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7 सिस्टर्स का जिक्र किया, लेकिन नहीं दिखाई भारत का नाम लेने की हिम्मत...बांग्लादेश में यूनुस की विदाई, आखिरी भाषण में क्या बोले?

बांग्लादेश में  मोहम्मद यूनुस की विदाई हो गई है. जाते-जाते भी यूनुस भारत के खिलाफ इशारों ही इशारों में जहर उगलना नहीं भूले. हालांकि उन्होंने भारत का नाम लेने की हिम्मत तक नहीं दिखाई. कहा जा रहा है कि यूनुस ने ये बात अपने आकाओं को खुश करने के लिए कही.

Mohammad Yunus / X
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भारत के साथ दशकों पुराने मजबूत रिश्तों को अपनी कट्टरपंथी सोच के कारण गर्त में धकेल देने वाले मोहम्मद यूनुस की आखिरकार विदाई हो ही गई. करीब डेढ़ साल का अल्पकाल ही सही, लेकिन यूनुस ने पाकिस्तान, चीन और अमेरिका के साथ नजदीकियां बढ़ाने के चक्कर में दिल्ली से पंगा लिया और अपने मुल्क के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दीं. इतना ही नहीं, जाते-जाते भी यूनुस अपनी हरकतों से बाज नहीं आए और बयानबाजी के जरिए जहर उगलते हुए गए.

जाते-जाते मोहम्मद यूनुस ने उगला जहर!

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद यूनुस ने नई सरकार के गठन से पहले राष्ट्र के नाम अपने अंतिम संबोधन में फिर से भारत के आंतरिक संदर्भ वाले “सेवन सिस्टर्स” शब्द का जिक्र किया, हालांकि उन्होंने सीधे भारत का नाम लेने से परहेज किया. अपने भाषण में उन्होंने नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स को एक साझा क्षेत्र के रूप में पेश किया.

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यूनुस ने दिया अपने पद से इस्तीफा!

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आपको बता दें कि चुनाव नतीजों के बाद यूनुस ने सत्ता की कमान एक निर्वाचित सरकार को सौंप दी और BNP के तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार गठन का रास्ता साफ कर दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने अंतरिम सलाहकार के पद से भी इस्तीफा दे दिया. अपने संबोधन में उन्होंने एक उप-क्षेत्रीय आर्थिक ढांचे का प्रस्ताव रखा, जिसका उनके मुताबिक मकसद समुद्री पहुंच के जरिए क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करना है.

मोहम्मद यूनुस ने कहा,“हमारा खुला समुद्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का द्वार है. नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स सहित यह पूरा क्षेत्र आर्थिक समृद्धि की अपार संभावनाएं रखता है. आर्थिक क्षेत्र, व्यापार समझौते और शुल्क मुक्त बाजार पहुंच इस क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बना सकते हैं.”

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यूनुस के इस बयान का क्या मतलब है?

दरअसल, यूनुस का ‘सेवन सिस्टर्स’ का राग पिछले साल सत्ता संभालने के बाद से ही शुरू हो गया था. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर मार्च-अप्रैल 2025 में अपनी चार दिन की चीन यात्रा के दौरान उन्होंने बीजिंग से सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था. इस दौरान उन्होंने भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र करते हुए कहा था कि ये राज्य समुद्र से सीधे जुड़े नहीं हैं और चीन बांग्लादेश के रास्ते वहां तक अपने संपर्क और व्यापार का विस्तार कर सकता है.

BNP की जीत, चुनौती बरकरार!

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हाल ही में सम्पन्न चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जबरदस्त जीत कई लोगों के लिए राहत का कारण बनी है. बांग्लादेश की राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि तारिक रहमान के लिए विदेशी रिश्तों को संवारने से ज्यादा भीतर की स्थिति को संभालना सबसे बड़ी चुनौती होगी.

उन्होंने साफ किया है कि वह सभी देशों के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेश का हित उनके लिए सर्वोपरि होगा. विशेषज्ञों के मुताबिक इसका स्पष्ट अर्थ है कि वह बांग्लादेश की कीमत पर किसी भी देश को जरूरत से ज्यादा तवज्जो नहीं देंगे.

यूनुस बढ़ा रहे थे पाकिस्तान के साथ पींगे!

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दरअसल, यूनुस ने पाकिस्तान को अत्यधिक अहमियत दे दी थी. उन्होंने समुद्री पहुंच खोल दी और वीजा नियमों में ढील दी. भारतीय एजेंसियों का कहना है कि यह यूनुस की बड़ी भूल थी, क्योंकि आईएसआई इन रास्तों का इस्तेमाल हथियार, गोला-बारूद और आतंकवादियों की घुसपैठ के लिए करती रही है. इन मार्गों का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी के लिए भी किया जाता रहा है, जो बांग्लादेश के रास्ते भारत तक पहुंचाई जाती है.

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एक और बड़ी चुनौती भीड़तंत्र पर नकेल कसने की होगी. यूनुस के कार्यकाल में जमात के प्रभाव के कारण अनियंत्रित भीड़ का आतंक आम बात बन गया था.

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