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श्री वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज पर बड़ी कार्रवाई, MBBS की मान्यता हुई रद्द, जानिए क्यों हुई यह कार्रवाई?

जम्मू की श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस मान्यता एनएमसी ने गंभीर तकनीकी कमियों, फैकल्टी की भारी कमी और मरीजों की संख्या कम होने के कारण तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है.

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जम्मू की श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के लिए आज एक बड़ा झटका है. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने कॉलेज में कई गंभीर तकनीकी कमियों का हवाला देते हुए एमबीबीएस (MBBS) पाठ्यक्रम की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है. यह कार्रवाई आयोग ने कॉलेज में न्यूनतम मानकों के उल्लंघन, भारी फैकल्टी कमी और मरीजों की संख्या कम होने के कारण की है. एनएमसी की यह सख्त कार्रवाई मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में नियमों के पालन का संदेश भी देती है.

इस कार्रवाई को लेरक एनएमसी (NMC) ने बताया है कि कॉलेज में कई विभागों में आवश्यक शिक्षक, रेजिडेंट डॉक्टर और प्रैक्टिकल लैब की कमी पाई गई. ओपीडी और आईसीयू में मरीजों की संख्या न्यूनतम मानक से काफी कम मिली. लाइब्रेरी में आवश्यक पुस्तकों और जर्नल की संख्या भी आधी से कम है. ऑपरेशन थिएटर की हालत भी चिंताजनक पाई गई. आयोग ने इन सभी कमियों को स्नातक चिकित्सा शिक्षा न्यूनतम मानक नियम 2023 का स्पष्ट उल्लंघन माना है.

छात्रों का भविष्य सुरक्षित

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एनएमसी (NMC) ने छात्रों को राहत देने का प्रावधान रखा है. शैक्षणिक सत्र 2025–26 में जो छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा. आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र की एमबीबीएस सीट नहीं जाएगी. केंद्र शासित प्रदेश की सक्षम काउंसलिंग अथॉरिटी इस स्थानांतरण की जिम्मेदारी संभालेगी. इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो और उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए.

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एनएमसी ने क्यों उठाया यह कदम?

आयोग के सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से कॉलेज में पर्याप्त बुनियादी ढांचा नहीं था. योग्य और पूर्णकालिक शिक्षकों की भारी कमी, रेजिडेंट डॉक्टरों का अभाव और ओपीडी व आईपीडी में मरीजों की संख्या कम होने की कई शिकायतें मिली थीं. इन शिकायतों की जांच के लिए आयोग की टीम ने इस साल 2 जनवरी को अचानक कॉलेज का निरीक्षण किया. निरीक्षण रिपोर्ट में कॉलेज की फैकल्टी में 39% की कमी, ट्यूटर और सीनियर रेजिडेंट के 65% पद खाली पाए गए. ओपीडी में न्यूनतम मानक 400 मरीज होने के बावजूद केवल 182 मरीज ही मिले. अस्पताल में केवल 45% बिस्तर भरे थे जबकि मानक 80% था. आईसीयू में 50% और प्रसूति विभाग में औसतन 25 प्रसूति प्रति माह दर्ज हुई. आयोग की टीम ने यह भी पाया कि कई विभागों में छात्रों के लिए प्रैक्टिकल लैब और शोध प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं थी. लाइब्रेरी में केवल 744 किताबें और 2 जर्नल ही थे जबकि मानक 1500 किताबें और 15 जर्नल का था. एआरटी सेंटर और एमडीआर-टीबी के इलाज की सुविधा भी अनुपस्थित थी. ऑपरेशन थिएटर की जांच में पांच की जरूरत के मुकाबले केवल दो ही चालू थे. पुरुष और महिला मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड भी नहीं बनाए गए थे.

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कानूनी आधार पर कार्रवाई

एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने स्पष्ट किया कि मेडिकल संस्थानों की स्थापना, मूल्यांकन और रेटिंग नियम–2023 के तहत ऐसी गैर-पालना दंडनीय अपराध है. इसी आधार पर एनएमसी अध्यक्ष की मंजूरी से श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी गई है.

कागज नहीं, जमीन पर तैयारी जरूरी

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जानकारों का मानना है कि एनएमसी की यह कार्रवाई सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए संदेश है कि केवल नाम, प्रतिष्ठा या लेटर ऑफ परमिशन (LOP) पर भरोसा नहीं चलेगा. अब प्रत्येक कॉलेज को संकाय सदस्य, मरीजों की संख्या, संसाधन और बुनियादी ढांचे में वास्तविक मजबूती दिखानी होगी. छात्र प्रशिक्षण, प्रैक्टिकल लैब और मरीजों की संख्या के मामले में मानक पूरी तरह पूरे किए बिना किसी कॉलेज की मान्यता नहीं दी जाएगी. जानकारों की मानें यह कदम मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. कॉलेजों को अब अपने कर्मचारियों, सुविधाओं और अस्पताल प्रबंधन में सुधार करना होगा ताकि विद्यार्थियों को उच्च स्तर की शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव मिल सके. एनएमसी की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि भारत में मेडिकल शिक्षा के नियमों का पालन अब और सख्ती से होगा. छात्रों के भविष्य की रक्षा करते हुए गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाएगी. श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने की घटना अन्य मेडिकल संस्थानों के लिए भी चेतावनी है कि केवल नाम या प्रतिष्ठा से काम नहीं चलेगा.

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बहरहाल, इस पूरे मामले में यह साफ हो गया है कि मेडिकल शिक्षा में वास्तविक तैयारी और गुणवत्ता को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता. छात्रों के हितों की रक्षा करते हुए एनएमसी ने सख्त कदम उठाया है, जो मेडिकल शिक्षा की मानकों को मजबूती प्रदान करेगा. छात्र अब सुरक्षित स्थानांतरण के माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रख पाएंगे, जबकि कॉलेज को अपने बुनियादी ढांचे और संसाधनों में सुधार करना होगा. यह कार्रवाई भारत में मेडिकल शिक्षा के सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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