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चौधरी देवी लाल की जयंती पर मायावती का हरियाणा दौरा, क्या बदलेंगे समीकरण?
मायावती हरियाणा में चुनावी प्रचार के लिए उतर रही हैं। देवी लाल की जयंती के मौके पर उनके कार्यक्रम में शामिल होना गठबंधन के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
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हरियाणा में इस बार के विधानसभा चुनावों में राजनीति की बिसात पर कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। प्रमुख रूप से इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठबंधन ने राज्य की राजनीति में एक नया आयाम जोड़ दिया है। इस गठबंधन के तहत बसपा सुप्रीमो मायावती हरियाणा का दौरा करने जा रही हैं, और उनका यह दौरा विशेष रूप से चौधरी देवी लाल की जयंती के मौके पर होगा।
अभय चौटाला, इनेलो के प्रमुख नेता, ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी कि मायावती जींद में एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगी, जहां चौधरी देवी लाल के सम्मान में समारोह का आयोजन किया जा रहा है। अभय चौटाला का मानना है कि मायावती की इस यात्रा से गठबंधन को एक नई मजबूती मिलेगी और राज्य में चुनावी माहौल उनके पक्ष में बदलेगा।
चौधरी देवी लाल, जिन्हें हरियाणा के 'जन्मदाता' के रूप में भी जाना जाता है, उन्होंने राज्य के विकास और सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके सम्मान में होने वाले इस आयोजन को चुनावी दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभय चौटाला ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी इस बार चुनाव में 25 से 30 सीटें जीतने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि मायावती और इनेलो के समर्थन के साथ वे राज्य में भारी बहुमत से जीत दर्ज करेंगे और अगली सरकार बनाएंगे।
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इसके अलावा, अभय चौटाला ने जुलाना विधानसभा सीट की तैयारियों पर भी चर्चा की, जहां डॉ. सुरेंद्र सिंह लाठर को प्रत्याशी बनाया गया है। डॉ. लाठर एक पूर्व कमिश्नर रह चुके हैं और उनका सामाजिक योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा है। चौटाला ने उन्हें जनता का सच्चा हितैषी बताया और विश्वास जताया कि जुलाना विधानसभा से उनकी जीत सुनिश्चित है। इस बार हरियाणा के चुनावों में कुछ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। जहां पहले मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच देखा जा रहा था, वहीं आम आदमी पार्टी (आप) की एंट्री ने समीकरणों को त्रिकोणीय बना दिया है। इससे चुनावी तस्वीर पहले से कहीं अधिक जटिल और रोमांचक हो गई है।
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हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों के लिए पांच अक्टूबर को मतदान होगा और इसके परिणाम आठ अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। अब देखना होगा कि क्या मायावती और चौटाला का गठबंधन राज्य की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव ला सकेगा या नहीं।
Source: IANS