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दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी को मिला नया ठिकाना, छोड़ना पड़ेगा मथुरा रोड वाला बंगला
आतिशी को लोक निर्माण विभाग ने अधिकारिक तौर पर अंसारी रोड स्थित बंगला नंबर 115 आवंटित किया गया है। इसके साथ ही इस बंगले में ज़रूरी मरम्मत और नवीनीकरण के लिए विभागने 39 लाख रुपए की निविदा भी जारी कर दी है।
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी का पता अब बहुत जल्द बदलने वाला है। आतिशी को लोक निर्माण विभाग ने अधिकारिक तौर पर अंसारी रोड स्थित बंगला नंबर 115 आवंटित किया गया है। इसके साथ ही इस बंगले में ज़रूरी मरम्मत और नवीनीकरण के लिए विभागने 39 लाख रुपए की निविदा भी जारी कर दी है।
बंगले में होंगे कुछ अहम बदलाव
दिल्ली की मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष आतिशी को आवंटित हुए बंगले में किसी प्रकार की कोई कमी न रहे इसको लेकर लोक निर्माण विभाग ने पूरा ध्यान रखा है। विभाग से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक "इस बंगले में कुछ ज़रूरी काम होने है जिसकी विभागीय स्वीकृति मिल चुकी है। यह बंगला लगभग एक साल से ख़ाली पड़ा था। इसलिए इसके रसोई, टाइल बदलने, जल निकासी और कुछ ज़रूरी काम है। जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।" इससे पहले आतिशी मथुरा रोड स्थित एबी-17 बंगले में रहती थी। इस बंगले में कई वर्षों तक दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी रह चुके है। इसी बंगले को लेकर आतिशी ने अनुरोध किया था कि यह बंगला उनके पास ही रहने दे। लेकिन विभाग ने उनकी अनुरोध को दरकिनार करते हुए उन्हें अंसारी रोड पर नया बंगला आवंटित कर दिया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को नहीं मिला बंगला
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी के लिए लोक निर्माण विभाग में नया ठिकाना भले ही ढूँढ लिया हो लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के लिए अभी तक कोई आधिकारिक बंगला आवंटित नहीं किया गया है। दरअसल, विभाग सचिवालय से निकटता को मद्देनजर रखते हुए आईटीओ के पास ख़ासतौर पर लुटियंस जोन में बंगला तलाश रही है। ताकि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सचिवालय पहुँचने से लेकर अन्य जगहों पर पहुंचने में समय की बचत हो।
गौरतलब है कि दिल्ली की सत्ता में 27 वर्षों बाद बीजेपी की वापसी हुई है। बीजेपी ने हाल में हुए विधानसभा चुनाव में एक दशक से सत्ता में राज कर रही आम आदमी पार्टी को बुरी तरह हराया था। चुनाव के नतीजों पर अगर नजर डालें तो बीजेपी को प्रचंड बहुमत के साथ 48 सीट जबकि सत्तारूढ़ रही आम आदमी पार्टी को महज 22 और कांग्रेस ने अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराते हुए शून्य पर सिमट कर रह गई थी। सत्ता में वापसी के बाद बीजेपी ने दिल्ली चलाने की ज़िम्मेदारी लंबे मंथन के बाद रेखा गुप्ता को सौंपी।
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