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'इमरजेंसी' के प्रमोशन में कंगना का दोहरा रुख, प्रियंका पर प्यार, राहुल पर प्रहार

बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत अपनी नई फिल्म ‘इमरजेंसी’ के प्रमोशन के दौरान एक बार फिर चर्चा में हैं। फिल्म इंदिरा गांधी के आपातकालीन शासन पर आधारित है और इसमें कंगना ने इंदिरा गांधी का किरदार निभाया है।

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बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्री और भाजपा समर्थक कंगना रनौत एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘इमरजेंसी’ के प्रमोशन के दौरान उन्होंने कांग्रेस नेताओं प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को न्योता देकर नए विवाद को जन्म दिया है। खास बात यह है कि जहां कंगना प्रियंका गांधी की तारीफों के पुल बांधती नजर आईं, वहीं उन्होंने राहुल गांधी को शिष्टाचारहीन कहकर उनकी आलोचना की है। इस विरोधाभासी रवैये ने राजनीतिक और फिल्मी हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

कंगना रनौत की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘इमरजेंसी’ भारत के राजनीतिक इतिहास के सबसे विवादास्पद अध्याय 1975 से 1977 तक की आपातकाल अवधि पर आधारित है। इसमें कंगना ने न केवल निर्देशन किया है, बल्कि इंदिरा गांधी की भूमिका भी निभाई है। फिल्म में अनुपम खेर, महिमा चौधरी, मिलिंद सोमन, श्रेयस तलपड़े और दिवंगत सतीश कौशिक जैसे कलाकार अहम किरदारों में हैं।

फिल्म को प्रमोट करने के लिए कंगना ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को आमंत्रित किया। जहां उन्होंने प्रियंका के साथ संसद में हुई बातचीत को याद करते हुए उन्हें "विनम्र और समझदार" बताया, वहीं राहुल गांधी को "शिष्टाचारहीन" कहने से भी नहीं चूकीं।
प्रियंका गांधी की तारीफ में कंगना
कंगना ने प्रियंका गांधी के स्वभाव की तारीफ करते हुए कहा, “जब मैं उनसे मिली, तो उन्होंने बहुत विनम्रता से बातचीत की। उनकी मुस्कान और बातचीत का तरीका बेहद प्रभावित करने वाला था। वह निश्चित रूप से अपने भाई से बहुत बेहतर हैं और हमेशा सही बातें करती हैं। उनसे बात करना मुझे अच्छा लगा।” कंगना का यह बयान उनकी फिल्म के संदर्भ में प्रियंका को एक सकारात्मक संदेश देने के रूप में देखा जा सकता है।
राहुल गांधी पर तीखी आलोचना
दूसरी ओर, कंगना ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा, “राहुल गांधी को शिष्टाचार का कोई ज्ञान नहीं है। हालांकि, मैं उन्हें फिल्म देखने का निमंत्रण देती हूं। लेकिन मुझे नहीं लगता कि उनसे किसी प्रकार की सकारात्मक बातचीत की उम्मीद की जा सकती है।” यह कोई पहली बार नहीं है जब कंगना ने राहुल गांधी पर टिप्पणी की है। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के खिलाफ बयान देती रही हैं।
‘इमरजेंसी’ और इसके राजनीतिक मायने
‘इमरजेंसी’ एक ऐसा विषय है, जो भारतीय राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लागू करने को आज भी भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय कहा जाता है। इस दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक, प्रेस की आजादी पर अंकुश और राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी ने देश को झकझोर दिया था।कंगना की इस फिल्म के जरिए इंदिरा गांधी के फैसलों और उनके नतीजों को उजागर करने की कोशिश की गई है। फिल्म न केवल इतिहास के पन्नों को पलटती है, बल्कि वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी कई सवाल उठाती है।

वैसे बात अगर कंगना के दोहरे रवैये की करें तो कंगना के प्रियंका गांधी की तारीफ और राहुल गांधी की आलोचना को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे कंगना की सोची-समझी रणनीति मानते हैं। उनका कहना है कि यह कंगना का तरीका हो सकता है अपनी फिल्म को दोनों पक्षों में चर्चा का विषय बनाने का। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कंगना का यह बयान फूट डालने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। प्रियंका और राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीतियों में भले ही कुछ अंतर हो, लेकिन कंगना के इस रवैये ने उनकी एकजुटता पर सवाल खड़े करने की कोशिश की है।

हालांकि कंगना के इस दोहरे रवैये को लेकर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उनके समर्थक इसे प्रमोशन का हिस्सा मानते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक माहौल को भड़काने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
क्या है ‘इमरजेंसी’ के पीछे की सोच?
कंगना रनौत हमेशा से ही अपनी विवादित टिप्पणियों और साहसिक भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं। 'इमरजेंसी' के जरिए उन्होंने एक बार फिर से भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित अध्याय को परदे पर लाने का प्रयास किया है। फिल्म का ट्रेलर और प्रमोशन इस बात की गवाही देते हैं कि कंगना ने इसे बड़े पैमाने पर और गंभीरता से बनाया है।

कंगना रनौत की ‘इमरजेंसी’ केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति और इतिहास की परतों को खोलने की कोशिश भी है। प्रियंका गांधी की तारीफ और राहुल गांधी की आलोचना उनके प्रमोशन की रणनीति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह चर्चा का विषय जरूर बन गई है। इससे यह साफ है कि कंगना अपनी फिल्म के जरिए दर्शकों को एक मनोरंजक, ज्ञानवर्धक और विवादित अनुभव देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। देखना दिलचस्प होगा कि 'इमरजेंसी' बॉक्स ऑफिस और राजनीतिक चर्चाओं में कितना सफल रहती है।
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