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जेएनयू नारेबाजी पर कपिल मिश्रा का हमला, AAP और वामपंथी संगठनों को ठहराया जिम्मेदार
कपिल मिश्रा ने कहा था कि पूरे देश ने देखा है कि किस तरह से दिल्ली दंगे में शामिल आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण दिया गया और किस तरह से वकीलों की एक बड़ी जमात उनके पक्ष में खड़ी कर दी गई.
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में नारेबाजी को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी और वामपंथी संगठनों पर हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर उन्होंने कहा कि जेएनयू में नक्सलियों, आतंकियों और दंगाइयों के समर्थन में नारे लगाने वाले लोग हताशा में हैं. क्योंकि नक्सलियों का खात्मा हो रहा है, आतंकियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है और दंगाइयों की पहचान अदालत कर चुकी है.
जेएनयू में नारेबाजी पर कपिल मिश्रा का हमला
कपिल मिश्रा ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "सांपों के फन कुचले जा रहे हैं, सपोले बिलबिला रहे हैं. जेएनयू में नक्सलियों, आतंकियों, और दंगाइयों के समर्थन में भद्दे नारे लगाने वाले हताश हैं क्योंकि नक्सली खत्म किए जा रहे हैं, आतंकी निपटाए जा रहे हैं, और दंगाइयों को कोर्ट पहचान चुका है."
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एक अन्य 'एक्स' पोस्ट में कपिल मिश्रा ने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि नक्सली भी मरेंगे और आतंकी भी मारे जाएंगे. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ जेएनयू में की जा रही नारेबाजी से कुछ हासिल होने वाला नहीं है.
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जेएनयू में हुई प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ नारेबाजी
जेएनयू परिसर में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि कुछ लोग देश, धर्म और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ नारे लगाते हैं.
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उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग अफजल गुरु, आतंकियों और नक्सलियों के समर्थन में आवाज उठाते रहे हैं. नक्सलियों और आतंकियों का सफाया किया जा रहा है और दिल्ली में हिंसा फैलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है, इसलिए यह सब उनकी हताशा का नतीजा है.
कपिल मिश्रा ने वामपंथी संगठनों और AAP पर साधा निशाना
इससे पहले सोमवार को भी कपिल मिश्रा ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामले पर बयान दिया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने पर कहा था कि यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि दिल्ली दंगे एक सोची-समझी साजिश थे.
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कपिल मिश्रा ने कहा था कि पूरे देश ने देखा है कि किस तरह से दिल्ली दंगे में शामिल आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण दिया गया और किस तरह से वकीलों की एक बड़ी जमात उनके पक्ष में खड़ी कर दी गई. ये लोग इन आरोपियों को बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत पर रोक लगा दी.