Advertisement

Loading Ad...

साउथ ब्लॉक में मोदी कैबिनेट की आखिरी बैठक, रेल, मेट्रो, सड़क...लग गई 1.60 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स की झड़ी!

सेवा तीर्थ में पीएम मोदी के ऑफिस के शिफ्ट होने से पहले साउथ ब्लॉक में मोदी कैबिनेट की आखिरी बैठक हुई. इस दौरान रेल, मेट्रो, शहर, आवास, स्टार्टअप फंडिंग से जुड़े करीब 1.60 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स की मंजूरी दी गई, जानें पूरी स्टोरी.

Modi Cabinet / X
Loading Ad...

केंद्रीय कैबिनेट ने साउथ ब्लॉक में हुई अपनी आखिरी बैठक में सड़क और रेलवे से जुड़े 1,60,504 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. यह बयान शनिवार को रेल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से दिया गया. अब से कैबिनेट की बैठक सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स में होगी, जो कि भारत सरकार के प्रमुख कार्यालयों का नया आधिकारिक पता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 'सेवा तीर्थ' नामक नए परिसर का अनावरण किया, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं. साउथ ब्लॉक में हुए अपने अंतिम सत्र में कैबिनेट ने रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, मेट्रो विस्तार, शहरी सुधार और स्टार्टअप फंडिंग से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय पारित किए.

साउथ ब्लॉक में मोदी कैबिनेट की आखिरी बैठक!

Loading Ad...

शहरी विकास के दृष्टिकोण में एक क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए, सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता से अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) के शुरुआत को मंजूरी दी है. केंद्रीय सहायता परियोजना लागत का 25 प्रतिशत कवर करेगी, बशर्ते परियोजना लागत का न्यूनतम 50 प्रतिशत बाजार से जुटाया जाए.

Loading Ad...

कैबिनेट ने दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों को कवर करने वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनकी कुल लागत 18,509 करोड़ रुपए है. इससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 389 किलोमीटर की वृद्धि होगी.

भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपए के कुल फंड के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की स्थापना को मंजूरी दी है. इस नए फंड का उद्देश्य दीर्घकालिक घरेलू पूंजी जुटाना और देश भर के स्टार्टअप्स को मजबूत वित्तीय सहायता प्रदान करना है.

Loading Ad...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट आर्थिक मामलों की समिति ने महाराष्ट्र में एनएच-160ए के घोटी-त्रिंबक (मोखाड़ा)-जॉहर-मनोर-पालघर खंड के पुनर्निर्माण और उन्नयन को मंजूरी दी, जिसकी कुल लंबाई 154.635 किलोमीटर है और इस पर 3,320.38 करोड़ रुपए का व्यय होगा.

कैबिनेट ने तेलंगाना में हैदराबाद-पणजी आर्थिक गलियारे पर गुडेबेलूर से महबूबनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-167 के चौड़ीकरण को भी 3,175.08 करोड़ रुपए के व्यय के साथ चार लेन तक बढ़ाने को मंजूरी दी. इससे माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, रसद लागत कम होगी और क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी.

गुजरात में सड़क संपर्क सुधारने के उद्देश्य से, सरकार ने शनिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-56 के दो खंडों को 4,583.64 करोड़ रुपँ के व्यय के साथ चार लेन तक बढ़ाने को मंजूरी दी है.

Loading Ad...

अतिरिक्त रेलवे ट्रैक बिछाने की तीन परियोजनाओं को भी मंजूरी

 केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों में अतिरिक्त पटरियां बिछाने की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले के बारे में विस्तृत जानकारी शेयर की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न जिलों को कवर करने वाली 3 मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं के लिए कैबिनेट की मंजूरी से रेल बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, लॉजिस्टिक लागत कम होगी और हमारे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

Loading Ad...

