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PM मोदी के सामने मंत्रियों का ‘परफॉर्मेंस टेस्ट’, कैबिनेट प्रजेंटेशन से तय होगी जवाबदेही; मंत्रालयों में मची हलचल

केंद्र की मोदी सरकार में अब सभी मंत्री कैबिनेट मीटिंग में अपने मंत्रालय के कामकाज और जून 2024 के बाद लागू सुधारों पर प्रजेंटेशन देंगे. समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मौजूद रहेंगे और जवाबदेही तय होगी.

Narendra Modi (File Photo)
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केंद्र की मोदी सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल में कामकाज की रफ्तार और जवाबदेही दोनों को तेज करने का संकेत दे दिया है. अब सभी केंद्रीय मंत्री कैबिनेट मीटिंग में अपने-अपने मंत्रालय की उपलब्धियों और सुधारों पर विस्तृत प्रजेंटेशन देंगे. खास बात यह है कि जब मंत्री अपनी बात रखेंगे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सामने बैठकर उनकी समीक्षा करेंगे.

सूत्रों के अनुसार, जून 2024 के बाद लागू किए गए सुधारों पर विशेष फोकस रहेगा. मंत्रियों को बताना होगा कि उनके मंत्रालय ने कौन से बड़े फैसले लिए, उन्हें लागू करने में क्या चुनौतियां आईं और उनका जमीनी असर क्या रहा. इस व्यवस्था का मकसद साफ है. सरकार चाहती है कि फैसले सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका ठोस परिणाम भी दिखे.

सेवातीर्थ में हुई पहली बैठक

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प्रधानमंत्री कार्यालय को अब सेवातीर्थ के नाम से जाना जाता है. यहीं हाल ही में कैबिनेट की अहम बैठक हुई. बैठक के तुरंत बाद निर्देश जारी किए गए कि हर मंत्रालय अपनी कार्यप्रगति पर प्रजेंटेशन तैयार करे. कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने सभी मंत्रियों को सूचित किया कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि अलग-अलग बैठकों में मंत्रालय अपने काम का ब्योरा पेश करें. इसका मतलब है कि सभी प्रजेंटेशन एक ही दिन नहीं होंगे, बल्कि चरणबद्ध तरीके से समीक्षा की जाएगी.

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मंत्रालयों में बढ़ी हलचल

मंगलवार शाम को जैसे ही मंत्रालयों को प्रजेंटेशन की सूचना मिली, विभागों में तैयारियां तेज हो गईं. मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि किन सुधारों को प्रमुखता से रखा जाए. खास तौर पर ऐसे फैसलों को चुना जा रहा है जिनका सीधा संबंध जनता से रहा हो और जिनका असर आम लोगों तक पहुंचा हो. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सभी मंत्रालयों से 2 मार्च तक एक सारांश भेजने को कहा गया है. इसमें स्पष्ट रूप से बताना होगा कि कौन से सुधार लागू किए गए और उनका परिणाम क्या रहा. इससे पहले कैबिनेट सचिवालय की ओर से एक तय फॉर्मेट भी भेजा गया है. इसमें तीन से चार श्रेणियों में उपलब्धियां और प्रभाव दर्ज करने होंगे.

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जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करेगा. जब मंत्री जानते हैं कि कभी भी समीक्षा हो सकती है, तो नीतियों को लागू करने में तेजी और गंभीरता दोनों बढ़ती हैं. प्रधानमंत्री की सीधी मौजूदगी इस प्रक्रिया को और महत्वपूर्ण बना देती है.

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बताते चलें कि मंत्रियों के लिए यह सिर्फ एक औपचारिक प्रजेंटेशन नहीं, बल्कि प्रदर्शन की असली परीक्षा मानी जा रही है. आने वाले दिनों में कैबिनेट बैठकों का फोकस नीतियों के परिणाम और सुधारों की प्रभावशीलता पर रहेगा. साफ है कि तीसरे कार्यकाल में सरकार कामकाज की रफ्तार के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही को भी नई ऊंचाई देना चाहती है.

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