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लेबनान के राजदूत ने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए हिजबुल्लाह का किया बचाव, कह दी इतनी बड़ी बात

हाल ही में भारत में लेबनान के राजदूत रबी नर्श ने एक साक्षात्कार में महात्मा गांधी के कथन का हवाला देते हुए हिजबुल्लाह को एक वैध राजनीतिक दल बताया। उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह का खत्म होना संभव नहीं है, क्योंकि यह लेबनान की राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसे जनता का समर्थन प्राप्त है।

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हाल ही में भारत में लेबनान के राजदूत रबी नर्श ने हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह के उत्तराधिकारियों पर इजरायली हमले के बाद बयान जारी किया। उन्होंने महात्मा गांधी के उद्धरण का हवाला देते हुए कहा कि "आप एक क्रांतिकारी को मार सकते हैं, लेकिन क्रांति को नहीं।" उनका तात्पर्य था कि हिजबुल्लाह एक वैध राजनीतिक दल है जिसे केवल नेताओं को मारकर खत्म नहीं किया जा सकता। राजदूत ने यह भी बताया कि हिजबुल्लाह की जड़ें लेबनान की राजनीतिक व्यवस्था में हैं, और इसे जनता का समर्थन प्राप्त है।

इजरायल और हिजबुल्लाह का संघर्ष

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में कहा था कि उनकी सेना ने हिजबुल्लाह के नेताओं को निशाना बनाकर मार गिराया है। इसके जवाब में, लेबनान के राजदूत ने कहा कि इजरायल की यह कार्रवाई मानवीय संकट पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में 2,100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, 11,000 घायल हुए हैं, और लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं।

भारत से मदद की अपील

इस दौरान लेबनान के राजदूत ने भारत से मानवीय सहायता की अपील की। वे वर्तमान में भारत से दवाइयां और चिकित्सा उपकरण मंगवाने की योजना बना रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के पालन के लिए इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने की अपील की।

नेतन्याहू की आलोचना

राजदूत ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को नियंत्रण से बाहर बताया और कहा कि उनकी नीतियां विनाशकारी हैं। उन्होंने कहा कि किसी को उन्हें रोकना होगा, क्योंकि उनकी कार्रवाईयां पूरे क्षेत्र के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।
वैसे आपको बता दें कि हिजबुल्लाह की स्थापना 1985 में इजरायली आक्रमण के खिलाफ विरोध करने के लिए हुई थी। यह एक राजनीतिक दल है जिसका लेबनान के मंत्रिमंडल और संसद दोनों में प्रतिनिधित्व है। हिजबुल्लाह के पास एक सशस्त्र शाखा भी है, जिसका उपयोग इजरायल के खिलाफ संघर्ष में किया जाता है।

राजदूत रबी नर्श का यह बयान हिजबुल्लाह के प्रति जनता के समर्थन और उसके वैध राजनीतिक अस्तित्व को रेखांकित करता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केवल नेताओं को मारकर इस आंदोलन को खत्म नहीं किया जा सकता। लेबनान की वर्तमान स्थिति गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रही है, और इस संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।

और इन सबके बीच भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है कि वह अपनी कूटनीतिक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए इस संघर्ष में मध्यस्थता करे और शांति स्थापना के प्रयासों में योगदान दे।
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