रेलवे की तीन परियोजनाओं की मंजूरी!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी हुई. इसमें रेल मंत्रालय की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत लगभग 18,509 करोड़ रुपए है. इन परियोजनाओं में कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी लाइन, दिल्ली-अंबाला तीसरी और चौथी लाइन, बैल्लारी-होसपेट तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं.

पट्टियों की क्षमता बढ़ाए जाने से भारतीय रेलवे की संचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बेहतर होगी. अतिरिक्त पट्टियां बिछाने के प्रस्ताव से भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी. ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नए भारत की कल्पना के अनुसार हैं, जो क्षेत्र के लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाएंगी. इसके लिए इलाके में बड़े पैमाने पर विकास होगा, जिससे उनके रोजगार/स्व-रोजगार के मौके बढ़ेंगे.

Loading Ad...

पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत परियोजनाओं को मंजूरी!

ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और साझीदार परामर्श के जरिए मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. ये परियोजनाएं लोगों, सामान और सेवाओं को लाने-ले जाने के लिए आसान संपर्क देंगी. दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों के 12 जिलों को कवर करने वाली तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 389 किलोमीटर बढ़ जाएगा.

क्या है नई परियोजनाओं का उद्देश्य!

Loading Ad...

प्रस्तावित अतिरिक्त पट्टियां बिछाने की परियोजना से लगभग 3,902 गांवों तक संपर्क बढ़ेगा, जिनकी आबादी लगभग 97 लाख है. प्रस्तावित क्षमता बढ़ाने से देश भर के अनेक प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा, जिनमें भावली डैम, श्री घाटनदेवी, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, श्री माता वैष्णो देवी कटरा/श्रीनगर, हम्पी (यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट), बल्लारी किला, दारोजी स्लॉथ बेयर सैंक्चुरी, तुंगभद्रा डैम, केंचनगुड्डा और विजया विट्ठल मंदिर शामिल हैं.

प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, स्टील, लोह अयस्क, सीमेंट, लाइमस्टोन/बॉक्साइट, कंटेनर, अनाज, चीनी, उर्वरक, पीओएल आदि के परिवहन के लिए जरूरी मार्ग हैं. क्षमता बढ़ाने के काम से 96 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) के अतिरिक्त माल की ढुलाई होगी. पर्यावरण अनुकूल और कम ऊर्जा का उपयोग करते हुए परिवहन का तरीका अपनाकर रेलवे को जलवायु उद्देश्यों को पूरा करने, देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, तेल आयात (22 करोड़ लीटर) घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी, जो 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है.

हैदराबाद-पणजी राष्ट्रीय राजमार्ग को 4-लेन करने की परियोजना को मंजूरी

Loading Ad...

इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने तेलंगाना राज्य में हैदराबाद–पणजी आर्थिक गलियारे पर गुडबेल्लूर से महबूबनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-167 के खंड को 4-लेन मानक में विस्तारित करने को मंजूरी दे दी है.

इस परियोजना की कुल लंबाई 80.01 किलोमीटर है तथा इसकी कुल पूंजीगत लागत 3,175.08 करोड़ रुपए है. यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग (अन्य) योजना के अंतर्गत हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएएम) पर क्रियान्वित की जाएगी.

वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग-167 के मौजूदा मार्ग पर गुडबेल्लूर से महबूबनगर के बीच अत्यंत खराब ज्यामितीय संरचना तथा नगर क्षेत्रों में बढ़ते यातायात दबाव के कारण यात्रा समय में उल्लेखनीय विलंब हो रहा है.

Loading Ad...

यह मार्ग गुडबेल्लूर, मगनूर, मकथल, मरिकल, देवरकद्रा, जकलेर, येलिगंडला तथा बंदरपल्ली जैसे अत्यधिक शहरीकृत नगरों/ग्रामों से होकर गुजरता है. इन क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए इस परियोजना को 4-लेन मानक के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है.

यह परियोजना तेलंगाना राज्य के नारायणपेट और महबूबनगर जिलों को महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करेगी. इससे माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी तथा क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी.

