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'मुझसे मिल, तेरा गला रेत दूंगा...' MP में संघ प्रचारक को फोन पर मिली हत्या की धमकी, FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के आगर में संघ प्रचारक को फोन पर गला रेतकर मारने की धमकी और गालियां दी गईं. 23 अक्टूबर को FIR दर्ज की गई, लेकिन आरोपी की अभी तक पहचान या गिरफ्तारी नहीं हुई. संघ कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और उन्होंने पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि यह धमकी पूरे संगठन और समुदाय के सम्मान के खिलाफ मानी जा रही है.

Source: Social Media
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मध्य प्रदेश के आगर जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक सोहन परमार को फोन पर गला रेतकर जान से मारने की धमकी और गालियां देने का मामला सामने आया है. संघ प्रचारक की शिकायत पर  आगर जिले के कोतवाली थाने में 23 अक्टूबर को FIR दर्ज की गई, लेकिन एक दिन बाद भी आरोपी की पहचान या गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. अब इस मामले को लेकर संघ के कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. 

धमकी का पूरा घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, घटना 20 अक्टूबर को दीपावली के मौके पर हुई. आगर जिले के बड़ौद निवासी सोहन पुत्र रामगोपाल परमार राष्ट्रीय स्वयं सोहन परमार कार्यालय में दीपोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए थे. रात 10:22 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने पहले कटाक्ष किए और फिर अपशब्द बोले. उन्होंने कहा, “तू मुझे मिल, तेरा गला रेतकर तुझे मार दूंगा.” कॉल मोबाइल के स्पीकर पर था, पास खड़े संघ कार्यकर्ता राज सोनी, अजय परमार और गिरिराज पाटीदार ने पूरी बातचीत सुनी. इसके बाद भी उसी नंबर से कई कॉल आए और व्हाट्सऐप पर धमकी भरे वीडियो भेजे गए. अगले दिन, 23 अक्टूबर को, परमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और मोबाइल नंबर का उल्लेख भी किया.

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कार्यकर्ताओं में आक्रोश

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संघ कार्यकर्ताओं का कहना है कि कॉल करने वाला कोई जाना-पहचाना व्यक्ति नहीं था. उन्होंने पुलिस से जल्दी कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि यह धमकी सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे संगठन और समुदाय के सम्मान के खिलाफ है.

पुलिस की सुस्ती पर सवाल

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इस मामले को लेकर थाने के टीआई संतोष बघेला ने बताया कि FIR दर्ज कर ली गई है और साइबर सेल की मदद से नंबर की पहचान की जा रही है. उन्होंने कहा कि पहचान होते ही आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. बावजूद इसके, एफआईआर दर्ज होने के एक दिन बाद तक गिरफ्तारी न होने से कार्यकर्ताओं में असंतोष है.

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बताते चलें कि इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि सक्रिय संगठनों के पदाधिकारियों की सुरक्षा और साइबर धमकियों से निपटने के लिए क्या ठोस प्रोटोकॉल हैं. कार्यकर्ता चाहते हैं कि आरोपी जल्दी पकड़ा जाए और सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.

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