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महाराष्ट्र में टैक्सी-बाइक टैक्सी हड़ताल: गुरुवार को यात्रा में रुकावट, सरकार से नीति सुधार की अपील

महाराष्ट्र में गुरुवार को टैक्सी और बाइक टैक्सी चालकों ने हड़ताल की, जिससे मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे शहरों में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. चालक संगठनों ने सरकार.....

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महाराष्ट्र में 9 अक्टूबर 2025 को ऐप-आधारित टैक्सी और बाइक टैक्सी सेवाओं के चालकों ने एक दिवसीय हड़ताल की, जिससे मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे शहरों में यात्रियों को बड़ी असुविधा हुई. इंडियन गिग वर्कर्स फोरम के नेतृत्व में हजारों चालक कम कमाई, उच्च कमीशन और परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे. ओला, ऊबर और रैपिडो जैसी कंपनियों की सेवाएं ठप रहीं, जबकि ऑटो-रिक्शा चालक भी शामिल हुए.  

हड़ताल पीएम मोदी के मुंबई दौरे के दौरान हुई, ताकि राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित हो. सरकार ने नई एग्रीगेटर पॉलिसी का वादा किया है, लेकिन यूनियनों ने अपर्याप्त बताते हुए आगे आंदोलन की चेतावनी दी.

हड़ताल का बैकग्राउंड

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यह हड़ताल सितंबर 2025 के अंत में मुंबई के आजाद मैदान पर हुए 'जेल भरो' प्रदर्शन का परिणाम है. फोरम अध्यक्ष डॉ. केशव नाना क्षीरसागर ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग कंपनियों के उल्लंघनों की अनदेखी कर रहा है. जुलाई से चल रही हड़तालें रुकी नहीं, क्योंकि ईंधन और मेंटेनेंस लागत बढ़ने के बावजूद चालकों की कमाई घट रही है. हड़ताल का समय पीएम दौरे से चुना गया ताकि केंद्र का ध्यान जाए.

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मुख्य मांगें

चालक ब्लैक-एंड-येलो टैक्सी के बराबर किराया चाहते है, नॉन-एसी के लिए ₹20.66/किमी और एसी के लिए ₹22.72/किमी. कमीशन 10-15% तक सीमित करने, बाइक टैक्सी पर बैन, सोशल सिक्योरिटी, इंश्योरेंस और अकाउंट डिएक्टिवेशन सुरक्षा की मांग है. महाराष्ट्र गिग वर्कर्स एक्ट लागू करने और विभाग में भ्रष्टाचार की जांच की भी अपील की गई. क्षीरसागर ने कहा, "यह गरिमा और निष्पक्षता की लड़ाई है. "

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हड़ताल का असर

मुंबई के छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर टैक्सी स्टैंड खाली रहे. ऐप्स पर 30-60 मिनट वेट टाइम और राइड कैंसलेशन आम हो गए. पुणे में आईटी प्रोफेशनल्स और छात्र देरी का शिकार हुए, जबकि नागपुर-नासिक में ट्रैफिक जाम बढ़ा. 70-80% वाहन सड़कों से गायब थे, जिससे मरीजों और मजदूरों को सबसे ज्यादा कष्ट हुआ. हड़ताल शांतिपूर्ण रही, लेकिन कुछ जगहों पर सह-चालकों को रोका गया.

सरकारी प्रतिक्रिया

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परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने 48 घंटे में नई एग्रीगेटर पॉलिसी, सर्ज प्राइसिंग कैप, फिक्स्ड पेआउट और बाइक टैक्सी नियम, घोषित करने का ऐलान किया. ड्राफ्ट 10 अक्टूबर को जारी हुआ, लेकिन यूनियनों ने इसे अपर्याप्त बताया. रैपिडो स्पॉन्सरशिप के आरोपों से मंत्री की निष्पक्षता पर सवाल. अगर मांगें न मानी गईं, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान.

गिग इकोनॉमी का संकट

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महाराष्ट्र के 1.2 लाख चालकों की समस्या गिग वर्कर्स के व्यापक मुद्दे को उजागर करती है. कंपनियां लाभ कमाती हैं, लेकिन चालकों को हिस्सा नहीं. विशेषज्ञों का कहना है कि गिग वर्कर्स एक्ट जरूरी है. बेंगलुरु-दिल्ली में भी ऐसी हड़तालें हुईं. अगर नीति लागू हुई, तो मिसाल बनेगी. यात्रियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेने की सलाह. अपडेट्स बने रहें.

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