Advertisement

Loading Ad...

PM मोदी का सिर्फ एक फोन कॉल... खत्म कर सकता है ईरान-इजरायल युद्ध, UAE का बड़ा बयान

Israel-Iran War: संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने इस पूरे मामले पर अपना रुख साफ कर दिया है. भारत में यूएई के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने कहा है कि उनका देश इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता.

Image Source: Social Media
Loading Ad...

Middle East War: पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया का इलाका गंभीर तनाव और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है. लगभग दस दिनों से हालात ऐसे हैं कि पूरा क्षेत्र युद्ध के माहौल में दिखाई दे रहा है. इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और अमेरिका के सहयोगी माने जाने वाले खाड़ी देशों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. इस लगातार बढ़ते संघर्ष के कारण क्षेत्र में अस्थिरता और भय का माहौल बन गया है. अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि अभी तक इस युद्ध के खत्म होने की कोई साफ उम्मीद नजर नहीं आ रही है.

UAE का स्पष्ट रुख -  युद्ध से दूरी

इस बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने इस पूरे मामले पर अपना रुख साफ कर दिया है. भारत में यूएई के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने कहा है कि उनका देश इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता. उनका कहना है कि यूएई किसी भी देश को अपनी जमीन का इस्तेमाल युद्ध के लिए लॉन्चिंग पैड के रूप में करने की अनुमति नहीं देगा.
उन्होंने यह भी कहा कि यूएई का इस संघर्ष में शामिल होने का कोई कारण नहीं है और देश की नीति साफ है कि वह इस टकराव से दूर रहेगा. उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में यूएई का सबसे बड़ा लक्ष्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना और हालात को और बिगड़ने से रोकना है.

Loading Ad...

UAE बन सकता है मध्यस्थ

Loading Ad...

हुसैन हसन मिर्ज़ा ने यह भी बताया कि UAE की खास भौगोलिक और कूटनीतिक स्थिति उसे इस विवाद में एक संभावित मध्यस्थ बना सकती है. यूएई के संबंध ईरान और इजरायल दोनों के साथ ठीक माने जाते हैं, इसलिए अगर जरूरत पड़े तो वह दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने में मदद कर सकता है.
उनका मानना है कि युद्ध से किसी को फायदा नहीं होता और अगर बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए तो पूरे क्षेत्र में शांति कायम हो सकती है. यूएई खुद को एक ऐसे देश के रूप में देखता है जो विरोधी पक्षों के बीच संवाद का पुल बन सकता है.

PM मोदी की भूमिका पर भरोसा

Loading Ad...

मिर्ज़ा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव का भी खास तौर पर जिक्र किया. उनका कहना है कि खाड़ी देशों में पीएम मोदी का काफी सम्मान है. सिर्फ राजनीतिक नेताओं के बीच ही नहीं, बल्कि व्यापारिक समुदाय और आम लोगों के बीच भी उनकी छवि सकारात्मक है.
इसी वजह से उनका मानना है कि अगर पीएम मोदी ईरान और इजरायल के नेताओं से सीधे बात करें, तो इसका असर पड़ सकता है. उनके अनुसार, इस समय जब तनाव अपने चरम पर है, तब भरोसेमंद और सम्मानित नेताओं की भूमिका बहुत अहम हो जाती है.

“एक फोन कॉल से खत्म हो सकता है विवाद”

हुसैन हसन मिर्ज़ा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अगर ईरान और इजरायल के अपने समकक्ष नेताओं को सिर्फ एक फोन कॉल करें, तो यह तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है. उनके अनुसार, ऐसी बातचीत से दोनों देशों को शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ने का मौका मिल सकता है.
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि जिस इलाके में यह लड़ाई हो रही है, वह युद्ध का मैदान नहीं बनना चाहिए. उनका कहना है कि क्षेत्र के देशों की जमीन पर दूसरे देश आपस में लड़ाई कर रहे हैं, जो बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है.

Loading Ad...

अभी जारी है संघर्ष

यह भी पढ़ें

फिलहाल ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच टकराव 28 फरवरी से लगातार जारी है.इस संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. कई देशों को डर है कि अगर यह युद्ध और बढ़ा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया और दुनिया की राजनीति तथा अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपील की जा रही है कि सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालें और क्षेत्र में शांति बहाल करें.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...