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जम्मू-कश्मीर में भारत-रूस के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक जुड़ाव पर चर्चा, एलजी मनोज सिन्हा ने की कलमीकिया प्रमुख से मुलाकात

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कलमीकिया प्रमुख से मुलाकात की, जिसमें भारत और रूस के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर जोर दिया.

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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा रूस के कलमीकिया गणराज्य में एक हफ्ते के दौरे पर हैं. वह भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को एक सप्ताह की प्रदर्शनी के बाद भारत वापस लाने के लिए गए हैं. इस दौरान उन्होंने कलमीकिया के प्रमुख बटू सर्गेयेविच खासिकोव से मुलाकात की, जिससे भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को और मजबूती मिली. कलमीकिया, जहां बौद्ध धर्म मुख्य धर्म है, ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का जोरदार स्वागत किया.

खासिकोव के साथ अहम मुलाकात

शनिवार को एलिस्टा में हुई बैठक में उपराज्यपाल सिन्हा और बटू सर्गेयेविच खासिकोव ने कई अहम मुद्दों पर बात की. सांस्कृतिक सहयोग और आध्यात्मिक रिश्तों पर खास जोर रहा. सिन्हा के दफ्तर ने 'एक्स' पर लिखा, "कलमीकिया के प्रमुख बटू सर्गेयेविच खासिकोव से मुलाकात बहुत अच्छी रही. हमारी बातचीत से कई मुद्दों पर सहमति बनी और भारत-रूस के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को नई ताकत मिली." खासिकोव, जो कलमीकिया के बौद्धों के नेता भी हैं, ने अवशेषों की प्रदर्शनी के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया. यह मुलाकात भारत की बौद्ध विरासत को दुनिया तक पहुंचाने का एक बड़ा कदम है.

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बौद्ध मठ में प्रार्थना और अवशेषों को सम्मान

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सिन्हा ने दिन की शुरुआत एलिस्टा के गेडेन शेडुप चोइकोरलिंग मठ में प्रार्थना के साथ की. वहां उन्होंने भारत से लाए गए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को नमन किया, जो मठ में एक हफ्ते तक प्रदर्शित रहे. सिन्हा ने कहा, "मैंने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को प्रणाम किया. मैं प्रार्थना करता हूं कि बुद्ध हमें आशीर्वाद दें और लोगों के बीच आध्यात्मिक रिश्तों को मजबूत करें." इस दौरान उन्होंने शाजिन लामा, भिक्षुओं और स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की. मठ में हुए समारोह में भारतीय दल ने बौद्ध परंपराओं का सम्मान किया, जो शांति और भाईचारे का संदेश देता है.

पीएम मोदी का आभार

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सिन्हा ने इस खास जिम्मेदारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया. एलिस्टा पहुंचने पर उन्होंने कहा, "मैं पीएम मोदी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझे यह पवित्र जिम्मेदारी दी." सिन्हा ने खासिकोव, शाजिन लामा और स्थानीय बौद्ध समुदाय से मिलने की उत्सुकता जताई. उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत-रूस के पुराने रिश्तों को और मजबूत करेगा.

कश्मीर की बौद्ध विरासत

कश्मीर लंबे समय से बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र रहा है. हरवान बौद्ध स्थल, जहां चौथा बौद्ध सम्मेलन हुआ था, और उश्कुर के प्राचीन खंडहर इसका सबूत हैं. अखनूर के पास अंबारन का मठ और श्रीनगर के पास परिहासपुर का विशाल मठ (जिसे राजा ललितादित्य ने बनवाया था) कश्मीर की बौद्ध विरासत को दर्शाते हैं.

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ये स्थान बौद्ध शिक्षा और धर्म के प्रसार के लिए मशहूर थे. यह दौरा कश्मीर की इस विरासत को कलमीकिया जैसे क्षेत्रों से जोड़ता है, जहां लोग महायान बौद्ध धर्म का पालन करते हैं.इस यात्रा से न सिर्फ बुद्ध के अवशेष भारत लौटेंगे, बल्कि भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक रिश्ते भी और गहरे होंगे. सिन्हा ने एलिस्टा के अमुर-सानान राष्ट्रीय पुस्तकालय में बौद्ध धर्म पर किताबें भी दान कीं. यह दौरा शांति और सद्भाव के बौद्ध संदेश को और मजबूत करता है.

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