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केजरीवाल ने अचानक नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को लिखी चिट्ठी, जानिए क्या है वजह ?
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस से एक क़दम आगे चलते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने बाबा साहेब को नेता नहीं बल्कि इस देश की आत्मा बताया है।
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देश में कई हिस्सों में ठंड लगातार बढ़ती जा रही है तो वही दूसरी तरफ़ संसद के शीतकालीन सत्र की निकली रही बातों ने देश की राजनीतिक तापमान में गर्माहट ला दी है। राज्यसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संविधान पर चर्चा के दौरान बाबा साहेब आंबेडकर पर दिए गए बयान को विपक्षी पार्टियों ने मुद्दा बना लिया है। इस बयान के बाद जो सियासी बवाल चाल रहा है उसके कई मायने भी निकाले जा रहे है। इस मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस शाह पर हमलवार है तो वही अब अन्य विपक्षी दलों ने भी से बड़ा मुद्दा बनाते हुए अपनी-अपनी चाल चलना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस से एक क़दम आगे चलते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने बाबा साहेब को नेता नहीं बल्कि इस देश की आत्मा बताया है।
दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार के पास इस समय ख़ुद की पार्टी के बल पर पूर्ण बहुमत नहीं है। मोदी सरकार अपने सहयोगी दल जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू के भरोसे चाल रही है। ऐसे में जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सदन के अंदर बाबा साहेब को लेकर अपनी बातें रखी तो विपक्ष को बीजेपी को घेरने के लिए एक बड़ा मौक़ा मिल गया। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टी के सांसद इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन कर रहे है तो वही अब आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू को चिट्ठी लिखकर सबको चौंका दिया है। केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा, "हाल ही में संसद में देश के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बाबा साहेब के नाम पर की गई टिप्पणी ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. उनका यह कहना कि 'अम्बेडकर-अम्बेडकर बोलना आजकल फैशन बन गया है' न केवल अपमानजनक है बल्कि बीजेपी की बाबा साहेब और हमारे संविधान के प्रति सोच को उजागर करता है।"
बीजपी ने ऐसा साहस कैसे जुटाया
चिट्ठी में केजरीवाल ने आगे लिखा, "बाबा साहेब अम्बेडकर, जिन्हें कोलंबिया विश्वविद्यालय ने "Doctor of Laws" से सम्मानित किया था, जिन्होंने भारत के संविधान को रचा और समाज के सबसे वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने का सपना देखा, उनके बारे में ऐसा कहने का साहस आखिर बीजेपी ने कैसे किया? इस से देश भर में करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं. ये बयान देने के बाद अमित शाह ने माफी मांगने की बजाय अपने बयान को उचित ठहराया."
बाबा साहेब नेता नहीं बल्कि देश की आत्मा है
केजरीवाल ने पत्र के माध्यम से कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक रूप से अमित शाह के बयान का समर्थन किया। इसने जले पर नमक छिड़कने का काम किया। लोगों को लगने लगा है कि बाबा साहेब को चाहने वाले अब बीजेपी का समर्थन नहीं कर सकते। बाबा साहेब सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि हमारे देश की आत्मा हैं।बीजेपी के इस बयान के बाद लोग चाहते हैं कि इस मसले पर आप भी गहराई से विचार करें।"
ग़ौरतलब है कि सदन में केंद्रीय गृहमंत्री शाह आज़ाद भारत के पहली सरकार को लेकर चर्चा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट से बीआर आंबेडकर के इस्तीफे का जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस से इशारों इशारों में पूछा आख़िर संविधान के निर्माता को कैबिनेट से इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ा था। इसी के बाद उन्होंने यह भी कह दिया की "अभी एक फैशन हो गया है- आंबेडकर, आंबेडकर., इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।’’
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