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मालेगांव ब्लास्ट केस: हरियाणा के मंत्रियों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, कहा- अदालत के फैसले पर हर देशवासी को भरोसा

हरियाणा सरकार में खेल मंत्री गौरव गौतम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, "अदालत ने जो फैसला सुनाया है, उस पर हर देशवासी को भरोसा है." उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान को दोहराते हुए कहा, "हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकता, इस बात से हम सरोकार रखते हैं. पूरा समर्थन करते हैं."

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मालेगांव ब्लास्ट केस में प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 आरोपियों को बरी किए जाने पर भाजपा नेताओं ने खुशी जताई है. हरियाणा सरकार में मंत्री गौरव गौतम और कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने फैसले का स्वागत किया है.

हरियाणा के मंत्रियों ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

हरियाणा सरकार में खेल मंत्री गौरव गौतम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, "अदालत ने जो फैसला सुनाया है, उस पर हर देशवासी को भरोसा है." उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान को दोहराते हुए कहा, "हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकता, इस बात से हम सरोकार रखते हैं. पूरा समर्थन करते हैं."

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मालेगांव मामले में आए फैसले पर खुश कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा

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हरियाणा के कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने भी मालेगांव मामले में आए फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, "मैं साध्वी प्रज्ञा और उनके सहयोगियों को बधाई देता हूं. कोर्ट के फैसले से साबित हो गया है कि उन पर लगे आरोप सही नहीं थे."

रणबीर गंगवा ने केंद्रीय गृह मंत्री के बयान का समर्थन

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रणबीर गंगवा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी और हिंदू हमेशा कांग्रेस के निशाने पर रहते हैं. कांग्रेस खासकर भगवा के खिलाफ बोलने का काम करती है. हिंदू हमेशा सभी धर्मों को मानने वाला और अहिंसा में विश्वास रखने वाला होता है, लेकिन कांग्रेस हमेशा गलत तरीके से टारगेट करने की कोशिश करती है."

17 साल बाद आया मालेगांव ब्लास्ट का फैसला 

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मालेगांव ब्लास्ट केस में 17 साल बाद गुरुवार (31 जुलाई) को फैसला आया है. 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में धमाके हुए थे, जिसमें 6 लोग मारे गए थे. 2011 में मामले की जांच एनआईए को मिली थी. पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और सेवानिवृत्त मेजर रमेश उपाध्याय आरोपियों में शामिल थे, लेकिन जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले. गुरुवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया. फैसले में कोर्ट ने कहा कि इनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं.

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