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जम्मू-कश्मीर: किश्तवाड़ में बादल फटने की घटना में मौत का आंकड़ा बढ़कर 60 तक पहुंचा, बचाव और राहत कार्य जारी

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आई भीषण आपदा ने पूरे इलाके को दहला दिया है. अचानक आए क्लाउडबर्स्ट और फ्लैश फ्लड में अब तक 60 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लापता बताए जा रहे हैं. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना लगातार राहत-बचाव कार्य में जुटी हुई है, लेकिन खराब मौसम और मलबे का ढेर रेस्क्यू ऑपरेशन को और कठिन बना रहा है. सवाल यह है कि क्या समय रहते सभी लापता लोगों को बचाया जा सकेगा या मौत का आंकड़ा और बढ़ेगा?

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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोटी गांव में 14 अगस्त 2025 को दोपहर लगभग 11:30 बजे अचानक आए क्लाउडबर्स्ट ने भयंकर फ्लैश फ्लड को जन्म दिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तेज धमाके की आवाज़ के साथ पानी, मलबा और बड़ी- बड़ी चट्टानें दौड़ते हुए आईं, जिसे देखकर कुछ ही सेकंड में पूरी परिस्थिति तबाही में बदल गई.
 
आंकड़ों से बढ़ा दर्द
 
प्रारंभिक रिपोर्ट्स में यह पता चला कि लगभग 46 लोग मारे गए, लेकिन जैसे-जैसे राहत कार्य आगे बढ़ा, मौतों की संख्या बढ़कर अब 60 पहुंच चुकी है. ये आंकड़े प्रशासन द्वारा अभी तक पुष्टि किए गए हैं.
विश्वसनीय स्रोतों और सरकारी बुलेटिन्स के अनुसार—
  • मृतकों की संख्या बढ़कर 60 पहुंच गयी है.
  • 100 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है
  • 200 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए गए हैं, जिनका कहीं और झोंके गए पानी या मलबे के नीचे दबे होने का अंदेशा है.
राहत-बचाव कार्य
 
रिस्क्यू ऑपरेशन में NDRF, SDRF, CISF, CRPF, पुलिस, सेना, सेना के हेलीकॉप्टर और स्थानीय प्रशासन सहित अनेक एजेंसियां हिस्सा ले रही हैं.
  • 167 से अधिक लोग सुरक्षित निकाल लिए गए हैं.
  • अस्पतालों में कई गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज चल रहा है.
  • मकानों, मंदिरों, पुलों और लैंगर (कम्युनिटी किचन) की तबाही हुई है, जिससे कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन्स भी संचालित की जा रही हैं.
राजनीतिक स्तर पर प्रतिक्रिया
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसा “प्रकृति की परीक्षा” करार देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बातचीत की और सभी संभव मदद का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों की विवरणात्मक जानकारी साझा की है.
 
आगामी चुनौतियाँ 
  • भारी बारिश के पूर्वानुमान ने बचाव प्रयासों को मुश्किल बना दिया है, जिससे जमीन की मिट्टी और मलबा ढहने का खतरा बना हुआ है.
  • पर्वतिली ऑपरेशन और कठोर मौसम स्थितियों ने राहत दलों की चुनौती बढ़ाई है.
  • नुकसान का वैज्ञानिक और पर्यावरणीय स्तर पर आकलन करना अभी बाकी है.
किश्तवाड़ में आए इस क्लाउडबर्स्ट ने सिर्फ लाखों जीवन ही नहीं ले लिए, बल्कि प्रभावित इलाकों को एक नई चुनौती में जकड़ दिया है. मलबे, पानी और भूस्खलन ने जगह-जगह कोहराम मचाया है. राहत और बचाव कार्य पूरे ज़ोर-शोर से जारी हैं, लेकिन लापता लोगों की तलाश और मौसम की मार दोनों ही जरूरत को और बढ़ा रहे हैं.
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