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महाराष्ट्र में मिलेगी सस्ती, सुलभ और हाई टेक हेल्थ सर्विस...CM फडणवीस ने दावोस में पेश किया MedTech प्लान का खाका, हुए कई MoU

महाराष्ट्र के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के लोगों को सबसे अच्छी, सस्ती और हाईटेक हेल्थकेयर सर्विस प्रोवाइड करने के लिए दावोश में मेडटेक प्लान का खाका पेश किया है. इस संबंध उन्होंने विस्तार से जानकारी दी और कहा कि इस पर सहमति भी बनी है.

Devendra Fadnavis in Davos (Screengrab)
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया. इसी बीच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में महाराष्ट्र सरकार और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियों और वैश्विक संस्थानों के साथ बड़े पैमाने पर समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में राज्य की मेडटेक रणनीति का खाका पेश किया है. बुधवार (भारतीय समयानुसार) स्विट्ज़रलैंड में आयोजित एक विशेष सत्र के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने वैश्विक मेडिकल और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ गहन चर्चा की, जिसमें उन्नत मशीनों, डिजिटल हेल्थ टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए आम आदमी के इलाज की लागत कम करने पर फोकस रहा.

दावोस में महाराष्ट्र ने गाड़े झंडे

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मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यहां किए गए एमओयू केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि व्यापक संवाद का स्वाभाविक परिणाम हैं. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में विविध क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है और निवेश करने वाली सभी कंपनियां एफडीआई के साथ राज्य में कदम रख रही हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है. साथ ही उन्होंने जोर दिया कि राज्य सरकार अब केवल निवेश आधारित एमओयू नहीं, बल्कि रणनीतिक और ज्ञान आधारित साझेदारियों पर ज्यादा ध्यान दे रही है.

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सीएम फडणवीस ने लिया मेडटेक सेशन में हिस्सा!

इस दिशा में महाराष्ट्र ने यूनिवर्सिटी ऑफ बर्कले, एमआईटी और कई अन्य वैश्विक संस्थानों के साथ समझौते किए हैं, जिनका उद्देश्य ज्ञान साझा करना, अत्याधुनिक तकनीक लाना और आधुनिक प्रक्रियाओं को लागू करना है. मेडटेक पर आयोजित सत्र में दुनिया की अग्रणी कंपनियों ने हिस्सा लिया, जहां महाराष्ट्र में मेडटेक की संभावनाओं, रणनीति और भविष्य की दिशा पर विस्तृत चर्चा हुई. इसके बाद राज्य ने मेडटेक सेक्टर के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी तैयार कर लिया है.

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मेडटेक में निवेश और ट्रेन्ड वर्कफोर्स पर महाराष्ट्र का जोर

स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक की भूमिका पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और महाराष्ट्र में आज सबसे बड़ा स्वास्थ्य खर्च गैर-संचारी और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों पर हो रहा है. संक्रामक बीमारियों के मोर्चे पर भले ही बड़ी सफलता मिली हो, लेकिन डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी बीमारियों पर भारी लागत आ रही है. ऐसे में मेडटेक में निवेश, प्रशिक्षित हेल्थ वर्कफोर्स और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग के जरिए इलाज की लागत को काफी हद तक कम किया जा सकता है और सभी को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच दी जा सकती है. सीटी स्कैन जैसी कई अत्याधुनिक मशीनें अभी भारत में नहीं बनतीं, लेकिन रणनीतिक एमओयू के बाद कंपनियां यहां पार्टनर तलाशकर निवेश और निर्माण की दिशा में आगे बढ़ेंगी.

इसी सत्र में महाराष्ट्र की नई स्मार्ट सिटी-रायगढ़ पेन ग्रोथ सेंटर-की भी औपचारिक लॉन्चिंग की गई. यह ग्रोथ सेंटर नए मुंबई एयरपोर्ट के पास स्थित है और यह पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें निजी क्षेत्र और एमएमआरडीए जैसे सरकारी संस्थान मिलकर मुंबई या नवी मुंबई में एक नया बिजनेस डिस्ट्रिक्ट विकसित कर रहे हैं. फिलहाल यह परियोजना करीब 260 एकड़ क्षेत्र में है, जिसे भविष्य में हजारों एकड़ तक विस्तार देने की योजना है.