यह परियोजना दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-150 और एनएच-167एन) को एकीकृत करती है, जिससे तेलंगाना राज्य के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक क्षेत्रों के साथ निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा. इसके अतिरिक्त, उन्नत कॉरिडोर तीन पीएम गतिशक्ति आर्थिक नोड्स, नौ सामाजिक नोड्स और सात लॉजिस्टिक नोड्स को संपर्क प्रदान करते हुए मल्टी-मॉडल एकीकरण एवं सुगम संपर्क को सुदृढ़ करेगा, जिससे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही और अधिक तीव्र होगी.

Loading Ad...

परियोजना पूर्ण होने पर राष्ट्रीय राजमार्ग-167 का उन्नयन कार्य क्षेत्रीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. प्रमुख धार्मिक एवं आर्थिक केंद्रों के मध्य संपर्क को सुदृढ़ करेगा और व्यापार और औद्योगिक विकास के लिए नए अवसर सृजित करेगा.

प्रस्तावित 80.01 किलोमीटर लंबी एक्सेस-कंट्रोल्ड 4-लेन परियोजना से लगभग 14.4 लाख व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार तथा 17.9 लाख व्यक्ति-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा. साथ ही प्रस्तावित कॉरिडोर के आसपास आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के परिणामस्वरूप अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 लाख करोड़ रुपए के शहरी चुनौती कोष को दी मंजूरी

Loading Ad...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शहरी चुनौती कोष (यूसीएफ) को भी अपना अनुमोदन प्रदान किया. इसके तहत कुल एक लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता (सीए) दी जाएगी. परियोजना लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा, बशर्ते परियोजना लागत का न्यूनतम 50 प्रतिशत हिस्सा बाजार से जुटाया जाए.

इससे अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा, जो अनुदान आधारित वित्तपोषण से हटकर बाजार से जुड़े, सुधार-उन्मुख और परिणाम-उन्मुख अवसंरचना निर्माण की ओर भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है.

क्या है शहरी चुनौती कोष उच्च?

Loading Ad...

शहरी चुनौती कोष उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बाजार वित्त, निजी भागीदारी और नागरिक-केंद्रित सुधारों का लाभ उठाएगा. इस कोष का उद्देश्य लचीले, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल शहरों का निर्माण करना है ताकि ये शहर देश के आर्थिक विकास के अगले चरण के प्रमुख चालक बन सकें. यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 तक परिचालन में रहेगा, जिसकी कार्यान्वयन अवधि वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाई जा सकती है.

PPP मॉडल पर आधारित परियोजना!

परियोजना के लिए वित्त व्यवस्था का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा बाजार स्रोतों से जुटाया जाना चाहिए, जिसमें नगरपालिका बांड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) शामिल हैं. शेष हिस्सा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों या अन्य स्रोतों द्वारा प्रदान किया जा सकता है. परियोजनाओं का चयन एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी चुनौती प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जिससे उच्च प्रभाव वाले और सुधार-उन्मुख प्रस्तावों को समर्थन सुनिश्चित होगा. शहरी शासन, बाजार और वित्तीय प्रणालियों, परिचालन दक्षता और शहरी नियोजन में सुधारों पर विशेष जोर दिया जाएगा.

Loading Ad...

व्यवस्थित जोखिम-साझाकरण रूपरेखा और सेवा वितरण मानकों के मानकीकरण के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा. 5,000 करोड़ रुपए का एक समर्पित कोष, विशेष रूप से पहली बार बाजार वित्त तक पहुंच प्राप्त करने वाले शहरों सहित, टियर-II और टियर-III शहरों सहित 4223 शहरों की ऋण योग्यता को बढ़ाएगा.

पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के सभी शहरों/शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) और अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के छोटे यूएलबी (<1,00,000 जनसंख्या) के लिए पहली बार बाजार वित्त तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए, 5,000 करोड़ रुपए की ऋण चुकौती गारंटी योजना को अनुमोदन प्रदान किया गया है. यह योजना पहली बार लिए गए ऋणों के लिए 7 करोड़ रुपए या ऋण राशि का 70 प्रतिशत (जो भी कम हो) तक की केंद्रीय गारंटी प्रदान करेगी.

