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लाड़ली बहना योजना से बढ़ रहा महाराष्ट्र का बोझ, मंत्री ने बोल दी बड़ी बात
महाराष्ट्र की राजनीति में रोज़ कुछ न कुछ ऐसा हो रहा है, जिससे सियासत गरमाई हुई है, अब अजित पवार की एनसीपी के नेता और महाराष्ट्र सरकार में कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने कुछ ऐसा कह दिया है जिसकी वजह से एकनाथ शिंदे पर सवाल उठने लगे हैं, जानिए क्या है पूरा मामला
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति की प्रचंड जीत हुई, देवेंद्र फडणवीस के फिर से मुख्यमंत्री बने।लेकिन जिस दम पर महायुति की जीत हुई अब वही गले की फांस बन गया है और फडणवीस के मंत्री ही उनके ख़िलाफ़ बोलने लगे हैं।ऐसे में इन्हीं बयानबाज़ियों के बीच कहा जा रहा है कि अगर राज्य में ऐसी ही उथल पुथल मची रही तो एक बार फिर से महाराष्ट्र में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लाडकी बहिन योजना का ऐलान किया था, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया था, फिर विधानसभा चुनाव के दौरान इसे बढ़ाने की घोषणा महायुति गठबंधन की तरफ़ से की गई, जिसका असर चुनाव में देखने को मिला था, ये कहना ग़लत नहीं होगा कि, इसी योजना से सत्ताधारी महायुति की जीत हुई थी, लेकिन अब यही योजना महाराष्ट्र की सरकार के जी का जंजाल बन गई है और फडणवीस के ही मंत्री विरोध में उतर गए हैं, जी हां, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने लाडकी बहिन योजना पर सवाल खड़े किए हैं और इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि, इस योजना से राज्य पर बोझ बढ़ रहा है।
लाडकी बहिन योजना के कारण जुड़े अतिरिक्त खर्च ने कृषि ऋण माफी के लिए धन अलग रखने की हमारी क्षमता को प्रभावित किया है, हम वित्तीय स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और एक बार राज्य की आमदनी बढ़ने के बाद हम अगले चार से छह माह में ऋण माफी योजना पर आगे का कदम उठाएंगे, ऋण माफी पर निर्णय अंततः मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों द्वारा लिया जाएगा जिसे लागू करना राज्य सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी है, लाडकी बहिन योजना से राज्य के कोष पर भार पड़ रहा है, इसके कारण कृषि ऋण माफी योजना प्रभावित हो रही है
अजित पावर की NCP के विधायक और महाराष्ट्र सरकार में कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के इस बयान ने अब एक नई बहस छेड़ दी है, सवाल उठने लगे हैं कि, क्या महाराष्ट्र में लाड़की बहिन योजना बंद तो नहीं हो जाएगी, क्योंकि "ढाई करोड़ से ज्यादा महिलाएं इस योजना से जुड़ी हैं, अगर सरकार 2,100 रुपये महीना देती है, तो सालाना 63,000 करोड़ रुपये चाहिए, वहीं नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना के तहत किसानों को सालाना 12,000 रुपये मिलते हैं, इस योजना का खर्च भी करीब 13 हजार करोड़ रुपये के पार जा रहा है, सरकार ने किसानों से योजना के तहत 12,000 की बजाय 15,000 रुपये सालाना देने का वादा कर रखा है, यानि और भार बढ़ेगा"
वही कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे से पहले महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे ने कहा था कि "राज्य सरकार ने लाडकी बहन योजना के फर्जी लाभार्थियों के बारे में शिकायतों पर कार्रवाई करने का फैसला किया है और उनके सत्यापन के लिए आयकर तथा परिवहन विभागों से जानकारी मांगी है"
फ़िलहाल जिस योजना ने महाराष्ट्र में महायुति की वापसी 2024 में कराई अब उसी योजना की वजह से सरकार की मुश्किलें बढ़ रही है, ख़ुद के मंत्री ही इस योजना पर सवाल उठाने लगे है, वहीं महाराष्ट्र में इन सबके बीच एक अलग ही खेल चल रहा है, दावा किया जा रहा है कि, शरद पवार अपनी NCP का विलय अजित पवार की NCP में कर सकते हैं, दूसरी तरफ़ उद्वव ठाकरे, संजय राउत, सुप्रिया सुले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ़ कर रहें हैं, जिसके बाद अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि, महाराष्ट्र में फिर कुछ खेला हो सकता है, बहरहाल इंतज़ार करना होगा कि आगे महाराष्ट्र की राजनीति में कौन सा महाभारत होता है।
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