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महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा:

"अब हमने मेडटेक में आगे बढ़ने के लिए एक रोडमैप तैयार कर लिया है. हमने अपनी नई स्मार्ट सिटी रायगढ़ पेन ग्रोथ सेंटर की लॉन्चिंग की है. यह रायगढ़ पेन ग्रोथ सेंटर नए मुंबई एयरपोर्ट के पास स्थित है...यह पहली ऐसी साझेदारी है, जिसमें निजी क्षेत्र और MMRDA, यानी सरकारी क्षेत्र, एक साथ मिलकर मुंबई या नवी मुंबई में एक नया बिजनेस डिस्ट्रिक्ट विकसित कर रहे हैं. फिलहाल इसके पास करीब 260 एकड़ जमीन है, लेकिन जल्द ही इसका विस्तार बढ़कर हजारों एकड़ तक होगा." वहीं महाराष्ट्र सरकार के साथ कई विदेशी कंपनियों के MoU साइन करने पर सीएम फडण

"मुझे यह बताते हुए भी खुशी है कि कई विदेशी कंपनियों ने पहले ही इस नई सिटी में निवेश करने में रुचि दिखाई है. यहां कई जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स) होंगे, फिनटेक कंपनियां होंगी और यह एक बेहद समावेशी बिजनेस डिस्ट्रिक्ट होगा. उदाहरण के तौर पर, रिपब्लिक ऑफ कोरिया से हनावा ग्रुप, स्विट्ज़रलैंड से एसएसबी, अमेरिका से अंसर ग्लोबल कॉर्प, फेडएक्स, फिनलैंड से रिवर साइकिल, दुबई से एमएमजीएसए, सिंगापुर से स्पेस होल्डिंग, मेपल ट्री, जीएनवी इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडोस्पेस पार्क और अमेरिका से ट्राइबेका इन सभी कंपनियों ने आज हमारे इस नए पेन ग्रोथ सेंटर में निवेश करने का फैसला किया है."

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मुख्यमंत्री ने बताया कि कई विदेशी कंपनियों ने पहले ही इस नई सिटी में निवेश के लिए रुचि दिखाई है. रायगढ़ पेन ग्रोथ सेंटर में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), फिनटेक कंपनियां और आधुनिक व्यावसायिक गतिविधियां विकसित होंगी. यह एक समावेशी बिजनेस डिस्ट्रिक्ट होगा, जहां बड़ी संख्या में उच्च वेतन वाली नौकरियां पैदा होंगी. ‘वॉक टू वर्क’ मॉडल पर आधारित इस शहर को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का एक नया और व्यावहारिक उदाहरण माना जा रहा है.

दक्षिण कोरिया के हनावा ग्रुप, स्विट्ज़रलैंड की एसएसबी, अमेरिका की अंसर ग्लोबल कॉर्प और फेडएक्स, फिनलैंड की रिवर साइकिल, दुबई की एमएमजीएसए, सिंगापुर की स्पेस होल्डिंग, मेपल ट्री, जीएनवी इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडोस्पेस पार्क और अमेरिका की ट्राइबेका जैसी कंपनियां इस ग्रोथ सेंटर में निवेश का फैसला कर चुकी हैं. अब तक जिन एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं, उनका कुल निवेश एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में लाखों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है.

रेयर अर्थ एलिमेंट्स और रणनीतिक खनिजों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में लिथियम रिफाइनरी जैसी परियोजनाएं आ रही हैं और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में भी विदेशी निवेश की मौजूदगी बढ़ रही है. संख्या अभी सीमित है, लेकिन भविष्य में इसमें तेजी आने की संभावना है.