सामने आई केंद्र की परियोजना की रूपरेखा!

Loading Ad...

पहले ऋण के सफल पुनर्भुगतान पर 7 करोड़ रुपए या ऋण राशि का 50 प्रतिशत (जो भी कम हो) की केंद्रीय गारंटी प्रदान की जाएगी. इससे छोटे शहरों में पहली बार न्यूनतम 20 करोड़ रुपए की परियोजनाओं और बाद की परियोजनाओं के लिए 28 करोड़ रुपए तक की परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से समर्थन मिलेगा.

इस कोष के अंतर्गत परियोजनाओं का चयन परिवर्तनकारी प्रभाव, स्थिरता और सुधार-उन्मुखीकरण सहित चुनौतियों पर आधारित रूपरेखा के माध्यम से किया जाएगा. कोष का आवंटन सुधारों, लक्ष्यों और स्पष्ट रूप से परिभाषित परिणामों से जुड़ा होगा. सुधारों की निरंतरता आगे कोष जारी करने के लिए एक पूर्व शर्त होगी. आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के एकल डिजिटल पोर्टल के माध्यम से परियोजनाओं और सुधारों की कागजरहित निगरानी को सुगम बनाया जाएगा.

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना!

Loading Ad...

विकास केंद्रों के रूप में शहर, शहरी क्षेत्रों की पहचान, महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र, एकीकृत स्थानिक आर्थिक और पारगमन योजना जिसमें हरित और अर्ध-हरित क्षेत्र का विकास, पारगमन और आर्थिक गलियारों के साथ विकास, शहरी गतिशीलता, आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाएं शामिल हैं.

शहरों का रचनात्मक पुनर्विकास जिसमें केंद्रीय व्यावसायिक जिलों और विरासत केंद्रों का नवीनीकरण, ब्राउनफील्ड पुनरुद्धार, पारगमन-उन्मुख विकास और विरासत अवसंरचना का जीर्णोद्धार, जलवायु के अनुकूल, आपदा शमन और पूर्वोत्तर व पर्वतीय राज्यों में मौजूदा शहरों को भीड़भाड़ से मुक्त करने के लिए शहरों से दूर शहरों के विकास के उपाय शामिल हैं; और जल एवं स्वच्छता जिसमें जल आपूर्ति, सीवरेज और वर्षा जल प्रणालियों का उन्नयन, ग्रामीण-शहरी अवसंरचना, जल ग्रिड और एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शामिल है जिसमें स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हुए पुराने अपशिष्टों का उपचार भी शामिल है.

शहरी चुनौती कोष के तहत दी जाने वाली धनराशि एक व्यापक सुधार एजेंडा पर आधारित है, जिसमें शासन और डिजिटल सुधार, साख बढ़ाने के लिए बाजार और वित्तीय सुधार, बेहतर सेवा वितरण और उपयोगिता दक्षता के लिए परिचालन सुधार, शहरी नियोजन और स्थानिक सुधार जिसमें पारगमन-उन्मुख विकास और हरित अवसंरचना शामिल हैं और सुनिर्धारित प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई), तृतीय-पक्ष द्वारा सत्यापन और निरंतर संचालन एवं रखरखाव तंत्रों के साथ परियोजना-विशिष्ट सुधार शामिल हैं.

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

परियोजनाओं का मूल्यांकन उनके द्वारा परिवर्तनकारी परिणाम देने की क्षमता के आधार पर किया जाएगा, जिसमें आर्थिक, सामाजिक और जलवायु संबंधी सहित राजस्व जुटाना, निजी निवेश, रोजगार सृजन और बेहतर सुरक्षा, समावेशिता, सेवा समानता और स्वच्छता शामिल है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...