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‘गला अभी पूरी तरह खुला नहीं’ इस्तीफे के बाद पहली बार मंच पर आए जगदीप धनखड़, RSS की तारीफ लेकिन…

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भोपाल में RSS के कार्यक्रम में शामिल हुए थे. यहां उन्होंने कहा, भगवान करे कोई नैरेटिव के चक्रव्यूह में न फंसे और अगर फंस जाए, तो समझाना मुश्किल है.

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भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच पर शिरकत की. वे मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में RSS के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की लिखी किताब 'हम और यह विश्व' का विमोचन करने पहुंचे थे. जहां उन्होंने इस्तीफे पर तो कुछ नहीं बोला लेकिन अपने भाषण में कई बातों की ओर इशारा कर दिया. 

कार्यक्रम में जगदीप धनखड़ से उनके इस्तीफे के बारे में पूछा गया. जिस पर उन्होंने हमेशा की तरह मौन साधे रखा. हालांकि उन्होंने मंच पर 35 मिनट भाषण दिया. जिसमें RSS के विचारों, सांस्कृतिक मूल्यों और नैरेटिव पर बात की. 

‘हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां लोग अपनी सोच से ही सच को तय कर लेते हैं, भले ही आप उसे नकारते रहें. आज सबसे बड़ी दिक्कत ‘नैरेटिव’ का चक्रव्यूह है. भगवान करे कोई इस चक्रव्यूह में न फंसे और अगर फंस जाए, तो समझाना मुश्किल है. मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूं पर मुझे नैरेटिव का शिकार बनाना चाहते हैं.’

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RSS की तारीफ

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'हम और यह विश्व' बुक का विमोचन करते हुए जगदीप धनखड़ ने RSS के विचारों और एक मजबूत राष्ट्र बनाने के नजरिए की तारीफ की. कार्यक्रम में उन्होंने देश के भरोसे, सांस्कृतिक जड़ों और संस्थाओं की एकता को बनाए रखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि RSS को लेकर गलतफहमियां और झूठे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन ये किताब (हम और यह विश्व) इन सब मिथकों को तोड़ती है और दिखाती है कि RSS असल में भारत को सशक्त बनाने वाली ताकत है. पूर्व उपराष्ट्रपति ने धर्म और संस्कृति का असली मतलब समझाते हुए कहा, राष्ट्र का मतलब है सांस्कृतिक एकता, धर्म का मतलब है नैतिक व्यवस्था, न्याय का मतलब है सही प्रशासन और मानव गरिमा हमारे देश की नींव है. ये ही बातें तो भारत को दुनिया में एक प्रभावी भूमिका निभाने वाला देश बनाती हैं.  

समय याद दिलाया तो मजाकिया अंदाज में दिया जवाब 

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जगदीप धनखड़ को भाषण के दौरान एक कर्मचारी ने उनके फ्लाइट का समय याद दिलाया. इस पर धनखड़ ने कहा कि वह फ्लाइट पकड़ने के लिए अपना कर्तव्य नहीं छोड़ सकते हैं. उन्होंने कहा, समय सीमा है. मैं फ्लाइट पकड़ने की चिंता से अपने कर्तव्य नहीं छोड़ सकता. फिर उन्होंने मुस्कुराते हुए अपने इस्तीफे की ओर इशारा किया और हल्के अंदाज में कहा, 'मेरा हालिया अतीत इसका सबूत है.’

अपने भाषण के आखिरी में उन्होंने कहा कि वह (जगदीप धनखड़) अपने मन की पूरी बात नहीं कह सके. समय की वजह से पूरा गला खुल नहीं पाया. आजकल तो हिंदी के चलचित्र सिने पर बार-बार आती रहती हैं. आपके सामने फिर आने का सुअवसर मिलेगा. 

मॉनसून सत्र से पहले दिया था इस्तीफा 

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जगदीप धनखड़ ने करीब 4 महीने बाद किसी सार्वजनिक मंच पर भाषण दिया है. लोगों का इंतजार था कि वह भाषण में इस्तीफे पर खुलकर बात करेंगे. हालांकि उन्होंने बिना ज्यादा कुछ बोले बड़ी बातों की ओर इशारा कर दिया. मॉनसून सत्र शुरू होने से ऐन पहले ही जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था. उन्होंने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को बताया था. इसके बाद सीपी राधाकृष्णन नए उपराष्ट्रपति चुने गए. विपक्ष ने उनके इस्तीफे को मुद्दा बनाते हुए सरकार और जगदीप धनखड़ के बीच मतभेद का आरोप लगाया था. विपक्ष का कहना था कि, जगदीप धनखड़ पर इस्तीफे का दबाव बनाया गया था. 

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