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नई एयरलाइन की लॉन्चिंग, डुओपॉली पर प्रहार...इंडिगो जैसी कंपनियों की ऐसे होगी दादागिरी खत्म, सरकार का बड़ा ऐलान

केंद्र सरकार इंडिगो संकट से निपटने, विमानन क्षेत्र सहित हर सेक्टर में डुओपॉली जैसी समस्या और दादागिरी को खत्म करने के लिए बड़े कदम उठा रही है. अचानक आई समस्या ने सरकार को युद्ध स्तर पर कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया है. केंद्रीय मंत्री नायडू के संसद में दिए बयान से संकेत मिल रहे हैं कि देश में जल्द बड़े पैमाने पर नई एयरलाइन शुरू की जाएगी.

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मोदी सरकार इंडिगो संकट से निपटने और इस तरह की समस्याओं को वन्स फॉर ऑल डील करने के मूड में आ गई है. नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद में कहा कि सरकार इस मुद्दे को काफी गंभीरता से ले रही है. फिलहाल इसकी जांच चल रही है और निष्कर्ष आने पर हम कड़ा एक्शन लेंगे, जो अन्य एयरलाइंस के लिए मिसाल बनेगा. उन्होंने बताया कि यह स्थिति इंडिगो के इंटरनल ऑपरेशन में समस्या के कारण पैदा हुई है, जिसमें क्रू का रोस्टरिंग सिस्टम और आंतरिक योजना शामिल हैं.

केंद्रीय मंत्री ने इंडिगो संकट पर संसद में क्या कहा?

हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सरकार ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम सभी पक्षकारों से बातचीत करके लागू किए हैं. अप्रैल में उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के तहत इन्हें लागू किया गया. कुल 22 एफडीटीएल नियम थे, जिनमें से 15 एक जुलाई से और बाकी सात एक नवंबर से लागू हुए हैं. तब से डीजीसीए एफडीटीएल नियमों पर सभी एयरलाइनों से लगातार बातचीत कर रहा था. इसे लेकर एक दिसंबर को इंडिगो के साथ भी चर्चा हुई थी, क्योंकि वे नियमों पर कुछ स्पष्टीकरण चाहते थे, लेकिन इस दौरान उन्होंने किसी समस्या का जिक्र नहीं किया और हर चीज सामान्य बताई.

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वहीं उड्डयन मंत्री ने स्थिति का व्यापक आकलन करने के लिए सोमवार रात सभी वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई थी. इस पर उन्होंने कहा कि इंडिगो के परिचालन में व्यवधान के कारण उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए 3 दिसंबर से सभी हवाई अड्डों पर स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं.

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कहां बिगड़ी स्थिति?

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि इंडिगो के भीतर फ्लाइट क्रू के आंतरिक रोस्टर और ड्यूटी शेड्यूलिंग में गंभीर गड़बड़ी हुई, जिसने पूरे नेटवर्क में चेन-रिएक्शन पैदा कर दिया. इसके अलावा शीतकालीन शेड्यूल, खराब मौसम, तकनीकी खामियों और एयर ट्रैफिक कंजेशन से हालात और बिगड़ गए.

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ऐसे खत्म होगी इंडिगो की मनमानी!

इतना ही नहीं, केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने संकेत दिया कि सरकार विमानन क्षेत्र में एक ही कंपनी की मोनोपॉली खत्म करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी नीतियां बनाने जा रही है और पॉलिसी लेवल पर ऐसे प्रयास कर रही है कि भारत में और एयरलाइंस शुरू हों और ऑपरेट करें. अगर ऐसा होता है तो डुओपॉली पर लगाम लगेगी और प्राइस कंट्रोल की क्षमता भी नियंत्रित की जा सकेगी. उन्होंने साफ कहा कि ज्यादा एयरलाइंस होंगी तो यात्रियों के पास अधिक फ्लाइंग ऑप्शन होंगे, बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे कीमतों और सुविधाओं—दोनों में सुधार आएगा.

इंडिगो के CEO और COO तलब

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इसी बीच केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कथित तौर पर इंडिगो मैनेजमेंट को इस पूरे संकट के लिए जिम्मेदार माना है. इसी को देखते हुए मंत्रालय द्वारा गठित ‘फैक्ट फाइंडिंग कमेटी’ ने कंपनी के सीईओ (CEO) पीटर एल्बर्स और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) को तलब कर लिया है. सूत्रों का कहना है कि सरकार का मानना है कि एयरलाइन ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया और चीजों को हल्के में लेने की गलती की. जांच पूरी होने पर एयरक्राफ्ट एक्ट और रूल्स के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया, “सुरक्षा पूरी तरह नॉन-नेगोसिएबल है.”

हवाई अड्डों पर स्थिति केंद्र के नियंत्रण में

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उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही 3 दिसंबर को यह समस्या सामने आई, मंत्रालय ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए. हमने हवाई अड्डों पर स्थिति अपने नियंत्रण में ले ली है. सभी पक्षकारों से परामर्श किया गया और आपने देखा होगा कि उन दो दिनों में हालात कैसे बदले. हालांकि यात्रियों को इस दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

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