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दावोस में कई मुद्दों पर चर्चा

दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 की 56वीं वार्षिक बैठक के दौरान यह सभी चर्चाएं हुईं, जहां 130 से अधिक देशों के करीब 3,000 नेता, नीति-निर्माता, सीईओ और नवोन्मेषक शामिल हुए. सम्मेलन की थीम “संवाद की भावना” रखी गई है, जिसमें सामूहिक और साहसिक वैश्विक कदमों पर जोर दिया गया.

इसी मंच से भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में से एक के रूप में पेश किया गया. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने वैश्विक निवेशकों से भारत के स्वच्छ ऊर्जा विस्तार में साझेदारी का आह्वान किया. मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी कहा कि अमेरिका सहित किसी भी देश के साथ होने वाले द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते महाराष्ट्र जैसे राज्य के लिए फायदेमंद होते हैं, क्योंकि महाराष्ट्र भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख ग्रोथ इंजन रहा है. 

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अंत में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार केवल एमओयू की राशि पर नहीं, बल्कि इस बात पर फोकस कर रही है कि किन क्षेत्रों में निवेश आ रहा है, कैसे ज्ञान और तकनीक का हस्तांतरण हो रहा है और एफडीआई के जरिए महाराष्ट्र को दीर्घकालिक और टिकाऊ लाभ कैसे मिल सकता है.

महाराष्ट्र में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, स्टील, नवीकरणीय ऊर्जा, आईटी-आईटीईएस, डेटा सेंटर, शहरी परिवहन और सतत औद्योगिक विकास जैसे सेक्टर में निवेश के लिए समझौते हुए हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावोस में अलग-अलग कारोबारियों से भी मुलाकात की. मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी जानकारी दी कि दावोस में डब्लूईएफ में अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के हेड और एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य जेफ मेरिट के साथ सीएम देवेंद्र फडणवीस ने चर्चा की, जिसमें ग्लोबल इंडस्ट्रियल बदलावों और भविष्य में एंटरप्राइज डेवलपमेंट में सस्टेनेबल इनोवेशन की भूमिका पर चर्चा शामिल थी. 

किस-किस से हुई सीएम फडणवीस की मुलाकात?

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मुख्यमंत्री ने इंगका ग्रुप (आईकेईए रिटेल) के सीईओ और अध्यक्ष जुवेंसियो मैएज्यु से भी मुलाकात की. उन्होंने महाराष्ट्र में आईकेईए के विस्तार और बड़े पैमाने पर निवेश को लेकर चर्चा की. फडणवीस ने कहा कि आईकेईए की भारत के लिए योजनाओं के बारे में जानकर अच्छा लगा और उन्होंने महाराष्ट्र में उनके बिजनेस के लिए केंद्र सरकार की ओर से मिले सहयोग के लिए उनका धन्यवाद किया.

मुंबई में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए 20 बिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. गढ़चिरौली और विदर्भ में स्टील सेक्टर के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का समझौता हुआ. पालघर में स्टील सेक्टर के लिए बीएफएन फोर्जिंग्स और महाराष्ट्र सरकार ने 565 करोड़ रुपए की डील की है.

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में महाराष्ट्र सरकार और योकी ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने चार हजार करोड़ रुपए का समझौता किया. इसी तरह मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में आईटी-डेटा सेंटर को लेकर महाराष्ट्र सरकार और लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के बीच एक लाख करोड़ रुपए के एमओयू पर हस्ताक्षर किए.

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मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, देवेंद्र फडणवीस ने डब्लूईएफ शिखर सम्मेलन में कोका-कोला कंपनी के सीवीपी माइकल गोल्ट्जमैन से मिलकर अपनी खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा, "हमने कोका-कोला के विस्तार की इच्छा और महाराष्ट्र के जामनेर जैसे संभावित विकल्पों पर बहुत सकारात्मक चर्चा की. मैंने उन्हें महाराष्ट्र की जीसीसी पॉलिसी, बेहतर क्वालिटी के खाने और महाराष्ट्र में सहयोग के कई अवसरों के बारे में भी बताया."

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