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'तुम्हें IMF जितनी भीख देता है, उससे दोगुना J&K का बजट है...', UNHRC में भारत ने पाकिस्तान की उधेड़ दीं बखियां

UNHRC में भारत ने पाकिस्तान को उधेड़ कर रख दिया. भारत ने ना सिर्फ पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा की पोल खोली बल्कि उसे उसकी औकात दिखाई कि कैसे भारत में जम्मू और कश्मीर खुशहाल है और उसका डेवलपमेंट बजट पाकिस्तान को IMF से मिलने वाले लोन से दोगुना है.

UNHRC/ Screengrab
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा कर रख दीं. आतंकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर पर प्रोपेगेंडा कर रहा था, झूठ फैला रहा था, लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी. भारत की तेज तर्रार डिप्लोमैट अनुपमा सिंह ने अपने तर्क, फैक्ट्स और जवाब से ऐसा धोया कि वो देखता रह गया. उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान 'ला-ला लैंड' यानी कि सपनों की दुनिया में रह रहा है. अनुपमा ने पाकिस्तान को उसकी असली औकात भी दिखा दी और बता दिया कि भारत का एक अकेला J&K ही पूरे पाकिस्तान पर भारी है. उन्होंने इस दौरान कहा कि जितना उसे IMF से संकट और कंगाली से बचाने के लिए बेलआउट पैकेज मिलता है, उससे ज्यादा या दोगुना तो जम्मू और कश्मीर का डेवलपमेंट बजट है.

भारत ने UNHRC में उधेड़ी पाकिस्तान की बखिया

आपको बता दें कि 25 फरवरी को उच्चस्तरीय सत्र के दौरान ‘राइट टू रिप्लाई’ का प्रयोग करते हुए भारत की प्रतिनिधि अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि OIC ने खुद को एक सदस्य देश के लिए “इको चैंबर” के रूप में इस्तेमाल होने दिया है. अनुपमा सिंह ने आगे दो टूक कहा कि, “हम इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं,” और जोड़ा कि पाकिस्तान का “लगातार प्रोपेगेंडा अब जलन की बू देने लगा है.”

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'J&K भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है, और रहेगा'

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उन्होंने भारत का पुराना और स्पष्ट रुख दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. उन्होंने कहा कि 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय पूरी तरह कानूनी और अपरिवर्तनीय था, जो भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है. सिंह ने कहा, “इस क्षेत्र से जुड़ा एकमात्र लंबित विवाद पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा है,” और इस्लामाबाद से अपने कब्जे वाले इलाकों को खाली करने का आह्वान किया.

परिषद में तीखी टिप्पणी करते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास का जिक्र किया, जिसमें दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल,  चिनाब रेल ब्रिज – का उद्घाटन भी शामिल है. उन्होंने कहा, “अगर पिछले साल जम्मू-कश्मीर में उद्घाटित दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल, चिनाब ब्रिज, फर्जी है, तो पाकिस्तान या तो भ्रम में है या फिर ‘लाला लैंड’ में जी रहा है.”

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'जम्मू और कश्मीर का डेवलपमेंट बजट पाकिस्तान के IMF लोन से ज्यादा'

अनुपमा सिंह ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट “पाकिस्तान द्वारा हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मांगे गए बेलआउट पैकेज से दोगुना से भी ज्यादा” है. उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर में सुशासन और विकास की स्थिति की तुलना पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों से करते हुए रखा.

भारत को उपदेश देना पाकिस्तान को पड़ा भारी!

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लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए सिंह ने कहा कि “उस देश से लोकतंत्र पर उपदेश सुनना मुश्किल है, जहां नागरिक सरकारें शायद ही कभी अपना कार्यकाल पूरा कर पाती हैं.” उन्होंने जम्मू-कश्मीर में हाल के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हुए मतदान प्रतिशत का हवाला देते हुए कहा कि इससे साफ है कि वहां के लोगों ने “आतंकवाद और हिंसा की विचारधारा को खारिज कर दिया है” और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं.

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अपने बयान के अंत में अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर “लगातार राज्य-प्रायोजित आतंकवाद” के जरिए क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से निरंतर प्रगति कर रहा है. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को ऐसे मंचों पर दिखावे की राजनीति करने के बजाय अपने गहराते आंतरिक संकट को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए,” और जोड़ा कि “दुनिया उसकी इस चाल को साफ तौर पर देख सकती है.”

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