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ओडिशा में बड़ी सफलता, हिडमा के बाद 1 करोड़ इनामी माओवादी गणेश उइके मारा गया
उइके छत्तीसगढ़ में 2013 के झीरम घाटी नरसंहार का मास्टरमाइंड था, जिसमें कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मारे गए थे और वह कई राज्यों में कई हाई-प्रोफाइल माओवादी हमलों में शामिल था.
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ओडिशा में गुरुवार को एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान में खूंखार माओवादी कमांडर गणेश उइके मारा गया. यह जानकारी पुलिस अधिकारियों ने दी. उन्होंने बताया कि गणेश सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था और उस पर एक करोड़ रुपए का इनाम था.
राम्पा जंगल में मुठभेड़
उइके को कंधमाल-गंजम जिले की सीमा पर घने राम्पा जंगल इलाके में ओडिशा पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी), सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) की संयुक्त सुरक्षा बल टीम ने मुठभेड़ में मार गिराया.
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40 साल से सक्रिय, कई बड़ी घटनाओं का मास्टरमाइंड
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सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि गणेश उइके लगभग चार दशकों से माओवादी आंदोलन में सक्रिय था और देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में से एक था.
वह तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला था और उसे कुछ साल पहले प्रतिबंधित संगठन की केंद्रीय समिति में शामिल किया गया था, जो संगठन के भीतर उसके रणनीतिक महत्व को दर्शाता है.
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उइके छत्तीसगढ़ में 2013 के झीरम घाटी नरसंहार का मास्टरमाइंड था, जिसमें कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता मारे गए थे और वह कई राज्यों में कई हाई-प्रोफाइल माओवादी हमलों में शामिल था.
कंधमाल क्षेत्र में नेटवर्क मजबूत कर रहा था
पिछले तीन सालों से, वह ओडिशा के कंधमाल क्षेत्र में काम कर रहा था, गुरिल्ला गतिविधियों का समन्वय कर रहा था और माओवादी नेटवर्क को मजबूत कर रहा था.
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चार अन्य माओवादी भी मारे गए
माओवादी रैंकों में, उसे पी. हनुमंता के नाम से जाना जाता था. इसी मुठभेड़ में, दो महिला कैडरों सहित चार माओवादियों को भी मार गिराया गया. अधिकारियों ने बताया कि सभी मारे गए माओवादियों के शव मुठभेड़ स्थल से बरामद कर लिए गए हैं.
ओडिशा पुलिस के डीआईजी (नक्सल ऑपरेशंस) अखिलेश्वर सिंह ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया था.
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उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और अतिरिक्त माओवादी कैडरों की उपस्थिति की संभावना को खत्म करने के लिए इलाके में आगे तलाशी अभियान जारी हैं.
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गणेश उइके की मौत को माओवादी नेतृत्व संरचना के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा है कि मार्च 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद का खतरा खत्म कर दिया जाएगा.