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'महाराष्ट्र में खेला, BJP-कांग्रेस में गठबंधन!' BMC चुनाव से पहले टेंशन में शिंदे...जानें पूरा मामला
महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में अंबरनाथ नगर परिषद में BJP-कांग्रेस गठबंधन पर सियासत तेज हो गई है. शिवसेना शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस फैसले से खुद को अलग बताते हुए कहा कि इसका जवाब BJP को ही देना चाहिए.
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महाराष्ट्र की सियासत इन दिनों नगर निकाय चुनावों को लेकर खासा गरमाई हुई है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे इन चुनावों पर न सिर्फ स्थानीय नेताओं, बल्कि प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति की भी नजर टिकी हुई है. इसी बीच अंबरनाथ नगर परिषद से सामने आए एक घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है. कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) जब अंबरनाथ नगर परिषद में सीधे कांग्रेस के साथ गठबंधन करती नजर आई, तो सवालों की बाढ़ आ गई. इस फैसले को लेकर अब शिवसेना शिंदे गुट ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है.
शिंदे गुट के सांसद ने दी तीखी प्रतिक्रिया
अंबरनाथ नगर परिषद में BJP और कांग्रेस के एक साथ आने को लेकर शिवसेना शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर अंबरनाथ में BJP ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है, तो इसका जवाब भी BJP को ही देना चाहिए. यह शिवसेना का फैसला नहीं है और न ही शिवसेना को इस पर किसी तरह की सफाई देने की जरूरत है. श्रीकांत शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना को इस पूरे घटनाक्रम से अलग रखकर देखा जाना चाहिए.
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BJP ने कांग्रेस से क्यों बनाई नजदीकी
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सांसद श्रीकांत शिंदे (Shrikant Sinde) ने इशारों में यह भी आरोप लगाया कि शिवसेना शिंदे गुट को सत्ता से दूर रखने के लिए BJP ने कांग्रेस का सहारा लिया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला कई तरह के सवाल खड़े करता है. खासतौर पर तब, जब BJP और शिवसेना सालों से केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय स्तर पर साथ काम करती रही हैं. ऐसे में अचानक कांग्रेस के साथ गठबंधन करना न सिर्फ राजनीतिक रूप से चौंकाने वाला है, बल्कि गठबंधन की विश्वसनीयता पर भी असर डालता है.
अंबरनाथ नगर परिषद के विकास का शिवसेना ने उठाया मुद्दा
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श्रीकांत शिंदे ने यह भी कहा कि BJP और शिवसेना का गठबंधन केवल सत्ता का नहीं, बल्कि विचारधारा का गठबंधन रहा है. दोनों दलों ने लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ मिलकर काम किया है और जनता के सामने एक साझा एजेंडा रखा है. ऐसे में इस तरह के फैसले कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा करते हैं और जमीन स्तर पर गलत संदेश जाता है. उन्होंने कहा कि गठबंधन को मजबूत और अटूट बनाए रखना सभी सहयोगी दलों की जिम्मेदारी है. अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना के कार्यकाल का जिक्र करते हुए सांसद शिंदे ने कहा कि जब वहां शिवसेना सत्ता में थी, तब विकास को प्राथमिकता दी गई थी. नगर परिषद में बुनियादी सुविधाओं से लेकर शहर के समग्र विकास तक कई अहम काम किए गए. शिवसेना ने हमेशा विकास की राजनीति की है और आगे भी इसी रास्ते पर चलती रहेगी.
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बताते चलें कि श्रीकांत शिंदे ने शिवसेना की नीति को दोहराते हुए कहा कि पार्टी का रुख बिल्कुल साफ है. शिवसेना विकास करने वालों के साथ खड़ी रहती है. सत्ता के लिए समझौते करना पार्टी की प्राथमिकता नहीं है. जनता के हित में लिए गए फैसले ही शिवसेना की राजनीति का आधार रहेंगे. अंबरनाथ का यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सियासत को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा.