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मध्यस्थ नियुक्ति को लेकर ममता बनर्जी की नाराजगी, गोरखा मुद्दों पर बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी को भेजा सख्त पत्र
गोरखा मुद्दों पर बातचीत के लिए मध्यस्थ की नियुक्ति से ममता बनर्जी नाराज हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर असंतोष जताया और केंद्र की इस नीति पर सवाल उठाए, साथ ही गोरखा समुदाय के हितों की रक्षा पर जोर दिया.
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ममता बनर्जी ने PM मोदी को लिखा पत्र: गोरखा मुद्दों पर मध्यस्थ की नियुक्ति पर जताई आपत्ति, संघीय भावना का उल्लंघन बतायाकोलकाता, 18 अक्टूबर 2025: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के हालिया फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने दार्जिलिंग हिल्स, तराई और डुआर्स क्षेत्र में गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए केंद्र द्वारा पंकज कुमार सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) को मध्यस्थ नियुक्त करने को संघीय सहयोग की भावना के खिलाफ बताया. ममता ने इस एकतरफा फैसले को दार्जिलिंग की शांति और गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के सुशासन के लिए खतरा करार दिया. आइए, इस पत्र और इसके निहितार्थों को विस्तार से समझें.
केंद्र का एकतरफा फैसला
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पत्र में लिखा, "मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने पंकज कुमार सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) को गोरखा मुद्दों पर बातचीत के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है. " उन्होंने इस निर्णय को पूरी तरह एकतरफा बताया, क्योंकि केंद्र ने पश्चिम बंगाल सरकार से कोई परामर्श नहीं किया. ममता ने कहा कि यह मामला राज्य प्रशासन, दार्जिलिंग की शांति और जीटीए के सुशासन से सीधे जुड़ा है, फिर भी राज्य को विश्वास में नहीं लिया गया.
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जीटीए का इतिहास
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ममता ने पत्र में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) की स्थापना का जिक्र किया. जीटीए 18 जुलाई 2011 को हुए त्रिपक्षीय समझौते का परिणाम था, जिसमें भारत सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) शामिल थे. यह समझौता तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री और ममता बनर्जी की उपस्थिति में हुआ था. जीटीए का गठन गोरखा समुदाय की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई प्रगति के लिए किया गया था.
राज्य सरकार के प्रयासों का योगदान
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ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल सरकार के निरंतर प्रयासों से दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में शांति और सद्भाव कायम हुआ है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने गोरखा समुदाय की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई कदम उठाए, जिससे क्षेत्र में स्थिरता आई. ममता ने चेतावनी दी कि केंद्र का यह एकतरफा फैसला इस नाजुक शांति को भंग कर सकता है.
ममता का केंद्र पर प्रहार
मुख्यमंत्री ने पत्र में केंद्र सरकार पर संघीय सहयोग की भावना का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार का दृढ़ मत है कि गोरखा समुदाय या जीटीए क्षेत्र से जुड़ी किसी भी पहल को राज्य सरकार से पूरी चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए. " ममता ने तर्क दिया कि बिना परामर्श के उठाया गया कोई भी कदम दार्जिलिंग की शांति और सौहार्द को प्रभावित कर सकता है.
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मध्यस्थ नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि मध्यस्थ की नियुक्ति के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए और इसे रद्द किया जाए. उन्होंने कहा कि यह कदम केंद्र और राज्य के बीच आपसी सम्मान और संघीय भावना को बनाए रखने के लिए जरूरी है. ममता ने जोर दिया कि बिना राज्य की सहमति के इस तरह के फैसले क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बन सकते हैं.
दीपावली की शुभकामनाओं के साथ शांति का संदेश
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पत्र के अंत में ममता ने प्रधानमंत्री को दीपावली की शुभकामनाएं दीं और कहा, "हम सभी को शांति, सहयोग और संवैधानिक भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए. " उन्होंने केंद्र से अपील की कि वह गोरखा समुदाय के मुद्दों पर राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करे, ताकि दार्जिलिंग में शांति और विकास का माहौल बरकरार रहे.
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ममता बनर्जी का यह पत्र केंद्र और राज्य के बीच तनाव को उजागर करता है. गोरखा समुदाय के मुद्दे संवेदनशील हैं, और दार्जिलिंग में शांति बनाए रखने के लिए सहयोग जरूरी है. ममता ने केंद्र से इस मुद्दे पर संवाद की अपील की है, ताकि गोरखा समुदाय की प्रगति और क्षेत्र की शांति सुनिश्चित की जा सके. यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार इस पत्र का जवाब कैसे देती है और क्या मध्यस्थ की नियुक्ति पर पुनर्विचार होगा.