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राष्ट्रपति का अपमान करके फंस गई ममता बनर्जी, राष्ट्रपति कार्यालय ने ऐसा जवाब दिया पूरी TMC परेशान हो गई!

पश्चिम बंगाल में प्रोटोकॉल विवाद के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यालय ने समय की कमी का हवाला देते हुए तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात का अनुरोध फिलहाल स्वीकार नहीं किया.

Droupadi Murmu/ Mamta Banerjee (File Photo)
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्य सरकार के बीच प्रोटोकॉल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात का अनुरोध फिलहाल स्वीकार नहीं किया गया है, जिससे इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है.

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति कार्यालय ने तृणमूल कांग्रेस के 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के अनुरोध को समय की कमी का हवाला देते हुए फिलहाल अस्वीकार कर दिया है. हालांकि पार्टी ने हार नहीं मानी है और अगले सप्ताह के लिए फिर से समय मांगने की तैयारी कर ली है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात राज्य और केंद्र के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है.

प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात का उद्देश्य

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दरअसल, इस प्रस्तावित बैठक का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और पहलों की जानकारी राष्ट्रपति को देना था. तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर बताया था कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है. पार्टी चाहती थी कि इन योजनाओं की जानकारी सीधे राष्ट्रपति तक पहुंचे, ताकि किसी तरह की गलतफहमी दूर हो सके.

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सिलीगुड़ी सम्मेलन से शुरू हुआ विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत पिछले सप्ताह सिलीगुड़ी में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन से हुई थी. सम्मेलन के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला सामने आया. राष्ट्रपति ने बागडोगरा एयरपोर्ट पर अपने स्वागत के समय मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के किसी मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए थे. इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी.

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आदिवासी विकास को लेकर राष्ट्रपति की चिंता

सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने आदिवासी समुदाय के विकास को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि क्या वास्तव में संथाल और अन्य आदिवासी समुदायों का विकास हो रहा है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ इन समुदायों तक पहुंच पा रहा है. राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि शायद कुछ लोगों को इन समुदायों की प्रगति पसंद नहीं है और इसी कारण कई सुविधाएं उन तक नहीं पहुंच पा रही हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया

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राष्ट्रपति की इन टिप्पणियों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान राष्ट्रपति जैसे उच्च पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं. ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने केवल एक समुदाय की बात की, जबकि राज्य में कई अन्य समुदाय भी रहते हैं जिनके विकास के लिए सरकार लगातार काम कर रही है. मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह के बयान देना उचित नहीं है. साथ ही उन्होंने मतदाता सूचियों में संशोधन के मुद्दे को उठाते हुए दावा किया कि कई आदिवासियों के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो चिंता का विषय है.

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया

इस विवाद में केंद्र सरकार की भी प्रतिक्रिया सामने आई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन को बेहद शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक पदों का सम्मान बेहद जरूरी है और इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति की पीड़ा को हर संवेदनशील व्यक्ति समझ सकता है.

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बंगाल सरकार का जवाब

वहीं दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. राज्य सरकार का कहना है कि जिस कार्यक्रम में राष्ट्रपति शामिल हुई थीं वह निजी तौर पर आयोजित किया गया था. इसलिए मुख्यमंत्री या मंत्रियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं थी. सरकार ने यह भी दावा किया कि जिला प्रशासन की ओर से किसी तरह का प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ.

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बहरहाल, यह मामला अब केवल प्रोटोकॉल विवाद तक सीमित नहीं रहा. यह राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन चुका है. आने वाले दिनों में यदि तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मिलता है तो संभव है कि इस विवाद के कुछ पहलुओं पर स्पष्टता सामने आए. फिलहाल पूरे देश की नजर इस राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है.

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