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झारखंड की हेमंत सरकार ने चुनाव से पहले चल दिया बड़ा दांव....

अगले महीने यानी कि नवंबर में इन दो राज्यों में चुनाव आयोग चुनाव को करवा सकता है और इसके लिए जल्दी तारीखों का ऐलान होने के साथ-साथ राज्य में चुनावी आचार संहिता को भी प्रभावित कर दिया जाएगा।

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जम्मू कश्मीर और हरियाणा में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब देशभर राजनीतिक दलों की निगाहें महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर है। उम्मीद है कि अगले महीने यानी कि नवंबर में इन दो राज्यों में चुनाव आयोग चुनाव को करवा सकता है और इसके लिए जल्दी तारीखों का ऐलान होने के साथ-साथ राज्य में चुनावी आचार संहिता को भी प्रभावित कर दिया जाएगा। इन सब के बीच आचार संहिता लगने से पहले महाराष्ट्र और झारखंड सरकार एक के बाद एक कैबिनेट की बैठक में ऐसे प्रस्तावों को पारित कर रहे हैं जिसका लाभ उसे चुनाव में मिल सके। अगर बात झारखंड की करें तो, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कैबिनेट के साथ बैठक करते हुए कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने झारखंड मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना की राशि को 1000 से बढ़ाकर 2500 रुपए करने के प्रस्ताव की मंजूरी प्रदान की है।

जनता को लाभ सरकार पर बोझ


हेमंत सरकार के इस फैसले के बाद दिसंबर महीने से लाभार्थी महिलाओं के खाते में ₹2500 की आर्थिक मदद सीधे पहुंचेगी। इस तरह साल भर में 30 हजार रुपए की मदद लाभार्थी महिलाओं को मिलेगी। विधानसभा चुनाव के पहले हेमंत सरकार के इस बड़े फैसले से राज्य सरकार के खजाने पर भी बड़ा भरा पड़ा है। जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के खजाने पर 9000 करोड रुपए का बोझ बढ़ेगा। वही इस फैसले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि मईया सम्मान और सशक्त हुई है। 

पारा शिक्षकों को भी सरकार ने दिया तोहफा


दिवाली से पहले हेमंत सोरेन ने राज्य के 62000 सहायक शिक्षकों को ईपीएफ का तोहफा दिया है। पारा शिक्षकों को लेकर राज्य कैबिनेट ने एक बड़े प्रस्ताव पर अपनी मैहर लगाई है। अब सहायक शिक्षकों के वेतन से हर महीने 1800 रुपए ईपीएफ के काटेंगे वहीं राज्य सरकार अपनी तरफ से 1950 रुपए अलग से देगी। इस तरह राज्य सरकार ने सभी टेट पास, प्रशिक्षित और प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों के 15000 मानदेय के बेस पर ईपीएफ की कटौती होगी। इस तरह देखा जाए तो सहायक शिक्षकों के मानदेय से 12 प्रतिशत जबकि राज्य सरकार की मदद से 13 प्रतिशत ईपीएफ का भुगतान होगा। 

बताते चले कि झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल इन दिनों गर्म है। राज्य सरकार जहां चुनाव से पहले जनता के लाभ के लिए तमाम प्रस्ताव पर मोहर लगा रही है वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टी इसे चुनावी जुमला बताते हुए सरकार पर आरोप लगा रही है। इन सबके बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि चुनाव आयोग द्वारा कभी भी चुनाव किस तारीखों का ऐलान किया जाएगा। इसको लेकर आयोग की टीम ने राज्य का दौरा भी किया है और यहां के राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ चुनाव को लेकर बैठक भी की है।
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