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ड्रग्स पर बड़ा एक्शन, जम्मू में अब कूरियर पार्सल के लिए जरूरी होगा ट्रांसपोर्ट परमिट, हर ट्रांजेक्शन पर नजर

जम्मू में ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए अब बिना वैध परिवहन परमिट कोई कूरियर पार्सल नहीं भेजा जाएगा. प्रशासन ने हर ट्रांजेक्शन और पार्सल पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं ताकि ड्रग्स नेटवर्क पर लगाम लगाई जा सके.

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जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स तस्करी के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने कूरियर और पार्सल सेवाओं पर सख्ती बरतने का फैसला किया है. हाल ही में जारी आदेश के तहत बिना वैध परिवहन परमिट के किसी भी प्रतिबंधित पदार्थ को भेजना प्रतिबंधित कर दिया गया है. साथ ही, सभी ट्रांजेक्शनों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तस्करी की कोशिशों को चकमा न दिया जा सके. यह कदम नशे के कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने की दिशा में महत्वपूर्ण है.

ड्रग्स तस्करी के बढ़ते मामलों पर चिंता

जम्मू क्षेत्र में कूरियर सेवाओं का दुरुपयोग कर ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी तेजी से बढ़ रही है. सामान्य पार्सलों की आड़ में मादक द्रव्यों को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा रहा है, जो युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेल रहा है. जिला मजिस्ट्रेट ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से आदेश जारी किया है, जो अगले आठ सप्ताह तक लागू रहेगा.

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वैध परमिट अनिवार्य, बिना परमिट पर पूर्ण रोक

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आदेश के अनुसार, जम्मू जिले में संचालित कोई भी कूरियर कंपनी, पार्सल सेवा या लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर मादक दवाओं, मनोदैहिक पदार्थों या अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं को स्वीकार, बुक या परिवहन नहीं करेगा. इसके लिए एनडीपीएस नियम 1985 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम 1940 के तहत वैध परिवहन परमिट होना अनिवार्य है. बिना परमिट के कोई भी पार्सल नहीं चलेगा, और इसका उल्लंघन गंभीर अपराध माना जाएगा.

ट्रांजेक्शन पर सख्त निगरानी, रिकॉर्ड अनिवार्य

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कूरियर कंपनियों को प्रत्येक खेप के भुगतान के तरीके, चाहे कैश, डिजिटल, चेक, यूपीआई या कार्ड, का विस्तृत रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा, भेजने वाले और प्राप्तकर्ता का पूरा विवरण, पार्सल का वजन, बुकिंग रसीद और तारीख सहित सभी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएंगे. यह कदम ट्रांजेक्शनों के माध्यम से तस्करी के नेटवर्क को उजागर करने में मददगार साबित होगा.

कर्मचारियों का सत्यापन और ट्रेनिंग पर जोर

सभी कूरियर कर्मचारियों, जैसे डिलीवरी बॉय, लोडर, बुकिंग क्लर्क और फ्रैंचाइजी स्टाफ का सत्यापन कर रजिस्टर में दर्ज करने के आदेश हैं. साथ ही, संदिग्ध खेपों की पहचान करने और तुरंत पुलिस को सूचित करने के लिए विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाए जाएंगे. इससे जमीनी स्तर पर तस्करी रोकने में आसानी होगी.

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उल्लंघन पर कड़ी सजा, कंपनी मालिक भी जिम्मेदार

एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा 8, 21, 22, 23, 25 और 29 के तहत उल्लंघन करने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान है. अगर कोई कंपनी अपनी सेवाओं का दुरुपयोग होने देती है, तो उसके मालिक, एमडी, निदेशक और कर्मचारी भी अपराधी ठहराए जाएंगे. पार्सल जब्ती, लाइसेंस रद्द, जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है. जिला मजिस्ट्रेट ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और निरीक्षण के निर्देश दिए हैं.

हाईकोर्ट फैसलों का हवाला, कानूनी आधार मजबूत

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आदेश में दिल्ली और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसलों का जिक्र किया गया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने मेसर्स डार्ट एयर सर्विसेज बनाम सीमा शुल्क आयुक्त मामले में कहा कि कूरियर एजेंसियों का कर्तव्य है संदिग्ध खेपों की सूचना दें, अन्यथा दंडनीय होगा. वहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तस्करी में शामिल मालिक और प्रबंधक एनडीपीएस के तहत उत्तरदायी होंगे. यह पहल जम्मू को नशा मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बनेगी. प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति से अपराधियों में खौफ पैदा हो गया है.

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