Advertisement

Loading Ad...

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री के रवैये पर भड़के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भरे सदन में लगाई फटकार

बजट सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके को जेब में हाथ डालकर जवाब देने पर टोका. अध्यक्ष ने इसे संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताया, जिसे मंत्री ने स्वीकार करते हुए हाथ जेब से बाहर निकाला.

Screengrab
Loading Ad...

संसद के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. बजट सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने संसदीय मर्यादा और परंपरा पर नई बहस छेड़ दी. इस दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उस समय सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे थे.

ओम बिरला ने सांसद को क्यों टोका?

दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान जब जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके एक सवाल का जवाब देने के लिए खड़े हुए, तब वह जेब में हाथ डालकर बोल रहे थे. मंत्री का जवाब देने का यह तरीकका लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ठीक नहीं लगा. उन्होंने तुरंत मंत्री को टोका और स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन में बोलते समय इस तरह का आचरण संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं है. अध्यक्ष की इस टिप्पणी को मंत्री ने सहजता से स्वीकार किया और अपना हाथ जेब से बाहर निकाला.

Loading Ad...

कांग्रेस सांसद को भी ओम बिरला ने दी नसीहत 

Loading Ad...

ओम बिरला ने सिर्फ मंत्री को ही नहीं, बल्कि कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल को भी साथी सांसदों से बातचीत करने पर रोका. अध्यक्ष ने सदन को यह संदेश दिया कि प्रश्नकाल लोकतंत्र का अहम हिस्सा है और इसमें अनुशासन व गंभीरता बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि प्रश्नकाल के दौरान अधिक से अधिक सवाल पूछे जाएं, ताकि सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित हो सके.

राज्यसभा में भी हुआ ऐसा ही वाक्या 

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

वही, दूसरी तरफ राज्यसभा में भी सत्र की शुरुआत मर्यादा और जिम्मेदारी के संदेश के साथ हुई. राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उच्च सदन के 270वें सत्र की शुरुआत करते हुए सदस्यों से संसदीय मर्यादा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की अपील की. अपने संबोधन में उन्होंने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का उल्लेख किया. राधाकृष्णन ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और ऐसे समय में सांसदों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि संसद में होने वाली चर्चाएं देश की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय करती हैं.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...