Advertisement
राज्यपाल ने एक लाइन में खत्म किया भाषण… बिफरे कांग्रेस विधायक, रास्ता रोका, कर्नाटक विधानसभा में भारी बवाल
भाषण न पढ़़ने से नाराज कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को घेर लिया. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मार्शलों को बीच में आना पड़ा.
Advertisement
कर्नाटक विधानसभा में उस वक्त हंगामा मच गया. जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत भाषण पढ़े बिना ही विधानसभा से निकल गए. जिस पर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के अंदर ही जमकर बवाल काटा. दरअसल, सत्र की शुरुआत से पहले राज्यपाल थावरचंद गहलोत का अभिभाषण होना था, लेकिन उन्होंने भाषण की पहली और आखिरी लाइन पढ़ी और वहां से निकल गए.
बताया जा रहा है ये भाषण कांग्रेस सरकार की ओर से ही लिखकर दिया गया था. राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने विधानसभा के संयुक्त सत्र में अपने अभिभाषण की पहली और आखिरी पंक्ति पढ़ी और बाहर निकल गए. इस दौरान कांग्रेस विधायक बीके हरिप्रसाद ने उन्हें दरवाजे पर रोकने की कोशिश की और पूरा भाषण पढ़ने के लिए कहा लेकिन राज्यपाल ने कांग्रेस का पारंपरिक भाषण पढ़ने से साफ इंकार कर दिया. इसके बाद कांग्रेस ने थावरचंद गहलोत पर आरोप लगाया कि वह BJP दफ्तर के इशारे पर काम कर रहे हैं.
राज्यपाल और सरकार के बीच तनाव और बढ़ा!
Advertisement
इस घटनाक्रम ने राज्यपाल और सत्ताधारी सिद्धारमैया सरकार के बीच पहले से चले आ रहे तनाव को और बढ़़ा दिया है. अभिभाषण के दौरान उन्होंने भाषण की एक-दो पंक्ति पढ़ीं और जय हिंद, जय कर्नाटक के साथ खत्म कर दिया. अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा, सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक विकास सुनिश्चित करने के लिए उनकी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है. 'जय हिंद' और 'जय कर्नाटक’ राज्यपाल के बेहद छोटे भाषण के बाद कांग्रेस बिफर गई और विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया. जबकि BJP विधायकों ने राज्यपाल के समर्थन में भारत माता की जय के नारे लगाए. हालात इतने बिगड़ गए कि मार्शलों को बीच में आना पड़ा. उन्होंने विधायकों को हटाया और राज्यपाल के बाहर जाने का रास्ता साफ किया.
Advertisement
सदन में इन मुद्दों पर होनी थी चर्चा
दरअसल, सिद्धारमैया सरकार ने कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिए संयुक्त सत्र बुलाया था. इनमें जिनमें MNREGA और ग्राम विकास अधिनियम पर विशेष तौर पर चर्चा शामिल थी. जिसमें राज्यपाल थावरचंद गहलोत का अभिभाषण भी शामिल था.
Advertisement
परंपरा है कि, राज्यपाल सत्र के पहले दिन अभिभाषण देते हैं. लेकिन माना गया कि भाषण के कुछ अंशों से राज्यपाल को ऐतराज था. कर्नाटक सरकार ने ‘आर्थिक दमन’ करने और रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने का आरोप लगाया गया था. राज्यपाल ने न तो इन मुद्दों पर चर्चा की और न ही भाषण पढ़ा.
भाषण के कुछ हिस्से हटाने की बात
यह भी पढ़ें
बताया जा रहा है राज्यपाल ने कांग्रेस की ओर से तैयार पारंपरिक भाषण के कुछ अंशों को हटाने के लिए कहा था. इनमें 11 पैराग्राफ शामिल हैं. जिन पर उन्होंने आपत्ति जताई थी. इनमें केंद्र सरकार की नीतियों, MGNREGA, विकसित भारत, रोजगार गारंटी, जैसे मुद्दे शामिल थे. पहले से ही राज्यपाल और शासन के बीच कर्नाटक की सियासत का ऊंट इस विवाद के बाद किस करवट बैठेगा वक्त बताएगा, लेकिन इस घटनाक्रम ने कर्नाटक की राजनीति को केंद्र तक ऊबाल में ला दिया.