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सरकार की हुई किरकिरी तो नींद से जागे CM सिद्धारमैया, उद्योगपति से मांग लिया उधार का रोड, निकाला अनोखा तोड़

बेंगलुरु में ट्रैफिक प्रॉब्लम और गड्डे MNCs का सिर दर्द बन गए हैं. नौबत यहां तक आ गई है कि एक दिग्गज कंपनी ने तो बेंगलुरु से बोरिया बिस्तर समेटने का ऐलान कर दिया. इस पर सिद्धारमैया सरकार की किरकिरी हुई तो वह नींद से जागी. उन्होंने दिग्गज कंपनी के फाउंडर को लेटर लिखकर उधार का रोड मांग लिया है.

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हाईटेक ऑफिस, अच्छी जॉब, अट्रैक्टिव सैलेरी, लेकिन ये अच्छी नौकरी कीमत मांगती है और बेंगलुरु में काम करने वाले लोग तो इसकी कुछ ज्यादा ही बड़ी कीमत चुकाते हैं. यहां ऑफिस कर्मचारी अपना टाइम या तो काम को दे रहे हैं या ट्रैफिक से जूझते हुए निकाल देते हैं. जहां आधे घंटे में पहुंचा जा सकता है उसके लिए 90 मिनट का समय देना पड़ा रहा है यानी 40 मिनट ज्यादा. लोगों की इसी परेशानी को देखते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ट्रैफिक का तोड़ निकाला है. 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने बेंगलुरु में ट्रैफिक कम करने के लिए उद्योगपति और WIPRO के फाउंडर अजीम प्रेमजी से मदद मांगी है. उन्होंने अजीम प्रेमजी से एक रोड मांग लिया है. CM सिद्धारमैया ने दिग्गज उद्योगपति को एक लेटर लिखा. लेटर में लिखा कि, बेंगलुरु में ट्रैफिक को कम करने के लिए अजीम प्रेमजी WIPRO कैंपस में सीमित वाहनों के आने-जाने की इजाजत दें. 

सिद्धारमैया ने WIPRO फाउंडर को लेटर में क्या लिखा? 

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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 19 सितंबर को अजीम प्रेमजी को ये लेटर लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा कि, ट्रैफिक और अर्बन मोबिलिटी एक्सपर्ट्स के प्रारंभिक आकलन से ऐसे संकेत मिले हैं कि इस उपाय से आउटर रिंग रोड के आसपास भीड़भाड़ को लगभग 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है, खासकर तब जब सड़कों पर ऑफिस जाने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा होती है.

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'पीक ऑफिस आवर्स' के दौरान ट्रैफिक पर बुरा असर पड़ता है. इसके कारण आवाजाही और प्रोडक्टिविटी में बाधा पड़ती है. साथ ही इससे शहरी जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है. इसको कम करने के लिए WIPRO की मदद को महत्वपूर्ण बताते हुए सीएम ने लिखा, इस पहल से यातायात की दिक्कतें कम होंगी, यात्रियों के अनुभव बेहतर हो सकेंगे, रहने योग्य बेंगलुरु और भी ज्यादा बेहतर बनेगा.

मुख्यमंत्री ने अजीम प्रेमजी से गुहार लगाई कि, वो सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर इस पर एक प्लान तैयार करें. उन्होंने लिखा, ‘मैं बहुत आभारी रहूंगा अगर आपकी टीम हमारे अधिकारियों के साथ मिलकर जल्द से जल्द प्लानिंग करें’. 

ट्रैफिक के चलते इस कंपनी ने छोड़ा बेंगलुरु 

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मल्टीनेशनल कंपनियों के फेवरेट बेंगलुरु की ट्रैफिक प्रॉब्लम हर साल भीषण होती जा रही है. आलम ये है कि कंपनियां इस महानगर से किनारा कर रही हैं. हाल ही में ऑनलाइन ट्रैकिंग और लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी फर्म ब्लैकबक ने बेंगलुरु छोड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने इसकी वजह सड़कों की खराब हालत और ट्रैफिक को बताया.

राजेश याबाजी ने लिखा, वो सड़कों की खराब हालत के कारण बेलंदूर स्थित अपना ऑफिस खाली कर कर रहे हैं. आउटर रिंग रोड पिछले 9 सालों से हमारा ऑफिस और घर रहा है, लेकिन अब यहां काम जारी रखना बहुत मुश्किल हो गया है. हमने यहां से जाने का फैसला किया है. मेरे सहकर्मियों का आने-जाने का समय औसत डेढ़ घंटे (एक तरफ से) तक बढ़ गया है. सड़कें गड्ढों और धूल से भरी हैं, और उन्हें ठीक करवाने की कोई खास इच्छा नहीं दिखती है. साथ ही अगले 5 सालों तक इसमें कोई बदलाव होता नहीं दिख रहा.

राजेश याबाजी के इस पोस्ट के बाद कर्नाटक सरकार सवालों के घेरे में आ गई. जब कोई कंपनी अपना जमा जमाया बिजनेस किसी शहर से समेटने पर मजबूर हो जाए तो अंदाजा लगाना आसान है बेंगलुरु में ट्रैफिक की समस्या कितनी गंभीर है और सरकार का रवैया कितना सुस्त. 

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गड्ढों पर सरकार की किरकिरी के बाद क्या कदम उठाया गया?

माना जा रहा है बेंगलुरु के बाद ब्लैकबक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में अपना ऑफिस खोल सकती है. ये देख कर्नाटक सरकार नींद से जागी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सड़कों के गड्डों को भरने के आदेश दिए. उन्होंने नवंबर तक की डेडलाइन दे दी है. 

डीके शिवकुमार ने X पर लिखा कि, सरकार लंबे समय से चली आ रही नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है. ठेकेदारों को समस्या के समाधान के लिए नवंबर तक गड्ढे भरने की अंतिम समय सीमा दी गई है. स्वच्छ बेंगलुरु और सुगम यातायात हमारा लक्ष्य है, इसलिए GBA जल्द से जल्द गड्ढों की समस्या से लोगों को राहत देगा.

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इसके तहत सड़कों पर डामर बिछाने का काम शुरु कर दिया गया. इसके साथ ही 694 करोड़ रुपये की लागत से 349 किलोमीटर लंबी 182 सड़कों पर डामर बिछाया जा रहा है. 

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