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कर्नाटक में बुलडोजर चलाकर फंसी कांग्रेस! दिल्ली से लगी फटकार, घबराए डीके शिवकुमार करेंगे इंतजाम?

कर्नाटक में अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला तो कांग्रेस में हड़कंप मच गया. दिल्ली से बेंगलुरु तक फोन घनघनाने लगे. नाराज आलाकमान ने सिद्धारमैया सरकार को सख्त मैसेज भेजा है.

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Bengaluru Kogilu Demolition: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अवैध निर्माण पर बुलडोजर एक्शन ने दिल्ली तक कांग्रेस की नींद उड़ा दी है. इस डिमोलिशन ड्राइव ने कांग्रेस के अंदरखाने मतभेद को सामने ला दिया. अभी तक कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार लेफ्ट सरकार के निशाने पर थी लेकिन अब तो आलाकमान ने भी नसीहत भेज दी है. 

दरअसल, 22 दिसंबर की सुबह बेंगलुरु के कोगिलु गांव के कई घरों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की गई थी. सरकार का तर्क था कि यहां अवैध रूप से बस्तियां बसाई जा रही थी. लैंड माफिया जमीन को कब्जा रहे थे. ऐसे में सरकार ने फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट के इलाके में कई घरों को बुलडोजर से तोड़ दिया. बताया जा रहा है इस कार्रवाई से 400 मुस्लिम परिवार बेघर हो गए. उधर ये तोड़फोड़ पार्टी में भी फूट की वजह बन गई. 

सिद्धारमैया सरकार को आलाकमान की दो टूक

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बताया जा रहा है सिद्धारमैया सरकार के इस एक्शन से दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान नाराज है. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस मुद्दे पर बात की है. उन्होंने कोगिलू गांव से लोगों को हटाने पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा, इस तरह के कदमों में कहीं ज्यादा सावधानी, संवेदनशीलता की जरूरत होती है. उन्होंने साफ कहा कि फैसलों में मानवीय कीमत को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए. 

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केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी इस पूरी कार्रवाई के तरीके को लेकर सहज नहीं है. हालांकि ये भी कहा गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही अब प्रभावित परिवारों से बात करेंगे. उन्होंने आलाकमान को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके पुनर्वास और राहत पहुंचाने की व्यवस्था करेगी. 

विरोध में सड़कों पर उतरे लोग 

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बुलडोजर एक्शन के विरोध में लोग सड़कों पर विरोध में उतर आए हैं. आरोप है कि सरकार ने घरों को तोड़ने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया. लोगों का कहना है कि ठंड में आशियाने छीन लिए गए. अस्थायी शेल्टर होम में रातें बिताने को मजबूर हैं. लोगों का दावा है कि उन्हें यहां रहते हुए 20 साल से ज्यादा का समय हो गया. वहीं, इस कार्रवाई पर केरल की पिनाराई विजयन सरकार और CPI ने भी नाराजगी जताई है. जबकि सरकार का तर्क है कि जिन घरों को तोड़ा गया है वह उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास एक झील के किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे. 

केरल सरकार औैर SDPI ने की निंदा 

कर्नाटक की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने लोगों के साथ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. SDPI ने आरोप लगाया कांग्रेस वही बेदखली की राजनीति अपना रही है, जिसकी वह पहले आलोचना कर रही थी. SDPI ने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि यहां रहने वाले लोग अवैध प्रवासी थे या यह जमीन केवल ठोस कचरा प्रबंधन के लिए आरक्षित थी. पार्टी ने सिद्धारमैया सरकार पर आरोप लगाया कि इस कार्रवाई के दौरान मानवीय पहलू को ताक पर रखा गया. 

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वहीं, ये मामला केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहा. केरल की  पिनाराई विजयन सरकार ने इसे ‘अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति’ बताया. CM पिनाराई विजयन ने कहा, दुख की बात है कि संघ परिवार की अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति अब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत चलाई जा रही है. जब कोई सरकार डर और ज़बरदस्ती से शासन करती है, तो संवैधानिक मूल्य और मानवीय गरिमा सबसे पहले शिकार होती है. 

कर्नाटक सरकार ने बचाव में क्या कहा था? 

बुलडोजर एक्शन को लेकर सवालों में घिरी कांग्रेस सरकार ने बचाव में सफाई दी थी. डिप्टी CM डीके शिवकुमार ने लेफ्ट और केरल सरकार को भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, इस इलाके में लैंड माफियाओं का कब्जा हो रहा था. जबकि यह कचरा डंपिंग साइट है. कुछ लोग सरकारी जमीन को बस्ती बसाने में बदल रहे थे. उन्होंने बुलडोजर को लेकर कहा, कार्रवाई से पहले लोगों को दूसरी जगह पर शिफ्ट होने का समय दिया गया था. हम बुलडोज़र चलाने में विश्वास नहीं करते.

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CM सिद्धारमैया ने प्रभावितों को क्या आश्वासन दिया? 

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) के आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं. कहा गया है, प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जाए. सरकार का दावा है कि कार्रवाई वाली जगह रहने वाले लोगों में ज्यादातर दूसरे राज्यों के लोग थे. हालंकि सरकार ने ये भी माना कि मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए प्रभावितों के रहने के लिए इंतजाम किया जाएगा. 

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