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मुस्लिमों ने दिया 'धोखा' तो भड़कीं Mayawati ने कर दिया ऐसा ऐलान भड़क जाएंगे मुसलमान

चार जून को जब चुनावी नतीजे आए तो। बीजेपी ही नहीं ।पूरा देश चौंक गया ।क्योंकि तमाम फैक्टर के बावजूद बीजेपी जहां 36 सीटों पर सिमट कर रह गई ।तो वहीं मुस्लिमों पर भरोसा जताने वालीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती की पार्टी का एक बार फिर खाता भी नहीं खुला । इस करारी हार से बौखलाईं मायावती ने लगता है अब मुस्लिमों को सबक सिखाने की ठान ली है !

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Mayawati : देश में जब लोकसभा चुनाव हो रहा था ।तब यही कहा जा रहा था कि बीजेपी को यूपी जीतने में कोई परेशानी नहीं होने वाली है। क्योंकि बीजेपी में पूर्ण बहुमत वाली योगी सरकार है ।मोदी सरकार की योजनाएं जमीन पर उतरी हैं। और सबसे बड़ी बात अयोध्या में पांच सौ सालों के बाद भगवान राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया। इन तीन फैक्टर के दम पर बीजेपी को लगने लगा था कि वो बड़ी ही आसानी के साथ यूपी जीत लेगी। लेकिन चार जून को जब चुनावी नतीजे आए तो ।बीजेपी ही नहीं । पूरा देश चौंक गया। क्योंकि तमाम फैक्टर के बावजूद बीजेपी जहां 36 सीटों पर सिमट कर रह गई। तो वहीं मुस्लिमों पर भरोसा जताने वालीं बीएसपी सुप्रीमो Mayawati की पार्टी का एक बार फिर खाता भी नहीं खुला। इस करारी हार से बौखलाईं मायावती ने लगता है अब मुस्लिमों को सबक सिखाने की ठान ली है।



दरअसल उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम समुदाय भी एक बड़ी भूमिका निभाता रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस ।सपा हो या बसपा। तीनों ही पार्टियों की नजर मुस्लिम वोट पर रहती है। लेकिन इसके बावजूद सपा और कांग्रेस गठबंधन ने जहां महज 6 मुसलमानों को ही टिकट दिया। तो वहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अकेले ही बीएसपी से 19 मुसलमानों को टिकट दिया। लेकिन इसके बावजूद एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को जीत नसीब नहीं हुई ।बस यही वजह है कि अब तक मुसलमानों को प्रतिनिधित्व देने वालीं मायावती भी मुसलमानों से बुरी तरह नाराज हो गईं ।और इस कदर नाराज हो गईं कि यहां तक कह दिया कि अब सोच समझ कर ही मुसलमानों को मौका देंगे।

दरअसल यूपी की अस्सी में से 19 सीटों पर मुसलमानों को टिकट देकर चुनाव लड़ाने वालीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती का इस बार भी यूपी में खाता नहीं खुला । यहां तक कि मुस्लिम उम्मीदवार भी बुरी तरह से हार गये । बस इसी हार से बौखलाईं मायावती ने एक बयान जारी करते हुए कहा।


"बीएसपी का खास अंग मुस्लिम समाज जो पिछले कई चुनावों में और इस बार भी लोकसभा आम चुनाव में उचित प्रतिनिधित्व देने के बावजूद भी बीएसपी को ठीक से नहीं समझ पा रहा है तो अब ऐसी स्थिति में आगे इनको काफी सोच-समझ कर ही चुनाव में पार्टी द्वारा मौका दिया जाएगा ताकि आगे पार्टी को भविष्य में इस बार की तरह भयंकर नुकसान ना हो "


मायावती का ये बयान बता रहा है कि मुस्लिमों का समर्थन नहीं मिलने से वो किस कदर भड़की हुई हैं ।उन्होंने तो यहां तक ऐलान कर दिया कि अब आगे चुनाव में सोच समझ कर ही मुसलमानों को टिकट दिया जाएगा ।मुसलमानों से मायावती की ये नाराजगी शायद पहली बार देखी जा रही है ।क्योंकि एक वक्त था जब साल 2007 के यूपी विधानसभा चुनाव में मायावती ने ब्राह्मण, मुस्लिम दलित का जातीय समीकरण साध कर ही प्रचंड बहुमत के साथ पहली बार सत्ता हासिल की थी । इस जीत के बाद मायावती की सोशल इंजीनियरिंग की खूब तारीफ हुई थी । और इसी जीत के बाद मुसलमानों पर मायावती का भरोसा और बढ़ता गया। लेकिन साल 2022 में जब यूपी विधानसभा चुनाव हुआ तो उस वक्त भी मुस्लिमों ने मायावती का साथ नहीं दिया ।एकमुश्त वोट सपा को चले गये । जिसके बाद खुद मायावती ने कहा था कि आने वाले चुनावों में हम अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे।

साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में ही मुस्लिमों ने मायावती की पार्टी को खारिज कर दिया था ।लेकिन इसके बावजूद मायावती ने लोकसभा चुनाव में 19 मुसलमानों को टिकट दे दिया ।और इस बार भी मुस्लिमों ने बीएसपी को नकार दिया । लगातार दो चुनावों में मुस्लिमों से मिले बड़े झटके के बाद अब मायावती ने भी खुल्ला ऐलान कर दिया है कि बड़ी संख्या में टिकट देने के बावजूद मुस्लिम बीएसपी को समझ नहीं पा रहे हैं तो अब उन्हें सोच समझ कर ही चुनाव में मौका दिया जाएगा ।

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