक्षित स्मारकों को वक्फ संपत्ति का दर्जा था वो भी खत्म हो जाएगा, इतना ही नहीं किसी संरक्षित स्मारक को भविष्य में भी वक्फ में शामिल नहीं किया जाएगा, इसके लिए बिल में क्लॉज में 4 बदलाव किये गये हैं"

कई राज्यों में 200 स्मारक ऐसे पाए गये जिनका संरक्षण ASI करती है। तो वहीं उन्हें वक्फ की संपत्ति भी माना गया है। जिनमें राजधानी दिल्ली का पुराना किला, कुतुब मीनार, सफरदरजंग का मकबरा और हुमायूं का मकबरा जैसी ऐतिहासिक इमारत शामिल हैं। लेकिन अब ऐसी तमाम ऐतिहासिक इमारतों से वक्फ का दर्जा खत्म हो जाएगा और ये स्मारक अब सरकार के अधीन होंगे।

"वक्फ बिल में एक और अहम बदलाव के तहत अब आदिवासी इलाके की जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता है, इसके लिए बिल प्रावधान दिया गया है कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के मुताबिक जिस भूमि को आदिवासी क्षेत्र घोषित किया गया है वहां कि किसी संपत्ति को वक्फ में शामिल नहीं किया जाएगा, ये प्रावधान इसलिये दिया गया है जिससे आदिवासी संस्कृति का संरक्षण किया जा सके और उनके हितों की रक्षा की जा सके"

इन दो सबसे अहम बदलाव के साथ ही वक्फ बिल में एक और ऐसा प्रावधान दिया गया है। जिसके तहत वक्फ बोर्ड के फैसले की समीक्षा खुद जिले के डीएम करेंगे।जिसके बारे में बताया गया है कि। "अब वक्फ बोर्ड की ओर से पारित किसी भी प्रस्ताव के लिए 45 दिन की टाइम लिमिट होगी जिसका मतलब साफ है कि वक्फ के फैसले तुरंत लागू नहीं होंगे इसके लिए 45 दिनों का इंतजार करना होगा और इन 45 दिन की टाइम लिमिट के अंदर जिले के डीएम की ओर से समीक्षा की जाएगी "

सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार ने मंगलवार की रात को ही वक्फ बिल में ये तीन बड़े बदलाव किये और अगले ही दिन यानि बुधवार की सुबह सभी सांसदों को बिल की कॉपी दी गई। तो वहीं गुरुवार को लोकसभा में बिल पेश करने के साथ ही आधी रात को पास भी करवा लिया गया। 
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